झारखंड में भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। हजारों की संख्या में छात्र नई विधानसभा का घेराव करने के लिए सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने रास्ते में कई जगहों पर मजबूत बैरिकेडिंग के साथ कंटीले तार लगाए हैं। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए ड्रोन के जरिए भी पूरे इलाके की निगरानी की जा रही है। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी लगातार आगे बढ़ते रहे और छात्रों के एक समूह ने पुलिस की तीन बैरिकेडिंग पार कर ली।
फिलहाल छात्रों को जगन्नाथपुर मंदिर के पास लगाए गए बैरिकेड पर रोक दिया गया है। यहां पहुंचने के बाद बड़ी संख्या में छात्र सड़क पर ही बैठ गए और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करने लगे। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है। मौके पर वाटर कैनन भी तैनात हैं, जिससे किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
छात्रों के कंधों पर मार्च में शामिल हुए देवेंद्र नाथ महतो
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो भी इस मार्च में शामिल हुए हैं। वह पिछले करीब 9 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे थे। शुरुआत में उन्हें एंबुलेंस के जरिए आंदोलन स्थल तक लाया गया था, लेकिन बाद में उन्होंने छात्रों के साथ मार्च में शामिल होने का फैसला किया। इस दौरान उनकी हालत को देखते हुए छात्र उन्हें अपने कंधों पर लेकर आगे बढ़ते नजर आए।
मार्च के दौरान देवेंद्र नाथ महतो के हाथ में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता शिबू सोरेन की तस्वीर भी दिखाई दी। उन्होंने साफ कहा कि जब तक सरकार छात्रों की मांगों को स्वीकार नहीं करती, तब तक वह अपना अनशन समाप्त नहीं करेंगे।
प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों को लगातार शांत रहने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की जा रही है। पुलिस अधिकारियों की कोशिश है कि छात्रों को समझाकर आगे बढ़ने से रोका जाए, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। छात्रों का कहना है कि जब तक सीजीएल परीक्षा रद्द नहीं की जाती और पूरे मामले की सीबीआई जांच का आदेश नहीं दिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
सीजीएल परीक्षा को लेकर क्यों आमने-सामने हैं छात्र और सरकार?
छात्रों के इस आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा झारखंड की सीजीएल परीक्षा है। प्रदर्शनकारी परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं की जांच की मांग कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि परीक्षा को रद्द कर नए सिरे से प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए और पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई से कराई जानी चाहिए।
हालांकि, राज्य सरकार छात्रों की सीबीआई जांच की मांग को स्वीकार करने के लिए फिलहाल तैयार नहीं है। सरकार की ओर से कहा गया है कि मामले की जांच एक सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में गठित न्यायिक आयोग से कराई जाएगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर जांच के दौरान किसी तरह की वित्तीय अनियमितता या आर्थिक गड़बड़ी सामने आती है, तो प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी से भी जांच कराई जा सकती है।
इसके बावजूद छात्रों का कहना है कि केवल न्यायिक जांच उनके लिए पर्याप्त नहीं है। वे लगातार सीबीआई जांच और परीक्षा रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं। यही वजह है कि सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच गतिरोध अब तक खत्म नहीं हो पाया है।
15 हजार से ज्यादा छात्र विधानसभा मार्च में शामिल
बताया जा रहा है कि नई विधानसभा की ओर निकाले गए इस मार्च में अब तक 15,000 से ज्यादा छात्र शामिल हो चुके हैं। इसके अलावा अलग-अलग इलाकों से और भी छात्र रांची पहुंच रहे हैं, जिससे प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ने की संभावना है।
मार्च में शामिल छात्रों के हाथों में तिरंगा नजर आ रहा है। खास बात यह है कि प्रदर्शन के दौरान तिरंगे के अलावा किसी राजनीतिक दल, संगठन या संस्था से संबंधित झंडे और बैनर दिखाई नहीं दे रहे हैं। छात्र इसे अपने अधिकारों और परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन बता रहे हैं।
प्रदर्शनकारी छात्रों का पहला बड़ा समूह पुलिस की तीन बैरिकेडिंग पार करते हुए जगन्नाथपुर मंदिर के पास लगाए गए बैरिकेड तक पहुंच गया। यहां पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद छात्रों ने सड़क पर ही बैठकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।
जगन्नाथपुर इलाके में बढ़ा तनाव, पुलिस की अपील जारी
जगन्नाथपुर इलाके में बड़ी संख्या में छात्रों के पहुंचने के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। रांची पुलिस लगातार प्रदर्शनकारियों से संयम बनाए रखने और किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति पैदा नहीं करने की अपील कर रही है। पुलिस की ओर से कोशिश की जा रही है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहे और बैरिकेडिंग को आगे नुकसान न पहुंचे।
वहीं, जगन्नाथपुर इलाके के स्थानीय लोगों को भी फिलहाल आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सुरक्षा कारणों से कई रास्तों पर आवाजाही को सीमित किया गया है। स्थानीय लोगों की ओर से भी इस स्थिति को लेकर विरोध जताया जा रहा है। लोगों का कहना है कि प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था के कारण उनकी रोजमर्रा की आवाजाही प्रभावित हो रही है।
दूसरी तरफ छात्र भी सड़क पर बैठकर अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे सरकार के आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं और जब तक सीजीएल परीक्षा को लेकर उनकी प्रमुख मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।
फिलहाल प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बनाए रखना और छात्रों को विधानसभा की ओर आगे बढ़ने से रोकना है। वहीं छात्र अपनी मांगों पर कायम हैं। ऐसे में आने वाले समय में सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच बातचीत होती है या आंदोलन और तेज होता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।













