
बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ सामने आ रही हिंसा और उत्पीड़न की घटनाओं पर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गहरी चिंता और पीड़ा व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि वहां से लगातार आ रही खबरें बेहद झकझोर देने वाली हैं और संवेदनशील समाज के लिए चिंता का विषय हैं।
अशोक गहलोत ने अपने पोस्ट में लिखा कि बीते महज 19 दिनों के भीतर पांच हिंदुओं की हत्या की खबरें सामने आना बेहद डरावना है। इसके साथ ही महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचार मानव मूल्यों को शर्मसार करने वाले हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं किसी भी सभ्य समाज के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकतीं और यह सीधे तौर पर मानवता पर कलंक हैं।
1971 का दौर याद दिलाया, इंदिरा गांधी के नेतृत्व का किया उल्लेख
पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे अपने संदेश में वर्ष 1971 की ऐतिहासिक घटनाओं को याद करते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने लिखा कि वह दौर आज भी स्मृति में ताजा है, जब भारत ने मजबूत कूटनीति और अडिग राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिचय दिया था। इंदिरा गांधी ने अंतरराष्ट्रीय दबावों की परवाह किए बिना निर्णायक कदम उठाए, जिसके चलते न केवल इतिहास बदला बल्कि दक्षिण एशिया का भूगोल भी नया रूप ले सका।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उस समय अमेरिका जैसी महाशक्ति ने भारत के खिलाफ सातवां बेड़ा रवाना किया था, इसके बावजूद भारत ने अपने सिद्धांतों और मानवीय मूल्यों से समझौता नहीं किया।
बांग्लादेश से आ रही हिंदू अल्पसंख्यकों के साथ बर्बरता की खबरें विचलित करने वाली हैं। महज 19 दिनों में 5 हिंदुओं की हत्या एवं वहां महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचार मानवता पर कलंक हैं।
— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) January 6, 2026
1971 के उस दौर की यादें आज भी ताजा हैं जब श्रीमती इंदिरा गांधी जी के नेतृत्व में भारत ने न केवल…
केंद्र सरकार की विदेश नीति पर उठाए सवाल
अशोक गहलोत ने वर्तमान हालात पर टिप्पणी करते हुए इसे गंभीर चिंता का विषय बताया कि जिस देश के निर्माण में भारत की अहम भूमिका रही, वही आज भारत विरोधी रुख अपनाता दिखाई दे रहा है। उन्होंने इसे केंद्र सरकार की कूटनीतिक विफलता करार देते हुए कहा कि केवल ‘गहरी चिंता’ जैसे औपचारिक बयान पर्याप्त नहीं हैं।
उनका कहना था कि भारत सरकार को पड़ोसी देश में रह रहे अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, जीवन और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाने चाहिए। यह केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि नैतिक और कूटनीतिक जिम्मेदारी भी है।
प्रधानमंत्री से निर्णायक हस्तक्षेप की अपील
अपने बयान के अंत में गहलोत ने प्रधानमंत्री से इस मामले में सीधा और प्रभावी हस्तक्षेप करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इतिहास यह साबित करता है कि खोखले नारों से नहीं, बल्कि मजबूत और निर्णायक नेतृत्व से ही निर्दोष लोगों की जान बचाई जा सकती है। प्रधानमंत्री को बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पर प्रभावी दबाव बनाना चाहिए, ताकि वहां अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे अत्याचारों को तुरंत रोका जा सके।














