
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनावों से पहले उद्धव बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना में हलचल तेज हो गई है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस बार उद्धव ठाकरे वरिष्ठ नेताओं के बजाय युवाओं को ज्यादा मौका देने के मूड में हैं। बताया जा रहा है कि 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र वाले पार्षदों की टिकटें काटी जा सकती हैं, जिससे कई पुराने चेहरों की धड़कनें तेज हो गई हैं।
नए नेताओं को मौका, वरिष्ठों की मुश्किलें बढ़ीं
सूत्रों के अनुसार, ठाकरे गुट आगामी चुनाव में पार्टी की छवि को “नए जोश और नई दिशा” देने की रणनीति पर काम कर रहा है। इसलिए उन पार्षदों को प्राथमिकता दी जाएगी जो युवा हैं और जमीनी स्तर पर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वहीं, लंबे समय से पार्टी से जुड़े वरिष्ठ पार्षदों को इस बार टिकट से वंचित रहना पड़ सकता है। इस फैसले से शिवसेना (ठाकरे गुट) के भीतर असंतोष पनपने की संभावना जताई जा रही है। कई दिग्गज नेता नाराज होकर अलग रास्ता भी अपना सकते हैं।
चुनाव में 70% नए चेहरे उतर सकते हैं मैदान में
अगर यह योजना अमल में लाई गई, तो शिवसेना ठाकरे गुट की ओर से बीएमसी चुनाव में लगभग 70% नए उम्मीदवार मैदान में दिखाई दे सकते हैं। बताया जा रहा है कि यह कदम पार्टी के पुनर्निर्माण और जनता के बीच नई छवि बनाने के प्रयास का हिस्सा है। इसी रणनीति को ध्यान में रखते हुए राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) भी अपनी टीम को नए अंदाज में तैयार कर रही है।
उम्मीदवार चयन में अनुभव और योगदान होंगे अहम
पार्टी सूत्र बताते हैं कि प्रत्येक वार्ड के उम्मीदवार का चयन करते समय उनके अनुभव, जनसेवा में योगदान और क्षेत्र में प्रभाव को ध्यान में रखा जाएगा। इसके अलावा, स्थानीय कार्यकर्ताओं की राय भी अंतिम सूची में शामिल होगी। ठाकरे गुट चाहता है कि संगठन में युवाओं की भूमिका और जिम्मेदारी दोनों बढ़ें, ताकि पार्टी में ऊर्जा और नई सोच का संचार हो सके।
उद्धव-राज गठबंधन पर सस्पेंस जारी
हालांकि, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने अभी तक किसी औपचारिक गठबंधन की घोषणा नहीं की है, लेकिन दोनों के बीच कई दौर की अनौपचारिक बैठकें हो चुकी हैं। इन बैठकों में सीट बंटवारे को लेकर चर्चा भी हुई है, जिसमें हर वार्ड में दोनों पार्टियों की ताकत और लोकप्रियता का विश्लेषण किया गया।
2017 के चुनाव से सबक
गौरतलब है कि 2017 के बीएमसी चुनाव में शिवसेना ने 84 सीटें जीती थीं, जबकि बीजेपी उसके बेहद करीब रही थी। लेकिन अब हालात काफी बदल चुके हैं। ठाकरे गुट के कई पुराने पार्षद शिंदे शिवसेना में शामिल हो चुके हैं, जिससे उद्धव गुट को नए चेहरों पर भरोसा करना ही पड़ेगा।














