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लोकसभा में FCRA बिल पर आर-पार की तैयारी, कांग्रेस ने 10 से 12 अगस्त तक जारी किया व्हिप

लोकसभा में FCRA संशोधन बिल को लेकर सियासी हलचल तेज है। कांग्रेस ने 10 से 12 अगस्त तक सांसदों की मौजूदगी के लिए व्हिप जारी किया है। जानें पूरा मामला।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Sat, 08 Aug 2026 8:16:50

लोकसभा में FCRA बिल पर आर-पार की तैयारी, कांग्रेस ने 10 से 12 अगस्त तक जारी किया व्हिप

संसद के मॉनसून सत्र का आखिरी सप्ताह राजनीतिक रूप से काफी अहम रहने वाला है। आने वाले दिनों में लोकसभा में कई मुद्दों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ने के आसार हैं। खासतौर पर विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक यानी FCRA बिल को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर ली है। कांग्रेस ने शुक्रवार दोपहर अपने लोकसभा सांसदों के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया है। इसमें पार्टी के सभी सांसदों को 10, 11 और 12 अगस्त को सदन में अनिवार्य रूप से मौजूद रहने का निर्देश दिया गया है।

कांग्रेस के इस कदम के बाद माना जा रहा है कि इंडिया ब्लॉक में शामिल दूसरे विपक्षी दल भी अपने सांसदों की सदन में मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए इसी तरह के निर्देश जारी कर सकते हैं। सोमवार से शुरू होने वाले इन तीन दिनों को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसी दौरान FCRA संशोधन विधेयक को लोकसभा में पेश किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

विपक्ष ने क्यों बढ़ाई अपनी सक्रियता?

सूत्रों और सामने आ रही रिपोर्टों के मुताबिक, 10 अगस्त को लोकसभा में FCRA संशोधन बिल पेश किया जा सकता है। यह विधेयक केंद्रीय गृह मंत्रालय से संबंधित है। ऐसे में विपक्ष को उम्मीद है कि बिल पर चर्चा और सदन की कार्यवाही के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी लोकसभा में मौजूद रह सकते हैं।

'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार सुबह राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में कांग्रेस नेतृत्व ने अपने सहयोगी दलों के साथ भी चर्चा की और उनसे कहा कि सोमवार से उनके सभी सांसद पूरी संख्या में सदन में मौजूद रहें। विपक्षी दलों के लिए अगले तीन दिन इसलिए भी अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि सरकार की ओर से कई महत्वपूर्ण विधायी कदम उठाए जा सकते हैं।

दरअसल, मॉनसून सत्र की शुरुआत से ही विपक्ष 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठा रहा है। विपक्ष की मांग है कि इस मामले में गृह मंत्री अमित शाह सदन के भीतर बयान दें। इस मुद्दे को लेकर संसद की कार्यवाही कई बार बाधित भी हो चुकी है और सरकार तथा विपक्ष के बीच लगातार गतिरोध की स्थिति बनी हुई है।

कांग्रेस के लोकसभा व्हिप मणिकम टैगोर ने कहा, "हम अगले हफ्ते परिसीमन और FCRA बिल के लिए तैयार हैं। हमें पता है कि अमित शाह 12 दिनों से सदन से गायब हैं। अब वे देश में चल रहे छात्रों के विरोध प्रदर्शन से ध्यान भटकाने की कोशिश करेंगे।" उनके इस बयान से साफ है कि कांग्रेस आने वाले दिनों में सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ाने की तैयारी में है।

सपा और टीएमसी भी विपक्ष के साथ

FCRA संशोधन विधेयक को लेकर विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक के दूसरे दल भी कांग्रेस के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं। समाजवादी पार्टी के एक वरिष्ठ सांसद ने कहा कि उनकी पार्टी विपक्ष के साझा एजेंडे का समर्थन करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सपा विपक्ष के साथ पहले भी खड़ी रही है और आगे भी रहेगी।

सपा सांसद के मुताबिक, जरूरत महसूस होने पर पार्टी अपने सांसदों के लिए औपचारिक व्हिप भी जारी कर सकती है। हालांकि, उनका कहना है कि सपा के सभी सांसद पहले से ही संसद की कार्यवाही में मौजूद रहने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह आशंका भी जताई कि सरकार FCRA बिल पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह की जगह गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय को सदन में भेज सकती है।

वहीं, तृणमूल कांग्रेस यानी टीएमसी के एक वरिष्ठ सांसद ने भी बताया कि पार्टी ने अपने सभी सांसदों को सोमवार से सदन में मौजूद रहने का निर्देश दे दिया है। हालांकि, विपक्षी दलों के काम करने का तरीका अलग-अलग हो सकता है। कुछ राजनीतिक दल औपचारिक तौर पर व्हिप जारी करते हैं, जबकि कुछ अपने सांसदों को पार्टी स्तर पर अनौपचारिक निर्देश देकर सदन में उपस्थिति सुनिश्चित करते हैं।

FCRA संशोधन बिल को लेकर क्या है विवाद?

विदेशी अंशदान (विनियमन) यानी FCRA से जुड़े प्रस्तावित संशोधन को लेकर पहले से ही काफी चर्चा और विवाद देखने को मिला है। खासतौर पर ईसाई संगठनों की ओर से बिल के एक प्रस्तावित प्रावधान को लेकर चिंता जाहिर की गई है। इस प्रावधान के तहत जिन संस्थाओं का FCRA रजिस्ट्रेशन समाप्त हो जाता है, उनकी संपत्तियों पर सरकार द्वारा नामित प्राधिकरण को पिछली तारीख से अधिकार दिए जाने की आशंका जताई जा रही थी।

यही वजह है कि इस प्रस्ताव को लेकर कई ईसाई संगठनों और संस्थाओं में चिंता बनी हुई है। देश में कई चर्च और ईसाई संस्थान ऐसे हैं, जिनके निर्माण या संचालन में विदेशी चंदे की भूमिका रही है और वे FCRA के दायरे में आते हैं। ऐसे में बिल में संपत्तियों से जुड़े किसी भी पूर्वव्यापी प्रावधान को लेकर इन संगठनों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं।

राजनीतिक लिहाज से भी यह मुद्दा भाजपा के लिए संवेदनशील माना जा रहा है। पार्टी केरल जैसे राज्यों में ईसाई समुदाय के बीच अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में FCRA संशोधन को लेकर उठ रही चिंताओं को दूर करना सरकार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को सरकार की ओर से संकेत दिया गया था कि प्रस्तावित विधेयक में किसी तरह का दंडात्मक रेट्रोस्पेक्टिव यानी पूर्वव्यापी प्रावधान नहीं रखा जाएगा। इसके बाद गुरुवार को मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने FCRA संशोधन बिल को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखीं और गृह मंत्री को एक ज्ञापन भी सौंपा।

मुलाकात के बाद लालदुहोमा ने मीडिया से बातचीत में बताया कि अमित शाह ने उन्हें आश्वासन दिया है कि विधेयक 12 अगस्त को लोकसभा में पेश किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि बिल में कोई रेट्रोस्पेक्टिव क्लॉज नहीं होगा, यानी ऐसा प्रावधान नहीं होगा जिसे पिछली तारीख से लागू किया जा सके। अब इस आश्वासन के बाद बिल के अंतिम स्वरूप पर सभी की नजर बनी हुई है।

क्या मॉनसून सत्र को आगे बढ़ाया जाएगा?

संसद का मौजूदा मॉनसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त होना प्रस्तावित है। ऐसे में आखिरी सप्ताह की कार्यवाही काफी महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि, फिलहाल सत्र की अवधि बढ़ाए जाने की कोई आधिकारिक योजना सामने नहीं आई है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि सरकार के पास अभी मॉनसून सत्र को निर्धारित समय से आगे बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

इस बीच, राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने गुरुवार को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से मुलाकात के दौरान विपक्ष की भावनाओं से गृह मंत्री अमित शाह को अवगत कराने को कहा था। उन्होंने विपक्ष की उस मांग पर भी विचार करने की बात कही, जिसमें अमित शाह की सदन में मौजूदगी की मांग की जा रही है।

ऐसे में संसद के मॉनसून सत्र के अंतिम दिनों में FCRA संशोधन विधेयक, अमित शाह की सदन में मौजूदगी और विपक्ष की रणनीति पर सबकी नजर रहेगी। 10 से 12 अगस्त के बीच लोकसभा में सरकार और विपक्ष के बीच सियासी टकराव बढ़ने की संभावना है और इन तीन दिनों की कार्यवाही कई अहम राजनीतिक घटनाक्रम तय कर सकती है।

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