
राजस्थान में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए शुरू की गई राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इस योजना को लेकर राजनीतिक उठापटक भी शुरू हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मुद्दे पर मौजूदा सरकार पर सीधे हमला किया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी चिंता व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि सत्ता बदलते ही इस योजना में कई समस्याएं सामने आने लगी हैं।
गहलोत का तंज
अशोक गहलोत ने ट्वीट में स्पष्ट किया कि उनकी कांग्रेस सरकार ने RGHS योजना को केंद्र की CGHS (सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम) की तर्ज पर बनाया था। इसका उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों, पेंशनरों और उनके परिवार को कैशलेस इलाज और दवाइयां मुहैया कराना था। उन्होंने कहा कि दिसंबर 2023 तक यह योजना बिना किसी बड़ी बाधा के चल रही थी। अगर कोई अस्पताल या मेडिकल स्टोर नियमों का उल्लंघन करता, तो उस पर तत्काल कार्रवाई की जाती थी। लेकिन सत्ता बदलते ही स्थिति बदल गई है।
इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है
गहलोत ने कहा कि केंद्र में सरकार बदलती रहती है, लेकिन CGHS योजना लगातार सुचारू रूप से चलती रहती है। राजस्थान में सत्ता बदलते ही RGHS योजना में दिक्कतें आने लगीं, जिसका असर सीधे सरकारी कर्मचारियों, पेंशनरों और उनके परिवार पर पड़ा। उन्हें इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।
अस्पतालों का भुगतान संकट
पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि कुछ निजी अस्पताल और मेडिकल स्टोर्स सरकार से बकाया भुगतान न मिलने के कारण RGHS के तहत इलाज और दवाइयां देना बंद कर चुके थे। सरकार द्वारा भुगतान का वादा किए जाने के बाद सेवाएं बहाल हुईं, लेकिन अब एक बार फिर भुगतान न होने के कारण समस्या उत्पन्न हो रही है।
'नीयत और नीति साफ होनी चाहिए'
गहलोत ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “यह बेहद दुखद है कि हर महीने सैलरी से RGHS के लिए पैसा काटने के बावजूद कर्मचारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार को इस योजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए गंभीरता दिखानी होगी। योजना को जारी रखने के लिए नीयत और नीति स्पष्ट होनी चाहिए।”
RGHS योजना क्या है?
राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) एक महत्वाकांक्षी योजना थी, जिसे गहलोत सरकार ने शुरू किया था। इसका उद्देश्य राज्य के सरकारी कर्मचारियों, पेंशनरों और उनके आश्रितों को मुफ्त और कैशलेस इलाज मुहैया कराना था। योजना के तहत अस्पताल में भर्ती होने या OPD में इलाज के लिए मरीज को अपनी जेब से पैसे नहीं देने पड़ते। सभी बिल सीधे सरकार द्वारा अनुमोदित निजी अस्पतालों और मेडिकल स्टोर्स को भेजे जाते हैं। यह योजना लाखों लोगों के लिए राहत का स्रोत थी, खासकर बुजुर्गों और पेंशनरों के लिए, जिन्हें महंगे इलाज की जरूरत पड़ती है।














