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अगले साल 14 जनवरी से शुरू होगा JLF, दो नए अवॉर्ड्स से जुड़ेगा कला का नया आयाम

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का 20वां संस्करण अगले साल 14 जनवरी से 18 जनवरी 2027 तक राजस्थान की राजधानी जयपुर में आयोजित किया जाएगा। मौजूदा संस्करण के समापन के साथ ही आयोजकों ने यह स्पष्ट किया कि अगला आयोजन पहले से अधिक व्यापक, समावेशी और अंतरराष्ट्रीय स्वरूप वाला होगा।

Posts by : Rajesh Bhagtani | Updated on: Tue, 20 Jan 2026 10:40:22

अगले साल 14 जनवरी से शुरू होगा JLF, दो नए अवॉर्ड्स से जुड़ेगा कला का नया आयाम

विश्व स्तर पर पहचान बना चुके जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के अगले संस्करण की तारीखों का ऐलान कर दिया गया है। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का 20वां संस्करण अगले साल 14 जनवरी से 18 जनवरी 2027 तक राजस्थान की राजधानी जयपुर में आयोजित किया जाएगा। मौजूदा संस्करण के समापन के साथ ही आयोजकों ने यह स्पष्ट किया कि अगला आयोजन पहले से अधिक व्यापक, समावेशी और अंतरराष्ट्रीय स्वरूप वाला होगा। इस बार फेस्टिवल में कला और रचनात्मक अभिव्यक्तियों से जुड़े दो नए अवॉर्ड्स शुरू करने की भी तैयारी की जा रही है।

हेरिटेज फेस्टिवल के बाद होगी JLF की भव्य शुरुआत


आयोजकों के अनुसार, जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल से पहले इसी साल दिसंबर में जयगढ़ हेरिटेज फेस्टिवल आयोजित किया जाएगा। हेरिटेज फेस्टिवल के समापन के बाद साहित्य प्रेमियों के लिए जेएलएफ का मंच सजेगा। यह क्रम न केवल सांस्कृतिक निरंतरता को दर्शाता है, बल्कि जयपुर को एक लंबे सांस्कृतिक उत्सव के केंद्र के रूप में भी स्थापित करता है।

मकर संक्रांति और काइट फेस्टिवल के बीच संतुलन

14 जनवरी को मकर संक्रांति और पतंग उत्सव होने को लेकर उठे सवालों पर आयोजकों ने स्पष्ट किया कि जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल की तारीखें अकेले आयोजकों द्वारा तय नहीं की जातीं। इन तिथियों का निर्धारण राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन के साथ समन्वय के बाद किया जाता है, ताकि सुरक्षा, यातायात और व्यवस्थाओं में किसी प्रकार की बाधा न आए।

अब सिर्फ भारत नहीं, वैश्विक पहचान बन चुका है JLF


आयोजकों का कहना है कि जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल अब केवल भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक साहित्य और विचार-विमर्श का एक सशक्त मंच बन चुका है। विदेशों, विशेषकर यूरोप जैसे क्षेत्रों में भी जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के संस्करण आयोजित होना भारत की सांस्कृतिक पहचान के अंतरराष्ट्रीय विस्तार का प्रमाण है। विदेशी धरती पर इस तरह के प्रतिष्ठित साहित्यिक आयोजन को सफलतापूर्वक स्थापित करना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

कड़ी चयन प्रक्रिया, सीमित आमंत्रण

फेस्टिवल की तैयारियों को बेहद जटिल और विस्तृत बताया गया है। एक सफल आयोजन के लिए करीब चार महीने तक निरंतर योजना, समन्वय और प्रबंधन की जरूरत पड़ती है। हर वर्ष दुनिया भर से 2000 से अधिक लेखक, पत्रकार, विचारक और बुद्धिजीवी फेस्टिवल में शामिल होने के लिए आवेदन करते हैं, लेकिन गहन चयन प्रक्रिया के बाद केवल लगभग 400 प्रतिभागियों को ही आमंत्रित किया जाता है।


राज्य सरकार की सक्रिय भूमिका रही खास

हालिया संस्करण में राजस्थान सरकार की भागीदारी को ऐतिहासिक माना गया। यह पहली बार रहा जब राज्य सरकार ने सीधे तौर पर जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल को समर्थन दिया। पहले यह सहयोग मुख्य रूप से पर्यटन विभाग तक सीमित था, लेकिन इस बार शीर्ष स्तर पर उपस्थिति और समर्थन ने सरकार की सांस्कृतिक प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। बीते संस्करण में करीब 350 सत्र आयोजित हुए, जिनमें साहित्य, राजनीति, इतिहास, समाज, पर्यावरण, तकनीक और समकालीन वैश्विक मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।

संवाद और विचार-विमर्श पर रहा फोकस

आयोजकों ने यह भी सुनिश्चित किया कि फेस्टिवल अनावश्यक विवादों से दूर रहे और संवाद, विमर्श व विचारों का आदान-प्रदान ही इसका मूल उद्देश्य बना रहे। बड़ी संख्या में विदेशी लेखक और श्रोता हर साल जयपुर पहुंचते हैं, जिनमें से कई भारत की संस्कृति, परंपरा, सामाजिक विविधता और जीवनशैली को करीब से समझने के उद्देश्य से भी इस आयोजन में भाग लेते हैं। इस लिहाज से जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल न केवल साहित्यिक, बल्कि सांस्कृतिक और पर्यटन के स्तर पर भी देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बन चुका है।


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