
गुरुग्राम का राधिका यादव हत्याकांड इस वक्त पूरे देश को झकझोर रहा है। हर कोई स्तब्ध है कि एक पिता अपनी इतनी होनहार, सपनों से भरी बेटी को कैसे मौत के घाट उतार सकता है? यह वही बेटी थी जो हर रोज़ अपने सपनों को आकार देती थी, जो अपने रैकेट से दुनिया को जीतना चाहती थी। अब वही राधिका हम सबकी यादों में बस गई है।
आरोपी पिता दीपक यादव एक दिन की पुलिस रिमांड पर है और पूछताछ जारी है। उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। इस बीच एक और दिल तोड़ देने वाली बात सामने आई है – राधिका की व्हाट्सएप चैट, जिसमें उसने अपने टेनिस कोच को वो परेशानियां बताई थीं, जिनसे जूझते हुए वह खुद को इस देश से दूर करना चाहती थी।
एक टीवी चैनल के पास मौजूद व्हाट्सएप चैट के मुताबिक, राधिका ने कोच से कहा था कि वह विदेश जाकर बसना चाहती है। उसने दिल खोलकर लिखा – "यहां बहुत पाबंदियां हैं, मैं अपनी जिंदगी खुलकर जीना चाहती हूं। दुबई या ऑस्ट्रेलिया जाकर बसने का सोच रही हूं। चीन नहीं जाऊंगी, वहां खाने के ऑप्शन बहुत कम हैं।" एक बेटी की ये बातें अब किसी डायरी का हिस्सा बनकर रह गई हैं।
पिता को लोगों के ताने अंदर तक तोड़ रहे थे
इधर पुलिस पूछताछ में पिता दीपक ने बताया कि वह गांव में लोगों की कड़वी बातों और तानों से अंदर तक टूट चुका था। उसे ताना दिया जाता था कि वह बेटी के पैसों पर पल रहा है। यहां तक कि लोग कहते थे, “तेरी बेटी गलत तरीके से पैसे कमाती है।” इन बातों ने दीपक को अंदर से खा लिया और उसने आत्महत्या करने या बेटी को मारने की सोच ली। अंतत: गुरुवार को, जब राधिका ने अकादमी जाने से मना किया, तो पिता ने चार गोलियां दाग दीं – अपनी ही उस बेटी पर, जिसे कभी कंधों पर बैठाकर झूले झुलाया था।
शक्की स्वभाव और अस्थिर मानसिकता ले डूबी
जांच में सामने आया है कि दीपक यादव का स्वभाव बेहद शक्की था और मानसिक स्थिति भी संतुलित नहीं थी। उसे हर बात पर शक हो जाता था – बेटी फोन पर किससे बात कर रही है, कहां जा रही है, क्या कर रही है…। राधिका ने कई बार पिता को समझाया था कि वो कभी कुछ गलत नहीं करेगी, लेकिन फिर भी गुरुवार को दीपक ने पांच गोलियां चलाईं, जिनमें से चार राधिका के शरीर से मिली हैं। पांचवीं गोली कहां है, इस पर अब पुलिस जांच कर रही है।














