
जिला मुख्यालय के दशहरा मैदान में रविवार को प्रदेश की लोक सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का अनुपम नजारा देखने को मिला। मौका था सवाई माधोपुर स्थापना दिवस के अवसर पर अमरूद महोत्सव के दौरान आयोजित सांस्कृतिक संध्या का। राजस्थान के अलग-अलग क्षेत्रों के लोक कलाकारों ने पारंपरिक संगीत-नृत्य को मनमोहक अंदाज में पेश किया कि दर्शक उनके साथ-साथ झूमते रहे।
जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में कृषि, उद्यानिकी एवं आपदा राहत मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा मुख्य अतिथि थे। उन्होंने दर्शकों के साथ बैठकर सभी प्रस्तुतियों का आनंद लिया। उन्होंने प्रस्तुति के बाद कलाकारों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन लोकसंस्कृति के संरक्षण और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
जिला कलक्टर काना राम एवं पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार बेनीवाल ने दीप प्रज्ज्वलन कर लोक प्रस्तुतियों का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में शहर के गणमान्य लोग, जनप्रतिनिधि, विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा बड़ी संख्या में पर्यटक, एवं कला-प्रेमी और आमजन उपस्थित रहे।
सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत चाकसू (जयपुर) के कलाकारों द्वारा गणेश वंदना से हुई. सीकर की टीम ने चरी नृत्य, टोंक के कलाकारों ने कच्छी-घोड़ी एवं अलगोजा नृत्य, शेरपुर की पार्टी ने डेजर्ट सिम्फनी और कालबेलिया नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी।
निवाई (टोंक) के कलाकारों से घूमर नृत्य, भरतपुर के लोक कलाकारों से भपंग-वादन, बारां (शाहबाद) की आदिवासियों की टोली ने सहरिया स्वांग तथा छबड़ा (बारां) की टीम ने चकरी नृत्य प्रस्तुत किए। टोंक के लोक कलाकारों से मटका-चक्का नृत्य का बेहतरीन प्रदर्शन किया। सांस्कृतिक संध्या का समापन ब्रज क्षेत्र के बहज-डीग के कृष्ण-भक्त कलाकारों ने ब्रज होली एवं मयूर नृत्य की रंगारंग प्रस्तुति के साथ हुआ।














