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हिमस्खलन में विश्वविख्यात पर्वतारोही निर्मल पुरजा का निधन, पर्वतारोहण जगत में शोक की लहर

विश्वविख्यात नेपाली पर्वतारोही निर्मल "निम्सदाई" पुरजा का पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर के काराकोरम पर्वत क्षेत्र में स्थित ब्रॉड पीक पर आए भीषण हिमस्खलन में निधन हो गया।

Posts by : Rajesh Bhagtani | Updated on: Sat, 01 Aug 2026 8:30:15

हिमस्खलन में विश्वविख्यात पर्वतारोही निर्मल पुरजा का निधन, पर्वतारोहण जगत में शोक की लहर

विश्वविख्यात नेपाली पर्वतारोही निर्मल "निम्सदाई" पुरजा का पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर के काराकोरम पर्वत क्षेत्र में स्थित ब्रॉड पीक पर आए भीषण हिमस्खलन में निधन हो गया। पर्वतारोहण जगत के लिए यह अत्यंत दुखद समाचार माना जा रहा है। अभियान से जुड़ी संस्था ने सामाजिक माध्यम पर आधिकारिक बयान जारी कर उनके निधन की पुष्टि की। हिमस्खलन के बाद वह पिछले दो दिनों से लापता थे और लगातार उनकी तलाश की जा रही थी।

अभियान के दौरान आया भीषण हिमस्खलन

43 वर्षीय निर्मल पुरजा ब्रॉड पीक पर चढ़ाई के अभियान का नेतृत्व कर रहे थे। गुरुवार दोपहर अचानक आए हिमस्खलन के बाद अभियान दल से संपर्क पूरी तरह टूट गया। दल में कुल दस सदस्य शामिल थे, जिनमें नेपाल के छह पर्वतारोही और पाकिस्तान, ओमान, अमेरिका तथा चीन के एक-एक सदस्य थे। पाकिस्तान के पर्वतारोही सोहेल साखी भी इस दल का हिस्सा थे। घटना के बाद बचाव अभियान शुरू करने के लिए हेलीकॉप्टर भेजने की तैयारी की गई, लेकिन प्रतिकूल मौसम और कठिन परिस्थितियों के कारण अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण रहा।

श्रद्धांजलियों का लगा तांता

निर्मल पुरजा के निधन की पुष्टि होने के बाद दुनिया भर से उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है। उनके अभियान से जुड़ी संस्था ने उन्हें पर्वतारोहण जगत के महानतम पर्वतारोहियों में से एक बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने साहस, विनम्रता और मानवीय क्षमता पर अटूट विश्वास से लाखों लोगों को प्रेरित किया। संस्था ने कहा कि उनके जाने से पर्वतारोहण जगत ने एक ऐसे नेतृत्वकर्ता को खो दिया है, जिसकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेंगी।

नेपाल के प्रधानमंत्री ने भी निर्मल पुरजा और इस अभियान में शामिल अन्य नेपाली पर्वतारोहियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि पर्वतारोहण केवल किसी शिखर तक पहुंचने का नाम नहीं है, बल्कि यह साहस, अनुशासन, त्याग और मानवीय सीमाओं को चुनौती देने की भावना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि पर्वत कभी-कभी अपने वीर पर्वतारोहियों को हमेशा के लिए अपने पास समेट लेते हैं, लेकिन उनका साहस और योगदान इतिहास में अमर रहता है।

छह महीने में रचा था विश्व इतिहास

निर्मल पुरजा ने वर्ष 2019 में पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया था, जब उन्होंने केवल छह महीने से कुछ अधिक समय में दुनिया की 8,000 मीटर से ऊंची सभी 14 चोटियों पर सफलतापूर्वक चढ़ाई कर विश्व कीर्तिमान बनाया था। उन्होंने दक्षिण कोरिया के पर्वतारोही किम चांग-हो का कई वर्षों पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया था। इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई और वह आधुनिक पर्वतारोहण के सबसे चर्चित चेहरों में शामिल हो गए।

जीवन पर बना था चर्चित वृत्तचित्र


निर्मल पुरजा की इस असाधारण उपलब्धि पर आधारित एक चर्चित वृत्तचित्र भी बनाया गया था, जिसने दुनिया भर के दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। इस वृत्तचित्र के माध्यम से लोगों ने उनके संघर्ष, साहस और कठिन परिस्थितियों में लक्ष्य हासिल करने की कहानी को करीब से जाना। उनकी प्रेरणादायक यात्रा ने हजारों युवाओं को पर्वतारोहण और साहसिक खेलों की ओर आकर्षित किया।

सेना से पर्वतारोहण तक का प्रेरणादायक सफर

पेशेवर पर्वतारोही बनने से पहले निर्मल पुरजा ने लगभग 16 वर्षों तक ब्रिटेन की सेना में सेवा दी थी। उन्होंने पहले गोरखा ब्रिगेड में अपनी सेवाएं दीं और बाद में नौसेना की विशेष बल इकाई का हिस्सा बने। सैन्य सेवाओं में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2018 में ब्रिटेन के प्रतिष्ठित सम्मान से भी सम्मानित किया गया था।

उनके भीतर पर्वतारोहण का जुनून वर्ष 2012 में एवरेस्ट आधार शिविर की यात्रा के दौरान जागा। इसके बाद उन्होंने पूरी निष्ठा के साथ पर्वतारोहण को अपना जीवन बना लिया और कुछ ही वर्षों में दुनिया के सबसे सफल पर्वतारोहियों में अपनी पहचान स्थापित कर ली।

दुनिया की सबसे कठिन चोटियों में शामिल है ब्रॉड पीक

ब्रॉड पीक समुद्र तल से 8,051 मीटर की ऊंचाई पर स्थित दुनिया की 12वीं सबसे ऊंची चोटी है। काराकोरम पर्वतमाला में स्थित यह शिखर के-2 के निकट और पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर क्षेत्र में मौजूद है। कठिन मौसम, खतरनाक हिमखंडों और चुनौतीपूर्ण मार्गों के कारण इसे दुनिया की सबसे कठिन पर्वत चोटियों में गिना जाता है। इस शिखर पर पहली सफल चढ़ाई वर्ष 1957 में एक ऑस्ट्रियाई अभियान दल ने की थी।

पर्वतारोहण जगत के लिए अपूरणीय क्षति


निर्मल पुरजा का निधन केवल नेपाल ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के पर्वतारोहण समुदाय के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उन्होंने अपने साहस, अनुशासन और अदम्य इच्छाशक्ति से यह साबित किया कि कठिन से कठिन लक्ष्य भी दृढ़ संकल्प के बल पर हासिल किए जा सकते हैं। उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के पर्वतारोहियों और साहसिक खेलों से जुड़े युवाओं के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी।

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