
कोटा: हाड़ौती अंचल को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन नक्शे पर मजबूती से स्थापित करने की दिशा में कोटा में तीन दिवसीय ‘कोटा हाड़ौती ट्रैवल मार्ट’ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रदेश की उपमुख्यमंत्री एवं पर्यटन मंत्री दीया कुमारी ने कार्यक्रम में शिरकत कर हाड़ौती की पर्यटन क्षमता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जयपुर, जोधपुर और उदयपुर जैसे लोकप्रिय शहरों की तुलना में हाड़ौती को अब तक वह पहचान नहीं मिल पाई, जिसकी यह हकदार है। जबकि इस क्षेत्र में वन्यजीव अभयारण्य, ऐतिहासिक दुर्ग, चंबल नदी की रोमांचक बोट सफारी और कोटा की विश्वप्रसिद्ध साड़ियां जैसे कई आकर्षण मौजूद हैं। डिप्टी सीएम ने आगामी एक्सप्रेसवे परियोजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि आने वाले समय में हर पर्यटक के कैलेंडर में कोटा और हाड़ौती को स्थान मिलना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान पूर्व सांसद एवं कोटा के पूर्व महाराव इज्यराज सिंह, होटल फेडरेशन ऑफ राजस्थान की कोटा डिवीजन के अध्यक्ष अशोक माहेश्वरी सहित कई गणमान्य अतिथियों के साथ डिप्टी सीएम ने ट्रैवल मार्ट में लगी प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। इस प्रदर्शनी में 300 से अधिक टूर ऑपरेटर्स ने हिस्सा लिया, जहां वे कोटा और आसपास के पर्यटन स्थलों, होटल सुविधाओं और ठहरने के विकल्पों की जानकारी हासिल कर रहे हैं।
हाड़ौती के पर्यटन को नई पहचान देने की कोशिश
डिप्टी सीएम दीया कुमारी ने कहा कि कोटा संभाग में जल्द ही एयरपोर्ट सुविधा शुरू होने से इसकी दूरी और भी कम हो जाएगी। यात्रियों को नई जगहों के बारे में बताने और उन्हें अलग अनुभव देने की जरूरत है, क्योंकि आज का पर्यटक कुछ नया देखना और महसूस करना चाहता है। उन्होंने चंबल बोट सफारी की सराहना करते हुए कहा कि यह अनुभव बेहद सुंदर और आकर्षक है, जिसकी हर ओर प्रशंसा हो रही है। सरकार इन सभी पर्यटन स्थलों के प्रचार-प्रसार को प्राथमिकता देगी। उन्होंने बताया कि सरकार की घोषणा के अनुसार अगले पांच वर्षों में राज्य में 9 नए एक्सप्रेसवे बनाए जाएंगे, जिनमें से दो का निर्माण राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा किया जा रहा है, जबकि दो अन्य एक्सप्रेसवे पर काम शुरू हो चुका है। इसके साथ ही राज्य के कई स्टेट हाईवे को नेशनल हाईवे में परिवर्तित करने के प्रयास भी जारी हैं।
अब हाड़ौती को मिला सही मौका
पूर्व महाराज कुमार जयदेव सिंह ने कहा कि हाड़ौती में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। राजस्थान के मेवाड़, मारवाड़, ढूंढाड़ और शेखावाटी जैसे क्षेत्रों में पर्यटन पहले से ही मजबूत स्थिति में है, लेकिन हाड़ौती अब तक पीछे रह गया। यहां विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य, स्थापत्य कला, वन्यजीव अभयारण्य, टाइगर रिजर्व और चंबल की बोट राइड जैसी विशेषताएं मौजूद हैं। इसके अलावा कोटा साड़ी के रूप में टेक्सटाइल टूरिज्म की भी बड़ी संभावना है।
रामगढ़ क्रेटर और ऐतिहासिक धरोहरें
जयदेव सिंह ने बताया कि देश में मौजूद तीन प्रमुख क्रेटरों में से एक बारां जिले का रामगढ़ क्रेटर हाड़ौती क्षेत्र में स्थित है। यहां स्थित भंडदेवरा मंदिर अपनी खजुराहो शैली की वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। इसके साथ ही किला, वेटलैंड और अन्य ऐतिहासिक स्थल भी यहां मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि आमतौर पर लोग कोटा को केवल कोचिंग और शिक्षा नगरी के रूप में जानते हैं, जबकि कोचिंग का विकास 1980 के बाद हुआ। वास्तविकता यह है कि कोटा शहर की स्थापना 1264 में हो चुकी थी और इसका इतिहास बेहद समृद्ध है। हाड़ौती में ऐसे कई अनोखे लैंडमार्क और डेस्टिनेशन हैं, जो देश-दुनिया में दुर्लभ हैं। अब तक इस क्षेत्र की सबसे बड़ी कमी प्रचार-प्रसार की रही है, जिसके कारण पर्यटन उद्योग और यात्रियों को यहां की असली संभावनाओं का अंदाजा नहीं हो सका।














