
राजस्थान में भजन लाल शर्मा के नेतृत्व वाली सरकार पंचायत राज संस्थाओं और शहरी निकाय चुनावों से जुड़े महत्वपूर्ण नियमों में संशोधन की दिशा में आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। संकेत हैं कि चुनाव लड़ने के लिए तय की गई शैक्षणिक योग्यता और दो से अधिक संतान होने पर लगने वाली पाबंदी को हटाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इस पूरे मामले को लेकर विधि विभाग में प्रक्रिया चल रही है और सरकार इसे प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ा रही है।
तीन दशक पुराने नियम को खत्म करने की तैयारी
पंचायत और नगर निकाय चुनावों में दो से अधिक संतान होने पर अयोग्यता का प्रावधान लगभग 30 साल पुराना है। यह नियम पूर्व मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत के कार्यकाल में लागू किया गया था। समय के साथ इस व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। अब मौजूदा सरकार इस नियम को समाप्त करने के मूड में नजर आ रही है और माना जा रहा है कि जल्द ही इस पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।
विधानसभा में उठा मुद्दा, सरकार ने दी स्थिति स्पष्ट
यह पूरा मामला विधानसभा में कांग्रेस विधायक पूसाराम गोदारा द्वारा पूछे गए एक सवाल के दौरान सामने आया। उन्होंने सरकार से पूछा था कि क्या नगर निकाय चुनावों में उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता और संतान संबंधी शर्तों में संशोधन पर विचार किया जा रहा है।
इसके जवाब में सरकार ने बताया कि नगर निकाय चुनावों के लिए राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 21 में उम्मीदवारों की योग्यता से जुड़े प्रावधान तो मौजूद हैं, लेकिन इसमें कहीं भी शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य नहीं की गई है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल शैक्षणिक योग्यता से जुड़े नियमों में बदलाव का कोई औपचारिक प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
दो से अधिक संतान पर रोक हटाने की दिशा में कदम
हालांकि दो से अधिक संतान होने पर चुनाव लड़ने की रोक हटाने को लेकर सरकार ने सकारात्मक रुख दिखाया है। सरकार की ओर से बताया गया कि राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 24 में संशोधन के लिए फाइल विधि विभाग को भेज दी गई है और मामला वर्तमान में प्रक्रियाधीन है। इससे साफ है कि इस मुद्दे पर सरकार सक्रियता से काम कर रही है।
नौकरी से जुड़े कानूनों में पहले ही हो चुका है संशोधन
गौरतलब है कि राजस्थान में वर्ष 2002 में दो से अधिक संतान होने पर सरकारी नौकरी से जुड़े कड़े नियम भी लागू किए गए थे। इन नियमों के तहत नौकरी के दौरान तीसरा बच्चा होने पर पांच साल तक पदोन्नति रोकने और तीन से अधिक बच्चे होने पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति जैसे प्रावधान थे।
बाद में वर्ष 2018 में वसुंधरा राजे सरकार ने इन नियमों को खत्म करने की घोषणा की थी। साथ ही प्रमोशन रोकने की अवधि को भी पांच साल से घटाकर तीन साल कर दिया गया था, जिससे कर्मचारियों को राहत मिली थी।
लंबे समय से उठ रही थी बदलाव की मांग
राज्य में काफी समय से दो से अधिक संतान और शैक्षणिक योग्यता से जुड़े नियमों में संशोधन की मांग उठती रही है। सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों का तर्क रहा है कि ये प्रावधान लोकतांत्रिक भागीदारी को सीमित करते हैं। अब मौजूदा सरकार के रुख से संकेत मिल रहे हैं कि जल्द ही बड़ा फैसला लिया जा सकता है।
यदि इन नियमों में बदलाव होता है, तो दो से अधिक संतान वाले और औपचारिक शिक्षा से वंचित उम्मीदवार भी पंचायत और नगर निकाय चुनावों में हिस्सा ले सकेंगे। इससे न सिर्फ स्थानीय स्तर पर चुनावी समीकरण बदल सकते हैं, बल्कि जमीनी राजनीति में भी नए चेहरे और नई भागीदारी देखने को मिल सकती है।













