
मुंबई में बीएमसी मेयर चुनाव से ठीक पहले उद्धव ठाकरे गुट को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। वार्ड नंबर 157 से जीत दर्ज करने वाली पार्षद सरिता म्हस्के ने ठाकरे गुट की शिवसेना से किनारा कर लिया है। सरिता म्हस्के ने इस चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी आशा तायडे को हराया था, लेकिन अब उनके एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं। यदि यह दावा सच साबित होता है, तो बीएमसी में उद्धव ठाकरे गुट की संख्या एक सीट कम होकर 65 से घटकर 64 रह जाएगी, जो मेयर चुनाव से पहले पार्टी की स्थिति को कमजोर कर सकती है।
पार्षदों की बैठक से दूरी ने बढ़ाई चर्चाएं
सरिता म्हस्के के पार्टी छोड़ने की खबरों को उस समय और मजबूती मिली, जब वह सेना भवन में आयोजित उद्धव ठाकरे गुट के पार्षदों की अहम बैठक में शामिल नहीं हुईं। इस बैठक में किशोरी पेडनेकर को पार्षद दल का नेता चुना गया। किशोरी पेडनेकर इससे पहले भी बीएमसी की मेयर रह चुकी हैं और इस बार उन्होंने वार्ड नंबर 194 से दोबारा जीत हासिल की है। सरिता की गैरमौजूदगी ने अंदरूनी खींचतान और टूट की आशंकाओं को और गहरा कर दिया है।
कल्याण-डोंबिवली में भी टूटा ठाकरे गुट
मुंबई से पहले कल्याण-डोंबिवली में भी ठाकरे गुट को बड़ा झटका लगा था। यहां पार्टी के 11 नगरसेवकों में से चार ने चुने जाने के तुरंत बाद बगावत कर दी। इन चारों नगरसेवकों के एकनाथ शिंदे की शिवसेना और मनसे को समर्थन देने की चर्चा है। वहीं, बचे हुए सात नगरसेवकों ने उद्धव ठाकरे से मुलाकात कर भरोसा दिलाया कि वे फिलहाल एकजुट हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता गठन को लेकर उन्हें लगातार फोन आ रहे हैं, लेकिन कोई भी फैसला वरिष्ठ नेतृत्व की राय के बाद ही लिया जाएगा।
कार्रवाई की चेतावनी, विपक्ष की भूमिका पर जोर
शेष नगरसेवकों ने यह भी साफ किया कि यदि जरूरत पड़ी तो वे महापालिका में एक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाएंगे। वहीं, शिंदे और मनसे का समर्थन करने वाले चार नगरसेवकों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी उद्धव ठाकरे की ओर से दी गई है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि समय रहते अनुशासनात्मक कदम उठाना जरूरी है, ताकि और टूट को रोका जा सके।
गुरुवार रहेगा बेहद अहम
महाराष्ट्र की सियासत के लिहाज से गुरुवार, 22 जनवरी का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। इस दिन राज्य की सभी 29 महानगरपालिकाओं में मेयर पद के लिए आरक्षण तय किया जाएगा। लॉटरी सिस्टम के जरिए आरक्षण घोषित होने के बाद ही राजनीतिक दल अपने-अपने मेयर उम्मीदवारों के नाम सामने लाएंगे। ऐसे में बीएमसी में हो रही यह उठापटक मेयर चुनाव की तस्वीर को पूरी तरह बदल सकती है।














