
सीकर जिले के प्रसिद्ध खाटूश्यामजी मंदिर कमेटी के पूर्व कोषाध्यक्ष कालू सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह चौहान को कुख्यात लॉरेंस गैंग की ओर से जान से मारने की धमकी दी गई है। आरोप है कि फोन कर उनसे 3 करोड़ रुपये की रंगदारी की मांग की गई। यह कॉल विदेशी नंबर से आई थी। कॉल करने वाले ने खुद को हरि बॉक्सर बताते हुए लॉरेंस विश्नोई गिरोह का सदस्य होने का दावा किया। रंगदारी नहीं देने पर गोलियों और ग्रेनेड बम से हमला कर हत्या करने की धमकी दी गई। मामले से घबराए मानवेंद्र सिंह चौहान ने खाटूश्यामजी थाने में शिकायत दर्ज करवाई है।
4 जनवरी को आया धमकी भरा कॉल
पुलिस को दी गई रिपोर्ट में मानवेंद्र सिंह चौहान पुत्र कालू सिंह, निवासी वार्ड नंबर 3 खाटूश्यामजी ने बताया कि 4 जनवरी को उनके मोबाइल फोन पर विदेशी नंबर से व्हाट्सएप कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने कहा कि वह हरि बॉक्सर है और लॉरेंस विश्नोई ग्रुप से जुड़ा हुआ है। उसने सीधे शब्दों में चेतावनी दी कि अगर 3 करोड़ रुपये की व्यवस्था नहीं की गई, तो वह घर आकर गोलियों और ग्रेनेड बम से जान से मार देगा या मरवा देगा। इस गंभीर धमकी के बाद पीड़ित ने तुरंत पुलिस का रुख किया।
मानवेंद्र सिंह चौहान की शिकायत के आधार पर पुलिस ने संगठित अपराध समेत अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
“विदेशी नंबरों के जरिए जांच आगे बढ़ाई जा रही है”
खाटूश्यामजी थाना प्रभारी इंस्पेक्टर पवन कुमार चौबे ने बताया कि पीड़ित की रिपोर्ट पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है। धमकी देने वाले विदेशी नंबरों को ट्रेस किया जा रहा है और साइबर तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
पहले भी सीकर में सक्रिय रहा है लॉरेंस गैंग
यह पहला मामला नहीं है जब सीकर जिले में लॉरेंस गैंग या उससे जुड़े नेटवर्क के नाम पर धमकियां सामने आई हों। इससे पहले भी रोहित गोदारा गैंग और लॉरेंस गैंग के नाम पर जिले में करीब एक दर्जन लोगों को धमकाया जा चुका है। खाटूश्यामजी और फतेहपुर क्षेत्र में पूर्व में भी इस तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
फतेहपुर और सदर थाना क्षेत्र में ट्रांसपोर्ट कारोबारियों को मिली धमकियों के मामलों में पुलिस ने कुछ स्थानीय मीडिएटर्स को गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया था कि ये लोग इलाके के व्यापारियों और हाई-प्रोफाइल लोगों की रेकी कर विदेश में बैठे गैंगस्टरों तक उनकी जानकारी और मोबाइल नंबर पहुंचाते थे। पुलिस को आशंका है कि मौजूदा मामले में भी इसी तरह का कोई नेटवर्क सक्रिय हो सकता है, जिसकी कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।














