लोकसभा में मंगलवार को लगातार दूसरे दिन पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण के बाद सदन का माहौल गर्मा गया। राहुल गांधी द्वारा गृह मंत्री अमित शाह और छात्र आंदोलन को लेकर दिए गए बयान पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया। इसके बाद केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जवाब देते हुए राहुल गांधी पर कई तीखे राजनीतिक हमले किए और उनके आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया।
राहुल गांधी की भाषा पर उठाए सवाल
डॉ. जितेंद्र सिंह ने अपने संबोधन की शुरुआत राहुल गांधी की शब्दावली पर आपत्ति जताते हुए की। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने अपने भाषण में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया जो संसदीय मर्यादाओं के अनुरूप नहीं हैं। मंत्री ने कहा कि यदि राहुल गांधी किसी व्यक्ति विशेष के लिए ये शब्द नहीं बोल रहे थे, तो क्या उनका इशारा देश के छात्रों की ओर था? उन्होंने कहा कि युवाओं के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और यह किसी जिम्मेदार जनप्रतिनिधि को शोभा नहीं देता।
उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी को संसदीय नियमों और सार्वजनिक जीवन के व्यवहार का पर्याप्त अनुभव नहीं है। उनके अनुसार, सदन में बोलते समय तथ्यों और भाषा दोनों की जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
'गोली चलाने का आदेश गृह मंत्री नहीं देते'
राहुल गांधी के उस आरोप पर भी केंद्रीय मंत्री ने विस्तार से जवाब दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि छात्रों पर गोली चलाने का आदेश गृह मंत्री अमित शाह ने दिया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस दावे को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था की स्थिति में गोली चलाने का निर्णय कोई केंद्रीय मंत्री नहीं लेता। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह के आदेश मजिस्ट्रेट, जिला मजिस्ट्रेट (DM) या उप जिला मजिस्ट्रेट (SDM) जैसे सक्षम प्रशासनिक अधिकारी देते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि जिस घटना का जिक्र किया जा रहा है, वहां गोलीबारी नहीं हुई थी बल्कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया था। मंत्री ने राहुल गांधी के उस दावे पर भी सवाल उठाया जिसमें उन्होंने कहा था कि गृह मंत्री अमित शाह 30 गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंचे थे। जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस तरह के बयान तथ्यहीन हैं और बिना किसी प्रमाण के सदन में ऐसे आरोप लगाना नेता प्रतिपक्ष जैसे पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है।
PM आवास के बाहर बैठने की घटना का किया जिक्र
अपने भाषण के दौरान केंद्रीय मंत्री ने 21 जुलाई की घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास 7, लोक कल्याण मार्ग (7 LKM) के बाहर जाकर बैठ गए थे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि शायद उनकी इच्छा थी कि देश उन्हें प्रधानमंत्री बनाए, लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ तो वे प्रधानमंत्री आवास के बाहर जाकर बैठ गए।
जितेंद्र सिंह ने आगे कहा कि जब उन्हें वहां से हटने का अनुरोध किया गया, तब उन्होंने बाद में यह दावा किया कि उन्हें जबरन हटाया गया। मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि शुरुआत में राहुल गांधी छात्र आंदोलन से दूरी बनाए हुए थे क्योंकि उन्हें लगा कि यह आम आदमी पार्टी का आंदोलन है, लेकिन बाद में उन्हें FOMO (Fear of Missing Out) हो गया और वह भी इस मुद्दे से जुड़ गए।
क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, एंटी पेपर लीक विधेयक पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने करीब 50 मिनट तक अपना पक्ष रखा। इस दौरान उन्होंने अपने भाषण में "Idiot" और "अंधभक्त" जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में छात्रों पर फायरिंग का आदेश गृह मंत्री अमित शाह ने दिया था। इन बयानों के बाद सत्ता पक्ष के सांसदों ने जोरदार विरोध दर्ज कराया और सदन में हंगामा शुरू हो गया।
भाजपा सांसदों ने राहुल गांधी पर असंसदीय भाषा के इस्तेमाल का आरोप लगाया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी चर्चा के दौरान उन्हें कई बार टोका और सदन की भाषा एवं मर्यादा बनाए रखने की सलाह दी। वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अध्यक्ष से आग्रह किया कि आपत्तिजनक शब्दों को सदन की कार्यवाही से हटाया जाए। इसके बाद यह मुद्दा सदन में राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गया।













