
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार विरोधी कानून का सहारा लेकर भाजपा असल में विपक्ष की आवाज़ दबाने की रणनीति बना रही है। प्रियंका ने सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि जो पार्टी खुद भ्रष्ट नेताओं को बड़े-बड़े पदों पर बैठाती है, वह दूसरों को कैसे कटघरे में खड़ा कर सकती है? उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार दोनों ही ऐसे नेता हैं, जिनपर पहले भाजपा ने ही भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे।
“चक्की पीसिंग” से लेकर सत्ता की सीढ़ियों तक
प्रियंका चतुर्वेदी ने व्यंग्य कसते हुए कहा कि भाजपा ने कभी इन नेताओं पर “चक्की पीसिंग-पीसिंग” जैसे तंज कसे थे और बाद में उन्हीं को मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री बना दिया गया। उन्होंने कहा कि ये तो महज़ दो उदाहरण हैं, ऐसे कई मामले हैं जिनसे भाजपा का दोहरा चेहरा सामने आता है। उन्होंने आगे कहा कि आज ईडी और सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियां भाजपा मुख्यालय से ही काम करती प्रतीत होती हैं। विपक्षी नेताओं पर झूठे केस थोपकर उन्हें जेल भेजा जा रहा है। चाहे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हों या झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन – दोनों इसके शिकार हुए हैं।
भाजपा के चुनावी नारे पर चुटकी
प्रियंका ने भाजपा के चुनावी वादों और नारों को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा का नारा था – “चार सौ पार”। साथ ही भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने दावा किया था कि भाजपा “वन नेशन, वन पार्टी” की ओर बढ़ रही है। लेकिन नतीजों ने उनकी सारी हवा निकाल दी और असलियत सामने आ गई। चतुर्वेदी का कहना है कि भाजपा अब चुनाव आयोग और नए कानून का सहारा लेकर विपक्ष को पूरी तरह खत्म करने की साजिश रच रही है।
विपक्षी नेताओं का बचाव
प्रियंका ने तर्क दिया कि जिन नेताओं को ईडी-सीबीआई ने आरोपों के आधार पर जेल में डाल दिया था, वे सभी अदालत से बाइज्जत बरी होकर बाहर आए। उन्होंने नाम गिनाए – संजय राउत, सत्येंद्र जैन और संजय सिंह। उन्होंने कहा कि ये उदाहरण साफ करते हैं कि भाजपा केवल डर और एजेंसियों के दम पर विपक्ष को कमजोर करने का प्रयास कर रही है, लेकिन सच्चाई लंबे समय तक छिप नहीं सकती।














