
मुंबई की राजनीति में एक दिन तक हलचल मचाने के बाद शिवसेना (यूबीटी) की नगरसेविका सरिता म्हस्के आखिरकार सामने आ गई हैं। उद्धव ठाकरे की पार्टी से चुनाव जीतने वाली सरिता लगभग 24 घंटे तक संपर्क से बाहर रहीं, जिसके बाद उनके राजनीतिक रुख को लेकर तमाम तरह की अटकलें लगने लगी थीं। अब लौटने के बाद उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि वह पूरी तरह शिवसेना यूबीटी के साथ हैं और शिंदे गुट में जाने का सवाल ही नहीं उठता।
सरिता म्हस्के ने बताया कि वह तुलजापुर स्थित मां भवानी मंदिर में दर्शन के लिए गई थीं, जिसकी वजह से उनकी वापसी में देरी हुई। उन्होंने कहा कि इस यात्रा को लेकर उन्होंने पहले ही पार्टी नेतृत्व को सूचित कर दिया था।
‘मैं कहीं गायब नहीं हुई थी’—सरिता का स्पष्टीकरण
नगरसेविका सरिता म्हस्के ने सामने आकर स्पष्ट किया कि उनके अचानक संपर्क से बाहर होने को लेकर जो बातें फैलाई गईं, वे पूरी तरह बेबुनियाद हैं। उन्होंने कहा, “मैं न तो लापता हुई थी और न ही किसी अन्य राजनीतिक दल के संपर्क में थी। चुनाव जीतने से पहले मैंने मां तुलजापुर देवी के दर्शन की मन्नत मांगी थी। उसी वादे को निभाने के लिए मैं मंदिर गई थी।”
उन्होंने यह भी बताया कि इस बारे में उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेता मिलिंद नार्वेकर को पहले ही जानकारी दे दी थी। सरिता के मुताबिक, जब उनके न मिलने को लेकर अफवाहें फैलने लगीं, तब पार्टी की ओर से उन्हें कुछ समय के लिए फोन बंद रखने की सलाह दी गई थी। इसी वजह से उनका मोबाइल स्विच ऑफ था।
बीजेपी उम्मीदवार को हराकर बनी थीं नगरसेविका
सरिता म्हस्के ने शिवसेना (यूबीटी) के टिकट पर मुंबई के वार्ड नंबर 157 से चुनाव लड़ा था और भारतीय जनता पार्टी की प्रत्याशी आशा तायड़े को मात दी थी। चुनावी जीत के बाद वह नगरसेविका बनीं, लेकिन सेना भवन में आयोजित कॉर्पोरेटरों की एक अहम बैठक में उनकी गैरमौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी।
बैठक से गायब रहने के बाद यह चर्चा तेज हो गई थी कि सरिता शिंदे गुट की शिवसेना में शामिल हो सकती हैं। हालांकि, अब उनके बयान के बाद ये सभी कयास पूरी तरह खारिज हो गए हैं।
मुंबई में मेयर पद को लेकर सियासी खींचतान जारी
मुंबई महानगरपालिका चुनाव में ठाकरे बंधुओं ने गठबंधन के तहत मैदान में उतरकर 65 नगरसेवकों की जीत दर्ज की है। दूसरी ओर, बीजेपी और शिवसेना शिंदे गुट की महायुति के पास स्पष्ट बहुमत है। इसके बावजूद मेयर पद को लेकर दोनों सहयोगी दलों के बीच अंदरूनी रस्साकशी की खबरें सामने आ रही हैं।
इसी राजनीतिक माहौल के बीच विभिन्न दलों द्वारा अन्य पार्टियों के नगरसेवकों का समर्थन जुटाने की कोशिशें भी तेज हो गई हैं। हालांकि, मौजूदा गणित को देखते हुए मुंबई में महायुति का मेयर बनना लगभग तय माना जा रहा है।














