
दिल्ली ब्लास्ट मामले में मुख्य आरोपी आतंकी उमर नबी से जुड़ी एक और चौंकाने वाली क्लिप सामने आई है। यह वीडियो धमाके से पहले रिकॉर्ड किया गया था, जिसमें उमर आत्मघाती हमले की अवधारणा पर खुलकर बातचीत करता दिखाई दे रहा है।
नया वीडियो दिखाता है कि उमर एक बंद कमरे में कैमरे के सामने अकेला बैठा है। उसकी आवाज़ में साफ सुनाई देता है कि वह अंग्रेजी में आत्मघाती हमले को सही ठहराने की कोशिश कर रहा है, मानो वह अपने कदमों को किसी ‘विचारधारा’ के आधार पर उचित साबित करना चाहता हो।
लगभग 1 मिनट 20 सेकंड की इस रिकॉर्डिंग में उमर कहता है कि आत्मघाती हमलों की सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि जब कोई व्यक्ति यह मान लेता है कि उसकी मौत तय तारीख और जगह पर ही होनी है, तो उसका मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है। ऐसे में मौत उसके लिए अंतिम लक्ष्य बन जाती है और वह सामान्य जिंदगी से पूरी तरह कट जाता है।
वीडियो में आगे वह यह भी स्वीकार करता है कि ऐसी सोच किसी भी लोकतांत्रिक, मानवीय या कानूनी ढांचे में स्वीकार नहीं की जा सकती। उसके मुताबिक, यह विचार जीवन और समाज के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। वीडियो के सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां स्तब्ध हैं और आम लोग भी इसे देखने के बाद हैरानी में हैं।
इधर, जांच टीमें इस वीडियो का हर पहलू खंगालने में जुट गई हैं। एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि क्या उमर ने इस तरह के और वीडियो बनाए थे और वे कहीं इंटरनेट या अन्य माध्यमों पर अपलोड तो नहीं किए गए।
दिल्ली ब्लास्ट से पहले आतंकी उमर ने बनाया था VIDEO, सुनिए क्या थी पूरी प्लानिंग?#DelhiBlast #Umarnbi pic.twitter.com/UpzqFhcdNH
— Kapil Kumar (@KapilKumar77025) November 18, 2025
व्हाइट कॉलर टेररिज्म पर बड़ी कार्रवाई, चार राज्यों में ईडी की 30 जगहों पर छापेमारी
इसी बीच, व्हाइट कॉलर टेररिज्म और मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने व्यापक एक्शन शुरू कर दिया है। जांच एजेंसी ने चार राज्यों में फैली लगभग 30 लोकेशनों पर तलाशी अभियान चलाया है। यह पूरा मामला हरियाणा के फरीदाबाद में स्थित "अल फलाह यूनिवर्सिटी" और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन से संबंधित बताया जा रहा है।
ईडी ने अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस को रजिस्टर्ड कर आगे की जांच तेज कर दी है। सूत्रों के अनुसार, छापेमारी फरीदाबाद, दिल्ली और मध्य प्रदेश में कई ठिकानों पर की जा रही है।
अल फलाह ट्रस्ट और उससे जुड़े संस्थानों की वित्तीय गतिविधियां जांच के दायरे में हैं। फाइनेंस और एडमिन विभाग के मुख्य अधिकारियों को भी इस तलाशी में शामिल किया गया है। इसके अलावा, एक ही पते पर रजिस्टर्ड नौ शेल कंपनियों पर भी गंभीर सवाल उठे हैं, जो अब ईडी की जांच के केंद्र में हैं।
प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट संकेत मिले हैं कि इन कंपनियों में वास्तविक कारोबार का कोई प्रमाण नहीं है। न तो उनके कार्यालयों में कोई गतिविधि दिखती है और न ही बिजली या अन्य सेवाओं के उपयोग का रिकॉर्ड मिलता है, जो शेल कंपनियों का सामान्य पैटर्न माना जाता है।
कुछ दिन पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय में एक अहम बैठक हुई थी जिसमें गृह मंत्री अमित शाह, आईबी, ईडी और एनआईए के शीर्ष अधिकारी मौजूद थे। दिल्ली ब्लास्ट और उससे जुड़े व्हाइट कॉलर टेररिज्म की साजिश को गहराई से परखने के लिए इस बैठक में विशेष निर्देश जारी किए गए थे। गृह मंत्री ने साफ कहा था कि दिल्ली धमाके और उससे जुड़े हर वित्तीय सुराग की जांच बेहद सतर्कता और सख्ती से की जानी चाहिए। इसी निर्देश के बाद ईडी और एनआईए ने अपनी कार्रवाई और तेज कर दी है।














