न्यूज़
FIFA 2026 Yogi Adityanath Jyotish Donald Trump Narendra Modi Rahul Gandhi

मुंबई में 'मराठी मानुष' हाशिए पर, 25 साल की सत्ता के बावजूद अस्मिता पर खतरा

मुंबई में मराठी मानुष की अस्मिता पर संकट, 25 साल सत्ता के बावजूद मराठी समुदाय हाशिए पर। गिरगांव से बदलापुर तक विस्थापन, मराठी शिक्षा का पतन और आर्थिक अवसरों की कमी। आगामी बीएमसी चुनाव में मराठी मतदाता अपने हक के लिए आवाज उठा रहे हैं।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Thu, 08 Jan 2026 2:38:03

मुंबई में 'मराठी मानुष' हाशिए पर, 25 साल की सत्ता के बावजूद अस्मिता पर खतरा

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई मराठी भाषियों के संघर्ष और संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन में शहीद हुए 106 वीरों के बलिदान से अस्तित्व में आई। लेकिन आज यही शहर मराठी समुदाय की पहचान और अस्तित्व पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है।

लगभग 25-30 वर्षों तक मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) पर उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना का शासन रहा। सवाल यह है कि इस लंबे समय में मराठी समुदाय की स्थिति सुधरी या और कमजोर हुई? आम मराठी नागरिक अब इस सवाल को खुले तौर पर उठा रहे हैं।

1. गिरगांव से ग्लास टॉवर तक: मुंबई की बदलती पहचान

कभी मुंबई के लालबाग, परेल, शिवड़ी, दादर और गिरगांव इलाके शहर का 'हृदय' माने जाते थे। ये क्षेत्र मिल मजदूरों की मेहनत और मराठी संस्कृति की गहरी जड़ों पर विकसित हुए थे। लेकिन पिछले ढाई दशकों में इन इलाकों का तेजी से 'कॉस्मोपॉलिटन' शहरीकरण हुआ। अब मिलों की चिमनियां बंद होकर कांच के ऊंचे टॉवरों में बदल गई हैं।

मराठी समुदाय का विस्थापन

इस बड़े बदलाव का सबसे गंभीर असर मराठी समुदाय पर पड़ा। तत्कालीन पालिका सरकार ने टॉवर निर्माण की अनुमति देते समय वादा किया कि "मराठी लोगों को वहीं आवास मिलेगा।"

वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग रही। मिल मजदूरों और मूल निवासियों को दक्षिण और मध्य मुंबई से विस्थापित कर विरार, कर्जत, कसारा और बदलापुर जैसे बाहरी इलाकों में बसना पड़ा। यह अक्षम्य सत्य है कि जिन 'मराठी मानुष' के बल पर राजनीति की गई, वही धीरे-धीरे मुंबई के नक्शे से ओझल होते जा रहे हैं।

2. आर्थिक सशक्तिकरण: मराठी ठेकेदार कहां हैं?

किसी भी समाज की समग्र प्रगति उसके आर्थिक सशक्तिकरण पर निर्भर करती है। मुंबई महानगरपालिका का सालाना बजट ₹50,000 करोड़ से अधिक है, जो पिछले 25 वर्षों में लाखों करोड़ तक पहुंच गया।

सवाल यह है कि इस विशाल बजट से कितने मराठी उद्यमी या ठेकेदार वास्तव में उभर पाए? आरोप हैं कि सड़क, नाला सफाई और पुल निर्माण जैसी परियोजनाओं में मराठी युवाओं या स्थानीय ठेकेदारों को प्राथमिकता नहीं दी गई। इसके बजाय विशिष्ट धनाढ्य समूहों के हितों को साधने पर ध्यान केंद्रित किया गया। अगर पालिका मराठी हितों के लिए थी, तो आज मुंबई के सबसे अमीर ठेकेदारों की सूची में मराठी नाम क्यों नहीं दिखाई देते?

छोटे कारोबार तक सीमित मराठी समाज

विश्लेषकों का मानना है कि उद्धव ठाकरे के कार्यकाल में मराठी समुदाय को छोटे व्यवसाय जैसे वड़ापाव और भजी तक सीमित कर दिया गया। बड़े आर्थिक अवसर प्रभावशाली बाहरी समूहों के पास रहे, जिससे मराठी समुदाय का सशक्तिकरण अधूरा रह गया।

3. भावनात्मक नारे बनाम वास्तविकता

चुनावों के समय शिवसेना के लिए "'मराठी मानुष', 'मराठी अस्मिता' और 'मुंबई पर हमला'" जैसे नारे हमेशा जनता के बीच ऊर्जा भरते रहे। लेकिन सत्ता में रहते हुए इन नारों का मराठी समुदाय के ठोस अवसरों में रूपांतरण नहीं हुआ, और यही अब आलोचना का मुख्य बिंदु बन गया है।

मराठी शिक्षा की गिरावट और अंग्रेज़ी स्कूलों का उदय

मराठी स्कूलों की हालत इस असफलता का सबसे स्पष्ट उदाहरण है। मनपा के कई मराठी विद्यालय बंद हुए और छात्रों की संख्या लगातार घटती गई। इसके विपरीत, निजी अंग्रेज़ी माध्यम के स्कूलों ने तेजी से विस्तार किया। आरोप है कि मराठी भाषा को शास्त्रीय और समृद्ध बनाने के बजाय, इसे केवल चुनावी रणनीति के लिए इस्तेमाल किया गया।

4. बदलापुर-विरार से मुंबई तक: रोज़मर्रा की संघर्ष यात्रा

आज मुंबई में काम करने वाले मराठी समुदाय को रोज़ाना 4-5 घंटे ट्रेन में सफर करना पड़ता है। ठाणे, पालघर और रायगढ़ जिलों से आने वाले ये लोग शहर की सेवा करते हैं, लेकिन शहर में उनका रहने का सपना पूरी तरह अधूरा रह गया। उद्धव ठाकरे के कार्यकाल में किफायती आवास की कोई ठोस योजना लागू नहीं हुई। पुनर्विकास के लाभ बिल्डरों को मिले, जबकि मूल मराठी निवासियों को “रखरखाव” के बहाने शहर से बाहर धकेल दिया गया।

5. चुनावी माहौल और बदलते समीकरण

मुंबई महानगरपालिका चुनावों के आस-पास, सत्ता को खोने का डर मंडरा रहा है। ऐसे में 'मराठी मानुष के संरक्षक' बनने का दाव फिर उठ रहा है। लेकिन क्या इस बार मतदाता पुराने भरोसों से प्रभावित होंगे? यह एक बड़ा सवाल है। पीढ़ियों से शिवसेना पर भरोसा करने वाले मराठी लोग अब अपने बच्चों के भविष्य, रोजगार और अपने हक के घर के लिए जवाब मांग रहे हैं।

6. निर्णायक विश्लेषण: भावनाओं से परे

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि उद्धव ठाकरे ने 25 वर्षों तक सत्ता में रहते हुए मुंबई के बुनियादी ढाँचे और सौंदर्य में सुधार किए, लेकिन मराठी समुदाय की समग्र प्रगति सुनिश्चित करने में विफल रहे। अब मराठी युवा खुलेआम कह रहे हैं कि केवल भावनात्मक भाषण और नारों से पेट नहीं भरता।

घटती मराठी आबादी: बड़ी राजनीतिक विफलता

कमीशन, व्यक्तिगत लाभ और स्थानीय मुद्दों के कारण इस चुनाव में मराठी मतदाताओं का रुख बदल सकता है। मुंबई में मराठी आबादी में गिरावट केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि राजनीतिक विफलता का प्रमाण है। शहर पर हक जताने के बावजूद, मराठी समुदाय अपनी अपेक्षित स्थिति तक नहीं पहुँच पाया।

राज्य
View More

Shorts see more

क्या लव बाइट जानलेवा हो सकता है? जानें कब बनता है यह गंभीर खतरा और किन उपायों से पा सकते हैं राहत

क्या लव बाइट जानलेवा हो सकता है? जानें कब बनता है यह गंभीर खतरा और किन उपायों से पा सकते हैं राहत

  • लव बाइट प्यार की निशानी है, लेकिन कभी-कभी खतरे की वजह भी बन सकती है।
  • एक छोटा सा निशान स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्या से जुड़ा हो सकता है।
  • जानिए कब हिक्की सामान्य है और कब सतर्क होने की जरूरत है।
read more

ताजा खबरें
View More

74 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गए कतर के पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा
74 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गए कतर के पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा
भारत में फिर कोरोना का खतरा! आंध्र प्रदेश में 2 लोगों की मौत के बाद प्रशासन हाई अलर्ट पर
भारत में फिर कोरोना का खतरा! आंध्र प्रदेश में 2 लोगों की मौत के बाद प्रशासन हाई अलर्ट पर
ओमान तट के पास कमर्शियल जहाज पर हमला, 11 भारतीय थे सवार; विदेश मंत्रालय ने जताई चिंता, एक नागरिक अब भी लापता
ओमान तट के पास कमर्शियल जहाज पर हमला, 11 भारतीय थे सवार; विदेश मंत्रालय ने जताई चिंता, एक नागरिक अब भी लापता
जून में भारत ने रूस से रिकॉर्ड स्तर पर खरीदा कच्चा तेल, आयात 34% बढ़कर 4.5 अरब यूरो पहुंचा
जून में भारत ने रूस से रिकॉर्ड स्तर पर खरीदा कच्चा तेल, आयात 34% बढ़कर 4.5 अरब यूरो पहुंचा
गोविंदा की पत्नी सुनीता आहूजा करेंगी बॉलीवुड में एंट्री, बेटे यशवर्धन के साथ एकता कपूर की फिल्म में आएंगी नजर
गोविंदा की पत्नी सुनीता आहूजा करेंगी बॉलीवुड में एंट्री, बेटे यशवर्धन के साथ एकता कपूर की फिल्म में आएंगी नजर
ट्विषा शर्मा केस में नया खुलासा, दूसरे पोस्टमार्टम में फंदे पर मिले स्किन टिश्यू
ट्विषा शर्मा केस में नया खुलासा, दूसरे पोस्टमार्टम में फंदे पर मिले स्किन टिश्यू
लौकी की हेल्दी और टेस्टी बर्फी बनाने का आसान तरीका, एक बार खाएंगे तो बार-बार बनाएंगे
लौकी की हेल्दी और टेस्टी बर्फी बनाने का आसान तरीका, एक बार खाएंगे तो बार-बार बनाएंगे
विंबलडन 2026: लिंडा नोस्कोवा बनीं महिला सिंगल्स चैंपियन, रोमांचक फाइनल में कैरोलीना मुचोवा को हराकर जीता पहला ग्रैंड स्लैम
विंबलडन 2026: लिंडा नोस्कोवा बनीं महिला सिंगल्स चैंपियन, रोमांचक फाइनल में कैरोलीना मुचोवा को हराकर जीता पहला ग्रैंड स्लैम
टीवी एक्टर रोहित चंदेल पर POCSO के तहत कार्रवाई, पुलिस बोली- पूछताछ में किया अहम खुलासा
टीवी एक्टर रोहित चंदेल पर POCSO के तहत कार्रवाई, पुलिस बोली- पूछताछ में किया अहम खुलासा
फीफा वर्ल्ड कप 2026: अर्जेंटीना ने स्विट्जरलैंड को 3-1 से हराकर सेमीफाइनल में बनाई जगह, अब इंग्लैंड से होगी टक्कर
फीफा वर्ल्ड कप 2026: अर्जेंटीना ने स्विट्जरलैंड को 3-1 से हराकर सेमीफाइनल में बनाई जगह, अब इंग्लैंड से होगी टक्कर
'धमाल 4' की रिलीज के बावजूद नहीं थमी 'अल्फा' की रफ्तार, शनिवार को की दमदार कमाई
'धमाल 4' की रिलीज के बावजूद नहीं थमी 'अल्फा' की रफ्तार, शनिवार को की दमदार कमाई
बेंगलुरु में महिला के घर जबरन घुसा डिलीवरी बॉय, वॉशरूम इस्तेमाल करने के बाद करने लगा अश्लील हरकत, गिरफ्तार
बेंगलुरु में महिला के घर जबरन घुसा डिलीवरी बॉय, वॉशरूम इस्तेमाल करने के बाद करने लगा अश्लील हरकत, गिरफ्तार
घर पर बनाएं क्रीमी मैकरोनी सलाद, ठंडा करके खाएंगे तो दोगुना बढ़ जाएगा स्वाद; नोट करें आसान रेसिपी
घर पर बनाएं क्रीमी मैकरोनी सलाद, ठंडा करके खाएंगे तो दोगुना बढ़ जाएगा स्वाद; नोट करें आसान रेसिपी
'अगर खुद पर भरोसा नहीं है तो न्यूयॉर्क आपको पीछे छोड़ देगा', शख्स का वीडियो हुआ वायरल
'अगर खुद पर भरोसा नहीं है तो न्यूयॉर्क आपको पीछे छोड़ देगा', शख्स का वीडियो हुआ वायरल