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मुंबई का मेयर कौन बनेगा? शिंदे सेना ने सियासत में डाला नया ट्विस्ट, रखी ये शर्त

BMC चुनाव में बीजेपी की जीत के बाद मुंबई के मेयर पद को लेकर सियासत तेज हो गई है। शिंदे सेना ने नए ट्विस्ट के साथ मेयर पद पर दावा ठोकते हुए शर्त रखी है, जिससे गठबंधन की राजनीति और जटिल हो गई है।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Sat, 17 Jan 2026 3:58:25

मुंबई का मेयर कौन बनेगा? शिंदे सेना ने सियासत में डाला नया ट्विस्ट, रखी ये शर्त

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव में बीजेपी की बड़ी जीत के बाद अब सियासी फोकस सीधे मेयर पद पर आ टिक गया है। करीब ढाई दशक तक बीएमसी पर राज करने वाला ठाकरे परिवार इस बार सत्ता से बाहर हो चुका है, जिसके साथ ही मुंबई की कमान किसके हाथ में जाएगी, इस पर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

227 सदस्यों वाली बीएमसी में बहुमत के लिए 114 सीटों का आंकड़ा जरूरी है। एनडीए गठबंधन के पास कुल 117 सीटें जरूर हैं, लेकिन यह तस्वीर जितनी सीधी दिखती है, अंदरखाने उतनी ही पेचीदा भी है। इसी पेच ने पूरे खेल में नया मोड़ ला दिया है।

कहां अटक रहा है गणित?

बीजेपी ने 88 वार्डों में जीत दर्ज कर खुद को सबसे बड़ी पार्टी के रूप में स्थापित किया है, जबकि शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) को 29 वार्डों में सफलता मिली है। भले ही आंकड़ों में एनडीए बहुमत के पार नजर आ रहा हो, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि शिंदे गुट के बिना बीजेपी के लिए बीएमसी की सत्ता संभालना आसान नहीं होगा।

इसी मजबूरी को शिंदे गुट अपनी ताकत के रूप में देख रहा है। सूत्रों के मुताबिक, एकनाथ शिंदे इस स्थिति का इस्तेमाल कर बीजेपी पर मेयर पद के लिए दबाव बना सकते हैं। संकेत साफ हैं कि शिंदे गुट अब सिर्फ सहयोगी की भूमिका में संतुष्ट नहीं रहना चाहता।

‘मेयर शिवसेना का ही होना चाहिए’


शिंदे गुट के प्रवक्ताओं और कई वरिष्ठ नेताओं ने पहले ही साफ कर दिया है कि मुंबई का मेयर शिवसेना (शिंदे गुट) से होना चाहिए। उनका तर्क है कि बीएमसी पर लंबे समय तक अविभाजित शिवसेना का शासन रहा है और यह बालासाहेब ठाकरे की राजनीतिक विरासत का अहम हिस्सा है। इसी विरासत के नाम पर शिंदे गुट अब अपना दावा मजबूत करने में जुट गया है।

शिंदे का संतुलित बयान

चुनावी नतीजों के बाद एकनाथ शिंदे का रुख बेहद सतर्क नजर आया। मेयर पद को लेकर सीधे सवाल पर उन्होंने कहा, “हमारा एजेंडा सिर्फ विकास है। हमने महायुति के रूप में चुनाव लड़ा है और मुंबई के हित में जो सबसे बेहतर होगा, उस पर सहयोगियों के साथ बैठकर फैसला किया जाएगा।”

उनके इस संतुलित और गोलमोल बयान ने सियासी गलियारों में अटकलों को और हवा दे दी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान किसी बीच के रास्ते की ओर इशारा हो सकता है।

2.5 साल का फॉर्मूला?

कुछ जानकारों का कहना है कि शिंदे गुट मेयर पद के लिए ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला सामने रख सकता है। यानी पहले आधे कार्यकाल में शिवसेना (शिंदे) का मेयर और बाकी समय बीजेपी का। हालांकि, इस पर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अंदरखाने इस विकल्प पर चर्चा की सुगबुगाहट जरूर है।

ठाणे फैक्टर बना दबाव

बीजेपी के लिए एक और चुनौती ठाणे फैक्टर है। ठाणे को एकनाथ शिंदे का मजबूत गढ़ माना जाता है, जहां उनकी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया है। 131 सदस्यों वाली ठाणे नगर निगम में शिंदे गुट 70 से ज्यादा सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत में है, जबकि बीजेपी के पास वहां सिर्फ 28 पार्षद हैं। ठाणे में मेयर बनाने की स्थिति में शिंदे गुट पूरी तरह स्वतंत्र है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर शिंदे गुट बिना किसी ठोस सौदे के बीएमसी का मेयर पद बीजेपी को सौंप देता है, तो इससे उसके कार्यकर्ताओं में गलत संदेश जा सकता है। इसी वजह से पर्दे के पीछे डिप्टी मेयर पद, स्टैंडिंग कमेटी की चेयरमैनशिप और अहम वार्डों के नियंत्रण को लेकर गहन मोलभाव लगभग तय माना जा रहा है।

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