
राजस्थान के झालावाड़ जिले में चर्चित एसडीएम थप्पड़ कांड के बाद सुर्खियों में आए नरेश मीणा की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। पहले एक मामले में जेल से जमानत पर बाहर आए मीणा को अब एक और मामले में जमानत नहीं मिल पाई है। इस बार सीजेएम कोर्ट ने राजकार्य में बाधा पहुंचाने से संबंधित मामले में उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी है। कोर्ट ने यह फैसला उनके आपराधिक रिकॉर्ड और उच्च न्यायालय की पूर्व शर्तों के उल्लंघन के आधार पर दिया।
कोर्ट ने जताई आशंका, जमानत पर बाहर आने के बाद कर सकते हैं नया अपराध
सीजेएम कोर्ट ने अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों और आरोपी के आपराधिक इतिहास को ध्यान में रखते हुए यह स्पष्ट किया कि यदि नरेश मीणा को जमानत पर रिहा किया जाता है, तो उनके अन्य अपराधों में फिर से शामिल होने की आशंका को नकारा नहीं जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपी ने पूर्व में उच्च न्यायालय द्वारा लगाई गई शर्तों की भी अवहेलना की है, जिससे यह साबित होता है कि वह कानून की गंभीरता को नहीं समझता।
पिपलोदी स्कूल हादसे के बाद अस्पताल में दिया था धरना
दरअसल, मनोहर थाना कस्बे के पिपलोदी स्कूल में हुए हादसे के बाद नरेश मीणा अपने कुछ साथियों के साथ झालावाड़ के जिला अस्पताल की इमरजेंसी वार्ड के बाहर धरने पर बैठ गए थे। इस धरने के दौरान उन्होंने अस्पताल कर्मचारियों से कथित तौर पर धक्का-मुक्की की, जिससे अस्पताल की कार्यवाही बाधित हुई। इसी के आधार पर जिला अस्पताल के अधीक्षक और डीन ने मीणा व अन्य के खिलाफ राजकाज में बाधा पहुंचाने, हंगामा करने व अस्पताल में अव्यवस्था फैलाने का मामला दर्ज कराया।
इस मामले में पुलिस ने नरेश मीणा के साथ-साथ उनके तीन साथियों—मुरारी, जयप्रकाश प्रदीप और गोलू मीणा—को भी गिरफ्तार किया था। एसीजेएम कोर्ट ने चारों आरोपियों को 8 अगस्त तक न्यायिक अभिरक्षा में भेजने का आदेश दिया था। इसके बाद नरेश मीणा की ओर से सीजेएम कोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की गई थी, जिसे अब खारिज कर दिया गया है।
सर्व समाज ने किया विरोध, मांगी निष्पक्ष जांच
नरेश मीणा की गिरफ्तारी को लेकर सर्व समाज के प्रतिनिधियों ने भी विरोध दर्ज कराया। उन्होंने मिनी सचिवालय के बाहर धरना प्रदर्शन कर जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ को ज्ञापन सौंपा और इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की। उनका कहना है कि उस दिन अस्पताल में अन्य राजनीतिक दलों के नेता भी मौजूद थे, लेकिन कार्रवाई सिर्फ नरेश मीणा और उनके साथियों पर की गई, जो पक्षपातपूर्ण है। इस पर कलेक्टर ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया है।
सियासी उठापटक और बढ़ती कानूनी पेचिदगियां
नरेश मीणा लगातार दो मामलों में जेल और न्यायिक कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। पहले एसडीएम थप्पड़ कांड में गिरफ्तारी और अब राजकार्य में बाधा के मामले में जमानत न मिलना, उनके लिए कानूनी और राजनीतिक स्तर पर गंभीर संकट खड़ा कर रहा है। एक ओर जहां सर्व समाज उनके समर्थन में खड़ा है, वहीं न्यायपालिका उनकी आपराधिक प्रवृत्तियों को लेकर सख्त रुख अपना रही है।
नरेश मीणा के मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। अब देखने वाली बात यह होगी कि वे उच्च न्यायालय में अपील करते हैं या नहीं। लेकिन फिलहाल, सीजेएम कोर्ट द्वारा दूसरी बार जमानत खारिज किया जाना उनके लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ है।














