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मुंबई की सुरक्षा और भाजपा का ‘जीरो टॉलरेंस’ पैटर्न, भयमुक्त महानगर का नया अध्याय

मुंबई की सुरक्षा व्यवस्था में आए बड़े बदलाव और भाजपा के ‘जीरो टॉलरेंस’ मॉडल की पूरी तस्वीर। आतंकवाद और अपराध पर सख्ती से कैसे बना मुंबई एक भयमुक्त महानगर, पढ़ें विश्लेषण।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Tue, 13 Jan 2026 11:56:57

मुंबई की सुरक्षा और भाजपा का ‘जीरो टॉलरेंस’ पैटर्न, भयमुक्त महानगर का नया अध्याय

मुंबई की सुरक्षा व्यवस्था और भाजपा का ‘जीरो टॉलरेंस’ मॉडल, भयमुक्त महानगर का नया अध्याय

मुंबई, जिसे देश की आर्थिक रीढ़ कहा जाता है, अपनी तेज़ रफ्तार, सपनों और अवसरों के लिए दुनियाभर में पहचानी जाती है। यह शहर कभी नहीं सोता—यही इसकी पहचान है। लेकिन इस चमक-दमक के पीछे एक ऐसा दौर भी रहा है, जब मुंबई ने आतंक, हिंसा और बम धमाकों की भयावह तस्वीरें झेली हैं। समय-समय पर हुए इन हमलों ने न सिर्फ शहर की रफ्तार को झकझोरा, बल्कि आम नागरिकों के मन में असुरक्षा की गहरी छाया भी छोड़ दी थी।

आज के दौर में हालात काफी हद तक बदले हुए नज़र आते हैं। मुंबईकरों के लिए सुरक्षा अब केवल एक वादा या सरकारी घोषणा नहीं रह गई है, बल्कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी में महसूस की जाने वाली वास्तविकता बन चुकी है। इस बदलाव के पीछे केंद्र और राज्य स्तर पर अपनाई गई सख्त नीतियों की अहम भूमिका मानी जा रही है। भारतीय जनता पार्टी ने सत्ता संभालने के बाद ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ की सोच और आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की रणनीति को प्राथमिकता दी।

भाजपा की इस नीति का असर सुरक्षा तंत्र को मज़बूत करने में साफ तौर पर दिखाई देता है। खुफिया एजेंसियों की सक्रियता, पुलिस बल का आधुनिकीकरण और संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी—इन सभी कदमों ने मिलकर मुंबई को एक नए सुरक्षा ढांचे की ओर अग्रसर किया है। आज शहर में बड़े आयोजनों से लेकर रोज़मर्रा की आवाजाही तक, सुरक्षा इंतज़ाम पहले से कहीं अधिक सुदृढ़ नज़र आते हैं।

कभी जिन जगहों पर डर और अनिश्चितता का माहौल रहता था, वहां अब लोग पहले की तुलना में ज़्यादा निश्चिंत होकर अपने कामकाज में जुटे दिखते हैं। भाजपा का दावा है कि आतंकवाद और संगठित अपराध के प्रति सख्त रवैया ही इस बदलाव की नींव है। कानून-व्यवस्था के मामलों में त्वरित कार्रवाई और किसी भी तरह की ढिलाई न बरतने की नीति ने अपराधियों के मन में भी कानून का डर पैदा किया है।

1. दहशत का वह दौर: जब मुंबई भय के साए में थी

वर्ष 2014 से पहले मुंबई पर दहशत का साया मंडराता था। लोकल ट्रेनों में हुए सिलसिलेवार बम धमाके हों, झावेरी बाजार का इलाका या फिर 26/11 का भीषण आतंकी हमला, मुंबई लगातार कट्टरपंथियों के निशाने पर थी। आम मुंबईवासी सुबह घर से निकलते समय अक्सर इस चिंता में रहते थे कि क्या वे सुरक्षित अपने घर लौट पाएंगे।

भाजपा लगातार आरोप लगाती रही है कि तत्कालीन राज्य और केंद्र सरकारों की 'ढुलमुल' नीतियों ने आतंकवादी तत्वों का मनोबल बढ़ाया। बार-बार होने वाले विस्फोट और खुफिया एजेंसियों की विफलता ने मुंबई की सुरक्षा को पूरी तरह से रामभरोसे छोड़ दिया था। हालांकि, 2014 के बाद स्थिति में महत्वपूर्ण बदलाव आना शुरू हुआ।

2. भाजपा का 'जीरो टॉलरेंस' और सुरक्षा की नई रीढ़

भाजपा सरकार ने सत्ता में आते ही राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। मुंबई की तटीय सुरक्षा हो या शहर का सीसीटीवी नेटवर्क, भाजपा के कार्यकाल में इन सभी कार्यों को तेज़ गति मिली। पार्टी ने सुरक्षा को एक नया आयाम देते हुए 'ज़ीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई।

घुसपैठ पर कठोर प्रहार करते हुए, मुंबई की सुरक्षा को बाहरी ही नहीं, आंतरिक खतरों का भी सामना करना पड़ रहा था। अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्याओं की बढ़ती संख्या ने शहर के जनसांख्यिकीय संतुलन को बिगाड़कर अपराध व कट्टरतावाद को बढ़ावा दिया। भाजपा सरकार ने इन घुसपैठियों के खिलाफ अभियान चलाया और उन्हें बाहर निकालने का साहस दिखाया। अतिक्रमणों की आड़ में चल रही राष्ट्रविरोधी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासनिक शक्ति का प्रभावी उपयोग किया गया।

3. अफजल खान की कब्र पर ऐतिहासिक कार्रवाई: कानून का राज!

प्रतापगढ़ की तलहटी में स्थित अफजल खान की कब्र के आसपास के अवैध निर्माण को हटाना भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की दृढ़ इच्छाशक्ति का एक बड़ा प्रमाण है। यह मामला सिर्फ धार्मिक आस्था से जुड़ा नहीं था, बल्कि कानून के शासन और उसके कठोर पालन से संबंधित था।

'हजरत मोहम्मद अफजल खान मेमोरियल सोसाइटी' ने कब्र के चारों ओर अवैध निर्माण कर वन विभाग की भूमि का बड़े पैमाने पर अतिक्रमण कर लिया था। हिंदू संगठनों ने कई वर्षों तक इस अतिक्रमण के खिलाफ संघर्ष किया। वर्ष 2004 में जनहित याचिका दायर होने के बाद मुंबई उच्च न्यायालय ने इन अवैध ढांचों को हटाने का आदेश दिया था। हालांकि, तत्कालीन सरकारों की उदासीनता और 'वोट बैंक' खोने के डर से प्रशासन कार्रवाई करने से कतराता रहा।

राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद, महायुति सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया। 10 नवंबर 2022 की सुबह, भारी पुलिस बल की तैनाती और धारा 144 लागू करके कब्र के आसपास के कई कमरों के अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया गया। न्यायालय के आदेशों का पालन कर भाजपा ने दर्शाया कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। इस कार्रवाई से शिव प्रेमियों में उत्साह फैल गया और कट्टरपंथियों को एक कड़ा संदेश मिला।

4. 'बुलडोजर' न्याय: दंगाइयों को कड़ा संदेश

हाल ही में मीरा-भाईंदर में हुए सांप्रदायिक दंगे हों या माहिम के समुद्र में स्थित अनधिकृत मजार का मुद्दा, इन सभी मामलों में भाजपा सरकार की स्थिति अत्यंत स्पष्ट रही है।

राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के दौरान मीरा-भाईंदर क्षेत्र में भड़के दंगों के आरोपियों के अवैध निर्माण पर प्रशासन ने 'बुलडोजर' चलाया। इस कदम से अपराधियों में कानून का भय पैदा हुआ। सरकार ने इस कार्रवाई से स्पष्ट संदेश दिया कि "अपराध करोगे तो घरद्वार नहीं बचेगा।"

माहिम के समुद्र में अवैध रूप से निर्मित मजार पर भी भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने त्वरित कार्रवाई की। प्रशासन ने इसे तुरंत ध्वस्त कर दिया, जिससे अवैध अतिक्रमण को लेकर सरकार की दृढ़ता सामने आई।

5. महाविकास आघाड़ी पर तीखा हमला: 'वोट बैंक' या मुंबई की सुरक्षा?

भाजपा ने महाविकास आघाडी (MVA) पर मुंबई की सुरक्षा से खिलवाड़ का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस, राष्ट्रवादी (शरद पवार गुट) और शिवसेना (यूबीटी) एक विशिष्ट वोट बैंक के लिए कट्टरपंथियों की अनदेखी करते हैं।

भाजप नेताओं का आरोप है कि सुरक्षा एजेंसियां जब अवैध घुसपैठियों पर कार्रवाई करती हैं, तो MVA नेता मानवाधिकार का हवाला देकर उनके बचाव में आते हैं। उन्हें डर है कि 'तुष्टीकरण की यह राजनीति' मुंबई को 20 साल पहले के बम धमाकों की कतार में धकेल सकती है। भाजपा ने चेताया है कि MVA के सत्ता में आने पर पुलिस के हाथ बंधेंगे और शहर असुरक्षित होगा।

6. सुरक्षित मुंबई, स्थिर मुंबई

आज मुंबई में त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होते हैं। आतंकी धमकियों के बावजूद, सुरक्षा एजेंसियां अब अधिक सतर्क हैं। 'नया भारत' और 'मजबूत भाजपा' की नीतियों ने पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवाद को सीमा पर रोका है, जिसका सीधा सकारात्मक असर मुंबई की सुरक्षा पर पड़ा है।

भाजपा की नीति स्पष्ट है "गुन्हेगाराला धर्म नसतो, पण गुन्हेगारीला थारा देणे हा राष्ट्रद्रोह आहे।" इसी ध्येय के कारण आज सामान्य मुंबईकर रात देर तक काम से घर लौटते हुए भी खुद को सुरक्षित महसूस करता है। मुंबई की सुरक्षा केवल चुनावी मुद्दा नहीं, बल्कि शहर के अस्तित्व का प्रश्न है।

भाजपा ने अपने कार्यकाल में 'एक्शन मोड' में रहकर दिखाया है कि कट्टरतावाद और अपराध को कुचलने के लिए दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति आवश्यक है। यह निर्विवाद है कि भाजपा की 'ज़ीरो टॉलरेंस' नीति ने मुंबई को एक नया सुरक्षा कवच दिया है। आगामी समय में देखना होगा कि मुंबईकर शहर की सुरक्षा की बागडोर किसे सौंपते हैं।

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