
महाराष्ट्र की राजनीति में दो दशक बाद आए एकजुटता के इस दृश्य पर सियासी तूफान खड़ा हो गया है। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के एक मंच पर आने को जहां कुछ लोग मराठी एकता की वापसी मान रहे हैं, वहीं भाजपा ने इस रैली को हिंदू विरोधी करार देते हुए तीखा हमला बोला है। भाजपा नेता और राज्य के मंत्री नितेश राणे ने आरोप लगाया है कि यह रैली ‘भाईचारे’ की नहीं, बल्कि ‘जिहादी सोच’ की प्रतीक है। उन्होंने इस मंच को सिमी और पीएफआई जैसे कट्टर संगठनों के जमावड़े से तुलना कर दी।
भाजपा मंत्री नितेश राणे का सीधा हमला
मीडिया से बात करते हुए महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और भाजपा नेता नितेश राणे ने दोनों ठाकरे बंधुओं पर समाज को बांटने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "हम हिंदू हैं और मराठी होने पर गर्व करते हैं, लेकिन ये दोनों जिस तरह की राजनीति कर रहे हैं वह पूरी तरह से हिंदू विरोधी है। इनका तरीका वही है जो पीएफआई और सिमी जैसे संगठनों का होता है—समाज को बांटकर राज्य को कमजोर करना।"
राणे ने यहां तक कहा कि इस रैली के बाद मुस्लिम बहुल इलाकों जैसे नल बाजार में मिठाईयां बांटी जाएंगी और पटाखे फूटेंगे, क्योंकि इससे हिंदुओं को नुकसान पहुंचेगा।
ठाकरे बंधुओं की एकता पर भाजपा में मतभेद?
जहां नितेश राणे ने रैली को जिहादी मानसिकता वाला करार दिया, वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता सुधीर मुनगंटीवार ने एक अलग स्वर अपनाया। उन्होंने कहा, “अगर राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे फिर से एकजुट हो रहे हैं, तो यह सकारात्मक संकेत है। उन्हें हमारी शुभकामनाएं हैं। अगर जरूरत हो तो दोनों पार्टियां विलय पर भी विचार करें।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि राज्य में तीन-भाषा नीति को लेकर जो विवाद उठा था, उसे राजनीतिक रंग देना अनुचित है। उन्होंने कहा कि उस निर्णय को सरकार ने पहले ही रद्द कर दिया है और अब इस पर गलतफहमी फैलाना उचित नहीं।
उद्धव और राज ने भाजपा सरकार को घेरा
इससे पहले ‘आवाज मराठीचा’ रैली में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने एक सुर में भाजपा और फडणवीस सरकार पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के स्कूलों में हिंदी थोपने की कोशिश हो रही थी। उन्होंने इसे मराठी अस्मिता के खिलाफ बताते हुए सरकार को घुटनों पर ला दिया और तीन भाषा नीति के फैसले को वापस लेने पर जनता के साथ जश्न भी मनाया।
राज ठाकरे ने यहां तक कहा कि “जो काम बालासाहेब ठाकरे नहीं कर पाए, वो फडणवीस ने कर दिखाया। उन्होंने हम दोनों भाइयों को एक साथ खड़ा कर दिया।”
सियासी सुलह या नयी टकराव की पटकथा?
राजनीति के इस घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की सियासी ज़मीन को गर्मा दिया है। ठाकरे भाइयों का एक होना जहां मराठी एकता और हिंदुत्व के नए समीकरण को जन्म दे सकता है, वहीं भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया यह दिखाती है कि यह गठजोड़ आने वाले चुनावों में उसके लिए सिरदर्द बन सकता है। लेकिन भाजपा के भीतर मतभेदों की झलक यह भी दिखा रही है कि पार्टी अभी इस नए समीकरण को लेकर रणनीति तय कर रही है।
अब देखना होगा कि यह भाईचारा सियासत में स्थायी होता है या फिर चुनावी मौसम में क्षणिक बादल बनकर छंट जाता है।














