
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने एक बार फिर केंद्र सरकार को पाकिस्तान से संवाद शुरू करने की सलाह दी है। श्रीनगर में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के 26वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित एक जनसभा में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास कश्मीर मुद्दे को हल करने की पूरी क्षमता है। उन्होंने अपने भाषण में कहा, “जब प्रधानमंत्री लाहौर जा सकते हैं और रिश्ते सुधारने की पहल कर सकते हैं, तो कश्मीर समस्या का हल भी निकल सकता है। यह सिर्फ उनकी इच्छा पर निर्भर करता है।”
'सिर्फ सैन्य बल और गिरफ्तारियां नहीं लाएंगी अमन'
महबूबा मुफ्ती ने यह भी दोहराया कि जम्मू-कश्मीर की जनता शांति की पक्षधर है, लेकिन सम्मानजनक तरीके से। उन्होंने कहा, “दिल्ली सरकार से मैं यह कहना चाहती हूं कि शांति बंदूक और जेल से नहीं आएगी। लोग इज्जत चाहते हैं, डर नहीं।” उन्होंने सुरक्षा बलों की मौजूदगी और दमन के ज़रिये अमन कायम करने की सोच पर भी सवाल उठाए और ज़ोर दिया कि बातचीत ही एकमात्र रास्ता है।
'भारत को निभाना होगा बड़े भाई की भूमिका'
महबूबा ने भारत की विदेश नीति और क्षेत्रीय दृष्टिकोण पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, “भारत को एक बड़े भाई की तरह सभी पड़ोसी देशों से संवाद करना चाहिए। हमने युद्ध के मुहाने से लौटने के बाद भी यह नहीं समझा कि हमने हासिल क्या किया?” उन्होंने यह भी कहा, “जब भी हम बातचीत की बात करते हैं, हमें फॉरेन पॉलिसी का हवाला देकर चुप करा दिया जाता है। लेकिन मैं पूछती हूं कि जम्मू-कश्मीर को अलग रखकर क्या विदेश नीति मुमकिन है?”
'इज्जत के साथ अमन चाहिए' – नारे और संदेश
सभा के दौरान मुफ्ती ने “इज्जत के साथ अमन” का नारा बुलंद किया। उन्होंने कहा, “भारत और पाकिस्तान में हथियारों की होड़ लगी है। युद्ध के बाद शांति नहीं, बल्कि सैन्य तैयारी बढ़ गई है। पाकिस्तान आर्थिक तंगी में डूबा है, और भारत चीन से मुकाबला करने की स्थिति में नहीं है। यह मेरी नहीं, बल्कि भारत के विदेश मंत्री की बात है।” उन्होंने यह भी जोड़ा, “मैं विदेश मंत्री को कहना चाहती हूं कि जब-जब आप लड़ाई की बात करते हैं, उसका असर कश्मीर में ही देखने को मिलता है – फिर चाहे वह पहलगाम हमला हो या कोई और सैन्य ऑपरेशन।”
'मुसलमानों के साथ अन्याय हो रहा है'
महबूबा मुफ्ती ने देश में मुस्लिम समुदाय के साथ हो रहे कथित भेदभाव और ज़ुल्म को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, “देश में मुसलमानों को बांग्लादेशी बताकर समुद्र में फेंका जा रहा है। अगर आपको हमारी जमीन चाहिए, तो साफ कहिए – हम खुद ही छोड़ देंगे।” उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत को अगर वाकई ‘विश्वगुरु’ बनना है, तो उसे युद्ध और टकराव की भाषा छोड़कर शांति और संवाद की राह अपनानी होगी।
'पीडीपी शांति की समर्थक है'
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा, “पीडीपी हमेशा अमन की हिमायती रही है और आगे भी रहेगी। मैं इस बात से खुश हूं कि भारत और पाकिस्तान एशिया कप जैसे आयोजनों में एक-दूसरे के सामने खेल रहे हैं। यह खेल भावना ही देशों को करीब लाती है।”














