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ममता से मिलीं कनिमोझी, कांग्रेस से अलग क्षेत्रीय दलों को साथ लाने की अटकलों ने पकड़ा जोर

कनिमोझी ने कोलकाता में ममता बनर्जी से मुलाकात की। डीएमके के क्षेत्रीय नेताओं से संपर्क के बीच कांग्रेस से अलग संभावित मोर्चे की चर्चा तेज हुई।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Fri, 18 Sep 2026 8:53:32

ममता से मिलीं कनिमोझी, कांग्रेस से अलग क्षेत्रीय दलों को साथ लाने की अटकलों ने पकड़ा जोर

2029 के लोकसभा चुनाव से काफी पहले विपक्षी राजनीति में संभावित नए समीकरणों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। इसी सिलसिले में डीएमके की वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने गुरुवार को कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच यह बैठक दक्षिण कोलकाता के कालीघाट स्थित ममता बनर्जी के आवास पर हुई। हालांकि, बैठक में किन मुद्दों पर विस्तार से बातचीत हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

कनिमोझी की पिछले कुछ समय में कई क्षेत्रीय नेताओं के साथ हुई मुलाकातों के बाद इस बैठक को लेकर राजनीतिक हलकों में कांग्रेस से अलग क्षेत्रीय दलों के संभावित मंच की चर्चा तेज हुई है। हालांकि, अभी तक डीएमके या तृणमूल कांग्रेस की ओर से ऐसे किसी नए गठबंधन की औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। इसलिए इसे फिलहाल संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर चल रही अटकलों के तौर पर ही देखा जा रहा है।

ममता से पहले इन नेताओं से भी मिल चुकी हैं कनिमोझी

ममता बनर्जी से मुलाकात से पहले कनिमोझी ने शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे और एनसीपी एसपी की सांसद सुप्रिया सुले समेत अन्य क्षेत्रीय नेताओं से बातचीत की थी। 12 सितंबर को मुंबई में उद्धव ठाकरे से उनकी मुलाकात हुई थी। इसके बाद दिल्ली में उन्होंने एनसीपी एसपी प्रमुख शरद पवार और सुप्रिया सुले से भी चर्चा की। इन मुलाकातों के बीच क्षेत्रीय दलों के बीच समन्वय और विपक्षी राजनीति के भविष्य को लेकर चर्चाओं ने जोर पकड़ा है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, डीएमके के एक नेता ने कहा कि पार्टी कांग्रेस के बिना तीसरे मोर्चे की संभावना तलाश रही है। हालांकि, ममता बनर्जी और कनिमोझी की गुरुवार की बैठक के एजेंडे को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। एक टीएमसी नेता ने भी कहा कि बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन उनकी विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई।

डीएमके और कांग्रेस के रिश्तों में क्यों आई दूरी

कनिमोझी की क्षेत्रीय नेताओं से मुलाकातों का दौर ऐसे समय में चल रहा है, जब डीएमके और कांग्रेस के संबंधों में तनाव की चर्चा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, तमिलनाडु की राजनीति में दोनों दलों के बीच पुराने गठबंधन समीकरणों में बदलाव आया है। कांग्रेस के राज्य की राजनीति में नए राजनीतिक समीकरणों की ओर बढ़ने के बाद डीएमके और कांग्रेस के बीच दूरी बढ़ने की बात सामने आई है।

इसी पृष्ठभूमि में डीएमके की ओर से दूसरे क्षेत्रीय दलों के साथ बातचीत को राष्ट्रीय राजनीति में नए समीकरणों की तलाश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इन बैठकों को सीधे किसी नए गठबंधन की अंतिम तैयारी मानने की पुष्टि अभी संबंधित दलों की ओर से नहीं हुई है।

बंगाल में ममता और कांग्रेस के बीच सीटों को लेकर भी चर्चा

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के बीच संबंधों को लेकर भी हाल में चर्चा रही है। आगामी उपचुनावों के संदर्भ में कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने दावा किया था कि टीएमसी की ओर से कांग्रेस से संपर्क किया गया था और नंदीग्राम सीट छोड़ने की पेशकश की गई थी। टीएमसी ने इस दावे से इनकार किया था। इस मुद्दे को लेकर दोनों दलों के अलग-अलग बयान सामने आए हैं।

यही वजह है कि कांग्रेस और टीएमसी के बीच मौजूदा राजनीतिक संबंधों को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, किसी संभावित राष्ट्रीय गठबंधन में ममता बनर्जी की भूमिका या कांग्रेस से अलग होने को लेकर उनकी ओर से कोई औपचारिक घोषणा इस बैठक के बाद सामने नहीं आई है।

तीसरे मोर्चे की चर्चा नई नहीं

कांग्रेस और बीजेपी से अलग क्षेत्रीय दलों को एक मंच पर लाने की कोशिश भारतीय राजनीति में पहले भी होती रही है। 2013 में ममता बनर्जी ने कांग्रेस और बीजेपी से अलग दलों के साथ एक संघीय मोर्चे की संभावना पर जोर दिया था। इसके कुछ साल बाद तेलंगाना के तत्कालीन मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने भी क्षेत्रीय दलों को साथ लाने की कोशिश की थी। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने विभिन्न राज्यों के नेताओं से मुलाकातें की थीं, लेकिन यह पहल चुनाव से पहले किसी औपचारिक राष्ट्रीय गठबंधन में तब्दील नहीं हुई।

2024 के लोकसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल की ओर से भी विपक्षी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को साथ लाकर एक अलग राजनीतिक समूह बनाने की कोशिश की चर्चा में रही थी। यह पहल भी किसी अलग राष्ट्रीय चुनावी मोर्चे के रूप में सामने नहीं आई।

अब कनिमोझी की लगातार क्षेत्रीय नेताओं से मुलाकातों ने एक बार फिर इस तरह के संभावित राजनीतिक मंच की चर्चा को सामने ला दिया है। फिलहाल ममता बनर्जी और कनिमोझी की बैठक से किसी नए गठबंधन पर अंतिम निर्णय होने की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में 2029 लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी दलों के बीच आगे होने वाली बैठकों और आधिकारिक बयानों पर नजर रहेगी।

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