
राजस्थान विधानसभा में पेश किए जा रहे भजनलाल सरकार के तीसरे पूर्ण बजट के दौरान डिप्टी सीएम और वित्त मंत्री दिया कुमारी ने पेयजल व्यवस्था को लेकर अहम घोषणाएं कीं। उन्होंने साफ किया कि प्रदेश में स्वच्छ और नियमित पेयजल उपलब्ध कराने के साथ-साथ जल योजनाओं के प्रभावी संचालन और रखरखाव को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर नियुक्तियां की जाएंगी।
वित्त मंत्री ने अपने संबोधन में बताया कि पिछले बजट में 1050 तकनीकी अधिकारियों और कर्मचारियों की संविदा कैडर में भर्ती की घोषणा की गई थी। अब इस दायरे का विस्तार करते हुए पेयजल विभाग में कुल 3000 पदों पर भर्ती की जाएगी। सरकार का मानना है कि पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध होने से जलापूर्ति योजनाओं का संचालन अधिक व्यवस्थित और प्रभावी ढंग से हो सकेगा।
1200 नए हैंडपंप लगाने की योजना
बजट में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में पेयजल ढांचे को मजबूत करने पर विशेष बल दिया गया है। आने वाले वर्ष में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में 1200 से अधिक नए हैंडपंप स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही नई पाइपलाइन बिछाने और जल संरचनाओं के विकास का भी प्रस्ताव रखा गया है, ताकि दूरस्थ और जल संकट वाले इलाकों तक सुरक्षित पानी पहुंचाया जा सके।
सरकार का फोकस खासतौर पर उन क्षेत्रों पर रहेगा जहां गर्मियों में पेयजल संकट गहराता है। बेहतर जल वितरण तंत्र विकसित करने के लिए तकनीकी संसाधनों का उपयोग बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा कृषि और वैज्ञानिक नवाचार को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से जयपुर में एक क्षेत्रीय विज्ञान केंद्र स्थापित करने की भी घोषणा की गई है।
समग्र जलवायु नीति पर काम
दिया कुमारी ने अपने बजट भाषण में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार एक व्यापक जलवायु नीति लाने की तैयारी कर रही है। इस नीति के तहत विभिन्न जलवायु क्षेत्रों में जल स्रोतों के संरक्षण, संवर्धन और पुनर्भरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम और तकनीक आधारित निगरानी तंत्र लागू करने की योजना है। इससे जल स्रोतों की स्थिति पर रियल टाइम नजर रखी जा सकेगी और समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जा सकेंगे।
जल सुरक्षा और अनुकूलन रणनीति
राज्य सरकार दीर्घकालिक पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए जल प्रबंधन को जलवायु नीति के साथ जोड़ने की दिशा में कदम उठा रही है। इसके तहत प्रदेश स्तर पर जल सुरक्षा और जल अनुकूलन रणनीति तैयार की जाएगी, ताकि भविष्य में संभावित जल संकट से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
दूरदराज और मरुस्थलीय क्षेत्रों में जल उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक पद्धतियों और पर्याप्त वित्तीय संसाधनों का उपयोग किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के हर नागरिक को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो और जल संसाधनों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के हित में सुनिश्चित किया जा सके।














