
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष परसराम मदेरणा की पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में भाग लेने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कई गंभीर राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय रखी। उन्होंने मदेरणा को याद करते हुए कहा, "परसराम मदेरणा एक बड़े जाट नेता थे। उनका विधानसभा अध्यक्ष और मंत्री के रूप में कार्यकाल अत्यंत यादगार रहा। मैं उन्हें नमन करता हूं।"
इसके बाद गहलोत ने राजस्थान में पंचायत राज चुनाव को लेकर मौजूदा भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “राज्य सरकार जानबूझकर पंचायत चुनाव नहीं करवा रही है। यह संविधान के मूल सिद्धांतों की अवहेलना है। 'एक राज्य, एक चुनाव' की बात कहकर लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।”
“लोकतंत्र में चुनाव अनिवार्य हैं”
गहलोत ने आगे कहा, “हमारे समय में भी कर्मचारियों की समस्या थी, तब भी स्थितियाँ कठिन थीं। मामला हाई कोर्ट तक गया, लेकिन कोर्ट ने कहा कि चुनाव तय समय पर होंगे। अब देखना होगा कि चुनाव होते हैं या नहीं, लेकिन लोकतंत्र में चुनाव कराना अनिवार्य है।”
15 से 20 दिनों में सीएम को रिपोर्ट सौंपेगी कमेटी – मंत्री अविनाश गहलोत
यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा पहले ही कह चुके हैं कि पंचायत और निकाय चुनाव एक साथ कराने से चुनावी प्रक्रिया सरल होगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। इस बीच, कैबिनेट सब कमेटी के सदस्य मंत्री अविनाश गहलोत ने जानकारी दी कि 15 से 20 दिनों में मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। उसके बाद अंतिम निर्णय सीएम स्तर पर लिया जाएगा और रिपोर्ट के आधार पर चुनाव कार्यक्रम तय किया जाएगा।
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर गहलोत का बयान
इस मौके पर गहलोत ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे को भी चौंकाने वाला करार दिया। उन्होंने कहा, “मैंने पहले ही कहा था कि लोकसभा अध्यक्ष और उपराष्ट्रपति दोनों केंद्र सरकार और संघ के दबाव में कार्य कर रहे हैं। कुछ दिन पहले ही धनखड़ ने जयपुर में कहा था कि वह किसी के दबाव में नहीं हैं, लेकिन अब उनका अचानक इस्तीफा देना इस बात की पुष्टि करता है कि उन पर वाकई दबाव था। मुझे नहीं लगता कि यह फैसला स्वास्थ्य कारणों से लिया गया है, यह दबाव का ही परिणाम है।”














