
महाराष्ट्र की सियासत में बड़ी हलचल के बीच महायुति के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर तस्वीर लगभग साफ होती नजर आ रही है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण के बीच ठाणे स्थित शिंदे के आवास पर हुई लंबी बैठक में शिवसेना–भाजपा गठबंधन के चुनावी फॉर्मूले पर गहन चर्चा की गई। यह अहम बैठक करीब पांच घंटे तक चली, जिसमें दोनों दलों के बीच तालमेल को अंतिम रूप देने के संकेत मिले हैं।
देर रात शुरू हुई यह बातचीत सुबह करीब 4 बजे तक चली। सूत्रों के अनुसार, ठाणे, कल्याण-डोंबिवली और मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) की प्रमुख महापालिकाओं में सीटों के बंटवारे को लेकर सहमति बन गई है। माना जा रहा है कि गठबंधन अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है और बहुत जल्द इसकी आधिकारिक घोषणा भी कर दी जाएगी।
इन नेताओं की रही मौजूदगी
इस अहम बैठक में शिवसेना सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे, सांसद नरेश म्हस्के और पार्टी महासचिव राहुल शेवाळे भी शामिल रहे। जानकारी के मुताबिक, आने वाले दो दिनों में स्थानीय स्तर पर प्रभाग यानी वार्ड स्तर के उम्मीदवारों को लेकर चर्चा होगी, ताकि जमीनी समीकरणों और स्थानीय समीकरणों के आधार पर प्रत्याशियों के नाम तय किए जा सकें। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, सरकार की उपलब्धियों और कार्यशैली पर भी विस्तार से मंथन हुआ। मौजूद नेताओं ने पीएम मोदी के साथ अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा किए और महायुति को और मजबूत बनाने की रणनीति पर जोर दिया।
देवेंद्र–रविंद्र की जोड़ी की बढ़ी सियासी चमक
महाराष्ट्र में हाल ही में हुए नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों में भाजपा ने एक बार फिर अपनी सियासी ताकत साबित की है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की विकास-केंद्रित राजनीति और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण की मजबूत संगठन क्षमता, सटीक रणनीति और प्रभावी नेतृत्व का असर इन नतीजों में साफ दिखाई दिया। इन चुनावों में मिली सफलता ने भाजपा को राज्य की नंबर-1 पार्टी के रूप में और मजबूत किया है। स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के नतीजों ने पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच पहले से ही चर्चित “देवेंद्र–रविंद्र” की जोड़ी की साख को और पुख्ता कर दिया है।
चुनावी अभियान के दौरान गूंजा नारा— “तुमची आमची भाजपा सर्वांची” (आपकी-हमारी भाजपा, सबकी भाजपा)—जनता ने वोट के जरिए साकार कर दिखाया। परिणाम सामने आने के बाद प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने मीडिया से बातचीत में इसे जनता के भरोसे की जीत बताया।
प्रदेश संगठन में रविंद्र चव्हाण की निर्णायक भूमिका
करीब छह महीने पहले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने के बाद रविंद्र चव्हाण ने पूरे महाराष्ट्र में अनुशासित, संतुलित और आक्रामक जनसंपर्क अभियान चलाया। इस दौरान कई प्रभावशाली नेताओं को भाजपा में शामिल कर संगठन को नई मजबूती दी गई।
कोकण क्षेत्र में मजबूत पकड़ रखने वाले चव्हाण के नेतृत्व की असली परीक्षा इन्हीं स्थानीय चुनावों को माना जा रहा था, जिसमें वे पूरी तरह सफल साबित हुए।
इन चुनावों में कई जगह भाजपा का सीधा मुकाबला शिंदे गुट की शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) से रहा। इसके बावजूद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की राजनीतिक सूझबूझ और रविंद्र चव्हाण की संगठनात्मक दक्षता के दम पर भाजपा ने कई अहम सीटों पर जीत दर्ज की। साथ ही, महायुति के भीतर सत्ता संतुलन बना रहे, इसका समीकरण भी बखूबी साधा गया।
राजनीतिक संकेत और आगे की रणनीति
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि इन नतीजों के जरिए भाजपा ने सहयोगी दलों के दूसरी पंक्ति के नेताओं को उनकी राजनीतिक हैसियत का स्पष्ट संदेश दिया है। वहीं, श्रीकांत शिंदे और रविंद्र चव्हाण के रिश्तों को लेकर चल रही अटकलों को भी इन चुनावी नतीजों ने नया संदर्भ दे दिया है।
अब सभी की निगाहें जनवरी में होने वाले महापालिका चुनावों, खासकर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि अगर देवेंद्र–रविंद्र की यह जोड़ी इसी रणनीति और तालमेल के साथ आगे बढ़ती है, तो आने वाले महापालिका चुनावों में भी भाजपा अपना दबदबा बनाए रख सकती है। ऐसे में महायुति के सहयोगी दल किस रणनीति के साथ मैदान में उतरते हैं, यह आने वाले दिनों में राजनीति की दिशा तय करेगा।














