
झारखंड के चाईबासा में वर्षों पुराने एक मानहानि मामले में आज कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की पेशी हुई। 6 अगस्त को राहुल गांधी झारखंड के चाईबासा स्थित एमपी-एमएलए विशेष अदालत में स्वयं उपस्थित हुए, जहां कोर्ट ने उन्हें ट्रायल में सहयोग करने की शर्त पर जमानत दे दी।
रांची से चाईबासा तक का सफर
राहुल गांधी सोमवार को झारखंड की राजधानी रांची पहुंचे, जहां उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के अंतिम संस्कार में भाग लिया। वहां से वे एक होटल में रुके और मंगलवार की सुबह चाईबासा की अदालत में पेश होने के लिए रवाना हुए। अदालत में हुई सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने उन्हें सशर्त जमानत प्रदान की और कहा कि उन्हें आगे की सुनवाई में सहयोग करना होगा।
मामला क्या है? जानिए पूरा घटनाक्रम
यह मामला मार्च 2018 में आयोजित एक कांग्रेस अधिवेशन से जुड़ा हुआ है। उस दौरान राहुल गांधी ने अपने भाषण में तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष और वर्तमान गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कुछ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उनके इस बयान को लेकर बीजेपी नेता प्रताप कुमार ने जुलाई 2018 में चाईबासा सीजेएम कोर्ट में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था।
गैर-जमानती वारंट और हाईकोर्ट का हस्तक्षेप
राहुल गांधी इस मामले में पहले कभी कोर्ट में हाज़िर नहीं हुए थे, जिससे नाराज होकर चाईबासा कोर्ट ने 24 मई को उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया था। कोर्ट ने उन्हें आदेश दिया था कि वे 26 जून को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हों।
इसके बाद राहुल गांधी ने झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया और वारंट रद्द करने की मांग की। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें 6 अगस्त को चाईबासा अदालत में पेश होने का निर्देश दिया था। आज राहुल गांधी उसी आदेश का पालन करते हुए अदालत में पेश हुए।
सुनवाई बनी राष्ट्रीय चर्चा का विषय
इस पुराने मामले में राहुल गांधी की पेशी ने न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक हलचल मचा दी थी। यह देखना महत्वपूर्ण था कि कोर्ट उनकी जमानत याचिका पर क्या निर्णय लेती है, क्योंकि मामला एक बड़े राजनीतिक नाम से जुड़ा हुआ है और संवेदनशील भी है।
अदालत की कार्यवाही के बाद अब इस बात पर ध्यान केंद्रित होगा कि ट्रायल की अगली प्रक्रियाएं किस दिशा में आगे बढ़ती हैं। कोर्ट के निर्देशानुसार राहुल गांधी को ट्रायल में पूर्ण सहयोग करना होगा, अन्यथा उनकी जमानत रद्द भी की जा सकती है।














