
नई दिल्ली: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का बारामती के पास विमान हादसे में असमय निधन होने से राजनीतिक गलियारों में गहरा शोक व्याप्त है। इस दुखद घटना के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले ही सार्वजनिक तौर पर सवाल उठाए थे, और अब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इस हादसे की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
खरगे ने जताया शोक और जांच की मांग
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, "यह एक अत्यंत दुखद घटना है। अजित पवार का असमय निधन हमारे लिए सदमे की घड़ी लेकर आया है। वह एक मेहनती और समर्पित नेता थे। इस हादसे की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि वास्तविक कारण सामने आए। इस दुख की घड़ी में हम उनके परिवार के साथ हैं।"
#WATCH | दिल्ली | महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के निधन पर, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, "हम इस दुर्घटना की जांच की मांग करेंगे... यह बहुत दुखद घटना है। अजीत पवार की असमय मौत हो गई। एक मेहनती इंसान के चले जाने से हम सब सदमे में हैं। दुख की इस घड़ी… pic.twitter.com/b7isGLy7qN
— ANI_HindiNews (@AHindinews) January 28, 2026
ममता बनर्जी ने उठाए गंभीर सवाल
इससे पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी विमान हादसे पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा, "अजित पवार अपने पुराने राजनीतिक गुट में लौटने वाले थे। हादसे की जांच कराई जाए। हमारी एजेंसियों पर भरोसा करना कठिन है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच होनी चाहिए।" उन्होंने हादसे की सुरक्षा संबंधी चुनौतियों को भी उजागर करते हुए कहा, "देश के नेता समय की कमी के कारण चार्टर्ड फ्लाइट में यात्रा करते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा का क्या? अहमदाबाद और अब बारामती में हुई घटनाएं सुरक्षा की कमी को दिखाती हैं।"
हादसे का समय और घटनाक्रम
जानकारी के अनुसार, अजित पवार और उनके साथ चार अन्य लोग सुबह मुंबई से बारामती के लिए रवाना हुए थे। पवार को जिले में होने वाले चुनाव के लिए चार रैलियों को संबोधित करना था। विमान सुबह 8:50 बजे बारामती के पास दुर्घटनाग्रस्त हुआ। मृतकों में डिप्टी सीएम के अलावा चालक दल के दो सदस्य भी शामिल हैं।
नेताओं ने जताया शोक
अजित पवार के निधन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और देश के विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता शोक व्यक्त कर चुके हैं। उनके असमय निधन ने न केवल महाराष्ट्र की राजनीति को झकझोर दिया है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता और शोक की लहर दौड़ा दी है।













