
जयपुर: राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की भर्तियों में ओएमआर शीट से छेड़छाड़ के खुलासे के बाद सियासी माहौल लगातार गर्माया हुआ है। एसओजी की जांच सामने आने के बाद भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं। इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर प्रदेश की भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। गहलोत का कहना है कि मौजूदा सरकार अपने कार्यकाल की भर्तियों की जांच से बचने की कोशिश कर रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा अपनी सरकार के दो साल के कार्यकाल के दौरान हुई भर्तियों की फाइलें न खोलने के लिए विशेष संचालन समूह (SOG) पर दबाव बना रहे हैं। सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए एक बयान में गहलोत ने लिखा कि कांग्रेस का हमेशा से यह स्पष्ट रुख रहा है कि युवाओं के साथ न्याय होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भर्ती घोटालों की जांच उस समय से होनी चाहिए जब यह सिलसिला शुरू हुआ था और 2026 तक की सभी भर्तियों को इसकी जद में लिया जाना चाहिए।
गहलोत ने मुख्यमंत्री के उस बयान को भ्रामक और हास्यास्पद बताया, जिसमें कहा गया था कि राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड में पकड़े गए आरोपी केवल कांग्रेस शासन के दौरान ही गड़बड़ियों में शामिल थे। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई व्यक्ति 2019 में ओएमआर शीट बदलने जैसे अपराध में संलिप्त था और 2026 तक उसी पद पर बना रहा, तो क्या यह मान लेना तर्कसंगत है कि उसने भाजपा सरकार के कार्यकाल 2024-25 के दौरान अचानक अपराध करना बंद कर दिया होगा?
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जांच पूरी होने से पहले ही अपने कार्यकाल को ‘क्लीन चिट’ देना क्या एसओजी पर अप्रत्यक्ष दबाव नहीं है कि 2024-25-26 की फाइलों को खोला ही न जाए। उन्होंने हाल ही में जोधपुर के शेरगढ़ उपखंड का उदाहरण देते हुए कहा कि सड़क पर रीट भर्ती परीक्षा 2025 के दर्जनों एडमिट कार्ड पड़े मिले, जबकि उस इलाके में 100 किलोमीटर तक कोई परीक्षा केंद्र नहीं था। गहलोत ने मांग की कि यह भी गंभीर जांच का विषय है कि ये एडमिट कार्ड वहां कैसे पहुंचे और क्या किसी तरह की अनियमितता हुई है।
अशोक गहलोत ने कहा कि भाजपा सरकार का रवैया ऐसा प्रतीत होता है मानो उसका मकसद व्यवस्था को सुधारना और युवाओं को न्याय दिलाना नहीं, बल्कि केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप करना है। उन्होंने अपनी सरकार का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस शासन में जब भी गड़बड़ियां सामने आईं, तो बिना किसी राजनीतिक दबाव के सख्त कदम उठाए गए। उन्होंने बताया कि उनकी सरकार ने आरपीएससी सदस्य सहित 265 से अधिक लोगों को जेल भेजा, कड़े कानून बनाए और भर्ती माफिया की संपत्तियों पर बुलडोजर चलवाया।
गहलोत ने कहा कि सरकार को किसी भी तरह की जांच से डरना नहीं चाहिए। यदि सच सामने लाना है तो अपने ही कार्यकाल की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करानी चाहिए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। उन्होंने आरोप लगाया कि अब यह साफ नजर आने लगा है कि भाजपा सरकार राज्य की जांच एजेंसियों पर दबाव डाल रही है ताकि जांच को केवल 2023 तक सीमित रखा जाए और 2024-25-26 की भर्तियों को जांच के दायरे से बाहर रखा जाए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि एसओजी स्वयं राज्य पुलिस की एक इकाई है और उसने स्पष्ट रूप से बताया है कि पिछले 11 वर्षों से ओएमआर शीट में गड़बड़ियां हो रही थीं। ऐसे में राज्य सरकार को एसओजी की बात को गंभीरता से लेना चाहिए और जांच को किसी भी तरह से सीमित करने के बजाय पूरी अवधि की निष्पक्ष पड़ताल करानी चाहिए, ताकि युवाओं का विश्वास बहाल हो सके।














