
मराठा आरक्षण आंदोलन का चेहरा बने मनोज जारंगे ने आखिरकार मंगलवार देर शाम अपना आमरण अनशन समाप्त कर दिया। मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने उन्हें जूस पिलाकर अनशन तोड़वाया। जारंगे 29 अगस्त से भूख हड़ताल पर थे और सरकार से आठ बड़ी मांगें रखी थीं, जिनमें से छह को मंजूरी दे दी गई है।
सरकार द्वारा जारी जीआर (सरकारी आदेश) को जारंगे ने स्वीकार कर लिया। इसके बाद उन्होंने समर्थकों से कहा कि उनकी लड़ाई सफल रही है। हालांकि, हाई कोर्ट के निर्देश के अनुसार जारंगे और उनके कार्यकर्ताओं को बुधवार सुबह तक आज़ाद मैदान खाली करना होगा।
पांचवें दिन पड़ी अनशन पर विराम
अनशन का मंगलवार को पांचवां दिन था। इसी दौरान पुलिस मैदान खाली कराने पहुंची तो जारंगे समर्थकों और पुलिस के बीच बहस भी हुई। मामला कोर्ट तक पहुंचा और हाई कोर्ट ने साफ आदेश दिया कि आज़ाद मैदान को खाली कराया जाए। बुधवार दोपहर 1 बजे इस पूरे मुद्दे पर अदालत फिर से सुनवाई करेगी।
इससे पहले महाराष्ट्र सरकार के चार मंत्री – राधाकृष्ण विखे पाटिल, शिवेंद्र राजे भोंसले, जयकुमार गोरे और माणिकराव कोकाटे – जारंगे से चर्चा के लिए मैदान पहुंचे थे। समिति की रिपोर्ट और सरकार के रुख की जानकारी देने के बाद जारंगे ने अनशन खत्म करने का ऐलान किया।
जारंगे की 8 प्रमुख मांगें
- हर मराठा को बिना भेदभाव कुणबी प्रमाणपत्र (सगे-सोयरे प्रमाणपत्र) मिले।
- हैदराबाद, सतारा और औंध गजट्स को लागू किया जाए।
- मराठा आंदोलनकारियों पर दर्ज सभी आपराधिक मामले वापस हों।
- आंदोलन में शहीद हुए लोगों के परिजनों को आर्थिक मुआवजा और सरकारी नौकरी मिले।
- 58 लाख से अधिक कुणबी नोंदी ग्राम पंचायत स्तर पर प्रदर्शित की जाए।
- वंशावली (शिंदे) समिति को दफ्तर और अधिक समय दिया जाए।
- मराठा-कुणबी एक का स्पष्ट सरकारी आदेश जारी किया जाए।
- सगे-सोयरे प्रमाणपत्र की जांच और वैधता की प्रक्रिया तत्काल शुरू हो।
सरकार का फैसला: 6 मांगों को मंजूरी
बैठक के बाद राज्य सरकार ने इन 6 मांगों पर सहमति जताई:
- हैदराबाद गजट लागू करने का निर्णय लिया गया।
- सतारा और औंध गजट को लागू करने की प्रक्रिया शुरू, 15 दिन में कानूनी अड़चनें हटेंगी।
- आंदोलनकारियों पर दर्ज सभी केस वापस लिए जाएंगे।
- मृतक परिवारों को 15 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और योग्यता अनुसार नौकरी मिलेगी।
- 58 लाख कुणबी नोंदी पंचायत स्तर पर प्रदर्शित की जाएगी।
- शिंदे समिति को कार्यालय और समयावधि दोनों बढ़ाई जाएगी।
अभी भी बाकी हैं 2 अहम मुद्दे
हालांकि, दो मांगें फिलहाल अधूरी हैं।
- मराठा-कुणबी को एक मानकर सरकारी आदेश जारी करने की प्रक्रिया शुरू हुई है, लेकिन अभी लागू नहीं हुआ।
- सगे-सोयरे प्रमाणपत्र की जांच और वैधता पर काम जारी है, मगर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया।














