
महाराष्ट्र में मदरसों की फंडिंग और उनकी जांच को लेकर सियासी बहस फिर गर्मा गई है। कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने इस मुद्दे पर अपनी राय जाहिर करते हुए कहा कि अगर फंडिंग की पारदर्शिता के लिए जांच होनी है, तो यह सिर्फ मदरसों तक सीमित क्यों रहे। उनका मानना है कि सभी संस्थाओं पर समान रूप से यह प्रक्रिया लागू होनी चाहिए।
दलवई का तर्क:
हुसैन दलवई ने स्पष्ट किया, “अगर आप मदरसों की जांच कर रहे हैं और उनके फंड के स्रोत पूछ रहे हैं, तो मैं यह पूछना चाहता हूं कि RSS को फंड कहां से मिलता है? बड़े मंदिरों को धन कहां से प्राप्त होता है? इनकी भी जांच होनी चाहिए। मुद्दा यह है कि सिर्फ मदरसों को क्यों निशाना बनाया जा रहा है? सभी संस्थाओं को समान दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।”
उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू कर दी है। दलवई का कहना है कि किसी एक समुदाय या संगठन को चुनकर सवाल उठाना उचित नहीं है।
Mumbai, Maharashtra: Congress leader Hussain Dalwai says, "If you are investigating madrasas, asking where the funds come from-I ask, where does the RSS get its funds from? Look into that too. Where do big temples get their funds? Look into that too. The point is, why talk only… pic.twitter.com/BabHFY6sJz
— IANS (@ians_india) February 5, 2026
सरकार की मंशा पर सवाल:
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि मदरसों की जांच के नाम पर एक खास तबके को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश में कई धार्मिक, सामाजिक और वैचारिक संस्थाएं सक्रिय हैं, जिन्हें विभिन्न स्रोतों से फंड मिलता है। अगर पारदर्शिता के लिए जांच की बात है, तो यह नियम सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए।
RSS और मंदिरों का जिक्र:
दलवई ने अपने बयान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बड़े मंदिरों का नाम लेते हुए कहा कि इन संस्थाओं को मिलने वाले फंड की भी उसी तरह जांच होनी चाहिए, जैसी मदरसों की की जा रही है। उनका मानना है कि इससे ही निष्पक्षता और भरोसा कायम रहेगा।
सियासी हलचल:
दलवई के बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज होने लगी हैं। विपक्ष इसे मुद्दा बनाकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर सकता है। फिलहाल, मदरसों की जांच का मामला फिर से सियासी बहस का केंद्र बन गया है और आने वाले दिनों में इसके राजनीतिक असर देखने को मिल सकते हैं।













