
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में गूगल मैप पर आंख मूंदकर भरोसा करना एक परिवार के लिए भारी त्रासदी साबित हुआ। देर रात बनास नदी की एक जर्जर पुलिया पर वैन फंसने से नौ लोग पानी के तेज बहाव में बह गए। स्थानीय ग्रामीणों और पुलिस की तत्परता से पांच लोगों को तो बचा लिया गया, लेकिन चार में से तीन की मौत हो चुकी है, जबकि एक की तलाश अब भी जारी है। राशमी थाना क्षेत्र में यह घटना मंगलवार आधी रात के बाद हुई। भोपालसागर के कानाखेड़ा गांव का परिवार भीलवाड़ा के प्रसिद्ध सवाईभोज मंदिर में दर्शन कर लौट रहा था। रास्ता भटकने पर उन्होंने गूगल मैप की मदद ली। ऐप ने उन्हें सोमी-उपरेड़ा पुलिया की ओर मोड़ दिया, जो पिछले तीन साल से बंद थी और इस पर से तेज पानी बह रहा था। अंधेरे में ड्राइवर को हालात समझ नहीं आए और वैन पुलिया के गड्ढे में फंसकर बहाव में समा गई।
नदी में बचाव कार्य बना चुनौती
बनास नदी में लगातार बजरी खनन से बने गहरे गड्ढों ने रेस्क्यू अभियान और कठिन बना दिया। सिविल डिफेंस की टीम को रात में ही अलर्ट कर दिया गया, लेकिन अंधेरा होने के कारण राहत कार्य शुरू नहीं हो पाया। सुबह होते ही नावों की मदद से ऑपरेशन चलाया गया। ग्रामीण भी बड़ी संख्या में मौके पर जुट गए और प्रशासन की मदद की। रेस्क्यू टीम को सुबह दो महिलाओं और एक बच्ची के शव मिले। अब तक इनकी पहचान स्पष्ट नहीं हो पाई है। परिवार की बाकी एक बच्ची अब भी लापता है, जिसकी तलाश लगातार जारी है। घटना स्थल पर राशमी एसडीएम, गंगरार डिप्टी और स्थानीय थाना पुलिस मौजूद हैं और राहत कार्य की निगरानी कर रहे हैं।
कौन बचे और कौन बहे?
पुलिस ने बताया कि ग्रामीणों की बहादुरी से मदनलाल (25), हितेश (16), लीला (18) और दो मासूम शिशु – काव्यांश व आयांश (9-9 माह) को सुरक्षित बाहर निकाला गया। वहीं हादसे में चंदा (21), ममता (25), खुशी (4) और रुत्वी (6) पानी के तेज बहाव में बह गए। इनमें से तीन के शव मिल चुके हैं और एक बच्ची की खोज अभी भी जारी है।
स्थानीयों में आक्रोश और सवाल
घटना ने न सिर्फ एक परिवार को झकझोर दिया बल्कि ग्रामीणों में भी आक्रोश फैला दिया है। लोगों का कहना है कि जब पुलिया तीन साल से बंद थी, तो गूगल मैप अब भी इसे चालू रास्ते के रूप में क्यों दिखा रहा था? साथ ही प्रशासन पर भी सवाल उठ रहे हैं कि खतरनाक पुलिया को लेकर कोई चेतावनी बोर्ड या सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं थे।














