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अशोक गहलोत ने सीएम भजनलाल को भेजा पत्र, राजस्थान में न्यूनतम वेतन सुधार को लेकर दिए 5 अहम सुझाव

अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर राजस्थान में न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने की मांग की। श्रमिकों की आय, महंगाई और नीतिगत सुधारों को लेकर 5 अहम सुझाव दिए गए।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Fri, 01 May 2026 9:07:44

अशोक गहलोत ने सीएम भजनलाल को भेजा पत्र, राजस्थान में न्यूनतम वेतन सुधार को लेकर दिए 5 अहम सुझाव

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस की पूर्व संध्या पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को एक विस्तृत पत्र भेजते हुए राज्य के लाखों श्रमिकों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने पत्र में कहा कि राजस्थान में न्यूनतम मजदूरी की मौजूदा दरें देश के कई विकसित और प्रगतिशील राज्यों की तुलना में काफी कम हैं, इसलिए इसमें तत्काल सुधार की आवश्यकता है।

गहलोत ने अपने पत्र में सरकार से इस विषय पर गंभीरता से विचार करने और श्रमिकों के हित में नीतिगत बदलाव करने की अपील की है, ताकि मेहनतकश वर्ग को बेहतर जीवन स्तर मिल सके।

गहलोत ने पत्र में क्या कहा?

अशोक गहलोत ने अपने पत्र में लिखा कि 1 मई को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाया जाता है और इस अवसर पर यह जरूरी है कि राजस्थान में न्यूनतम मजदूरी की स्थिति पर ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि श्रम विभाग के आंकड़ों के अनुसार मार्च 2026 तक राजस्थान न्यूनतम वेतन के मामले में देश के निचले पायदान वाले राज्यों में शामिल है, जो बेहद चिंताजनक स्थिति है और इसमें सुधार आवश्यक है।

राजस्थान में न्यूनतम मजदूरी की मौजूदा स्थिति

वर्तमान व्यवस्था के अनुसार राजस्थान में अकुशल श्रमिकों को लगभग 7,410 रुपये प्रतिमाह और उच्च कुशल श्रमिकों को करीब 9,334 रुपये प्रतिमाह न्यूनतम मजदूरी मिल रही है। गहलोत ने बताया कि पिछले लगभग दस वर्षों में इसमें केवल 40 से 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि इसी अवधि में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) लगभग दोगुना हो चुका है।

इसका सीधा असर श्रमिकों की वास्तविक आय पर पड़ा है। उनके अनुसार वास्तविक क्रय शक्ति में केवल 20 से 30 प्रतिशत तक ही सुधार हुआ है, जबकि बाकी बढ़ोतरी महंगाई की वजह से समाप्त हो गई है।

अन्य राज्यों से तुलना पर सवाल

गहलोत ने अपने पत्र में अन्य राज्यों का उदाहरण देते हुए बताया कि केरल में मजदूरी में 90 से 110 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है, जबकि तमिलनाडु और दिल्ली में यह वृद्धि 80 से 90 प्रतिशत के बीच रही है। इसके मुकाबले राजस्थान काफी पीछे है, जो नीति स्तर पर गंभीर चिंता का विषय है।

उन्होंने यह भी कहा कि परिवर्तनीय महंगाई भत्ता (VDA) को नियमित रूप से अपडेट नहीं किया जा रहा है, जबकि इसे CPI से जोड़ने की व्यवस्था पहले से है। इसके चलते श्रमिकों को बढ़ती महंगाई का पूरा भार स्वयं उठाना पड़ रहा है।

नीतिगत सुधारों की जरूरत पर जोर


गहलोत ने यह भी कहा कि राजस्थान में सभी असंगठित और असूचीबद्ध क्षेत्रों के लिए एक समान मजदूरी दर लागू है, जबकि कृषि, निर्माण, घरेलू कार्य और ईंट भट्टा जैसे क्षेत्रों की परिस्थितियां अलग-अलग हैं। ऐसे में क्षेत्रवार अलग मजदूरी प्रणाली आवश्यक है।

उन्होंने यह भी बताया कि परिवहन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे बढ़ते खर्चों को मजदूरी गणना में शामिल नहीं किया गया है, जबकि ये जीवन यापन का अहम हिस्सा बन चुके हैं।

अशोक गहलोत के 5 प्रमुख सुझाव

पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में निम्नलिखित सुझाव दिए—


- न्यूनतम मजदूरी को तत्काल बढ़ाकर 12,000 से 15,000 रुपये प्रतिमाह के बीच निर्धारित किया जाए, ताकि यह वर्तमान महंगाई और जीवन-यापन की लागत के अनुरूप हो सके।
- VDA संशोधन को हर छह महीने में स्वतः और अनिवार्य रूप से लागू किया जाए, जिससे श्रमिकों को महंगाई से वास्तविक राहत मिल सके।
- केरल और तमिलनाडु की तर्ज पर राजस्थान में भी क्षेत्र-विशिष्ट मजदूरी प्रणाली लागू की जाए, जिससे अलग-अलग क्षेत्रों के अनुसार दरें तय हों।
- मजदूरी की गणना में परिवहन, स्वास्थ्य और शिक्षा भत्तों को भी शामिल किया जाए, जैसा कि कई विकसित राज्यों में किया जाता है।
- न्यूनतम मजदूरी कानून के प्रभावी पालन के लिए निरीक्षण व्यवस्था को मजबूत किया जाए, डिजिटल मॉनिटरिंग बढ़ाई जाए और उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित हो।

श्रमिकों की भूमिका पर अंतिम टिप्पणी

गहलोत ने अपने पत्र के अंत में कहा कि राजस्थान एक श्रमिक-प्रधान राज्य है और यहां के मजदूर तथा असंगठित क्षेत्र के कामगार राज्य की अर्थव्यवस्था की असली रीढ़ हैं। यदि उन्हें उचित और सम्मानजनक वेतन नहीं मिलेगा तो न केवल उनके परिवार आर्थिक संकट में आएंगे, बल्कि राज्य की आर्थिक प्रगति और उपभोग क्षमता पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

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