
राजस्थान की राजधानी जयपुर के चौमूं कस्बे में शुक्रवार सुबह प्रशासन ने अवैध अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए बुलडोजर चलाया। यह कदम 25 दिसंबर की रात मस्जिद के बाहर रेलिंग लगाने को लेकर हुए विवाद के बाद उठाया गया, जब हालात बेकाबू हो गए थे और पत्थरबाजी की घटना सामने आई थी। इस हिंसा में कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे, जिसके बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल बन गया था। प्रशासन की इस कार्रवाई को लेकर अब उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा का कड़ा बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने साफ शब्दों में उपद्रवियों को चेतावनी दी है।
‘कानून का उल्लंघन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा’
डिप्टी सीएम डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि चौमूं में कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने और हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर सख्त कदम उठाए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी समुदाय या व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि कानून के सम्मान और व्यवस्था को बनाए रखने के लिए की गई है। बैरवा ने कहा कि राजस्थान सरकार की नीति बिल्कुल साफ है—जो भी शांति भंग करेगा, उसके खिलाफ जीरो टॉलरेंस के तहत कार्रवाई होगी। राज्य में कानून से ऊपर कोई नहीं है और आम जनता की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
अवैध मीट दुकानों पर भी चला प्रशासन का डंडा
बुलडोजर कार्रवाई से पहले नगर परिषद की ओर से 24 अवैध निर्माणों को तीन बार नोटिस जारी किए गए थे और 31 दिसंबर तक स्वयं अतिक्रमण हटाने का समय दिया गया था। लेकिन निर्धारित अवधि में किसी भी संचालक ने नोटिस का पालन नहीं किया। इसके बाद प्रशासन ने सड़क सीमा में बनी अवैध मीट और नॉनवेज दुकानों को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी। इसके साथ ही सड़क पर बनाए गए अवैध रैंप हटाने के लिए भी तीन दिन का अंतिम अल्टीमेटम जारी किया गया है। नोटिस में यह भी साफ किया गया है कि यदि अतिक्रमण स्वयं नहीं हटाया गया, तो ध्वस्तीकरण का पूरा खर्च संबंधित संचालकों से वसूला जाएगा।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम, छावनी में बदला इलाका
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए चौमूं को पूरी तरह छावनी में तब्दील कर दिया गया था। मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। डीसीपी वेस्ट हनुमान प्रसाद मीणा और एडिशनल डीसीपी राजेश गुप्ता स्वयं मौके पर मौजूद रहकर हालात पर नजर बनाए हुए थे। पुलिसकर्मी हेलमेट, लाठी और सुरक्षा जैकेट पहनकर हर गतिविधि पर पैनी नजर रखे हुए थे। पूर्व विधायक रामलाल शर्मा ने भी प्रशासन की इस कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि यह उन लोगों के लिए कड़ा संदेश है, जो कानून को हाथ में लेने की कोशिश करते हैं।














