
लाल किले के सामने हुआ धमाका देश के लिए किसी सदमे से कम नहीं था। करीब 14 साल बाद राजधानी में ऐसा भयावह विस्फोट हुआ, जिसने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। हर गुजरते दिन के साथ इस हमले को लेकर नए राज सामने आ रहे हैं। ताज़ा जानकारी यह संकेत देती है कि इस आतंकी वारदात की डोरें सीधे जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ी हैं।
खुफिया एजेंसियों का दावा है कि जैश ने भारत में अपनी आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए करीब 20 लाख रुपये खर्च किए थे। यह रकम तीन संदिग्ध डॉक्टरों—उमर, मुजम्मिल और शाहीन—को भेजी गई थी, जिन्हें साजिश के अहम किरदार माना जा रहा है।
हवाला चैनल बना फंडिंग का जरिया
जांच से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक यह पूरा पैसा हवाला नेटवर्क के जरिए पाकिस्तान से भारत में पहुंचाया गया था। जैश के स्लीपर सेल को सक्रिय करने के लिए हैंडलरों ने हवाला ऑपरेटरों की मदद ली थी। यह रकम सीधे उन तीन डॉक्टरों तक पहुंचाई गई, ताकि वे हमले की योजना को धरातल पर उतार सकें।
सुरक्षा एजेंसियां अब उस हवाला चेन की कड़ी-दर-कड़ी तलाश कर रही हैं, जिससे होकर यह पैसा भारत में आया था। जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है ताकि फंडिंग के पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके।
3 लाख रुपये में खरीदा गया NPK केमिकल, जो बना विस्फोट की जड़
सूत्रों का कहना है कि संदिग्ध डॉक्टरों ने 20 लाख रुपये में से करीब 3 लाख रुपये से लगभग 26 क्विंटल NPK (Nitrogen, Phosphorus, Potassium) केमिकल खरीदा था। आमतौर पर NPK का उपयोग खेती में खाद के रूप में होता है, लेकिन यह विस्फोटक बनाने में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
यह भी सामने आया है कि पैसे के बंटवारे को लेकर शाहीन और उमर के बीच मतभेद बढ़ने लगे थे। हालांकि, पूरी आतंकी योजना का दिमाग डॉक्टर मुजम्मिल को माना जा रहा है।
दिल्ली पुलिस ने सूत्रों के हवाले से बताया कि घटना स्थल से 9 एमएम कैलिबर के 3 कारतूस, 2 जिंदा गोलियां और एक खाली कारतूस के साथ कुछ हथियारों के अवशेष बरामद किए गए हैं।
पुलिस की प्रारंभिक जांच ने बढ़ाई चिंता
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बरामद कारतूस साधारण नहीं हैं, बल्कि सुरक्षा बलों या लाइसेंस प्राप्त कुछ सीमित लोगों के पास ही ऐसे कारतूस होते हैं। हालांकि, मौके पर कोई पिस्तौल नहीं मिली। एक खाली कारतूस से यह संकेत मिलता है कि गोली चलाई गई थी, लेकिन जिस हथियार से इसे दागा गया, वह अभी तक हाथ नहीं आया है।
यह भी जांच का विषय है कि इतने संवेदनशील कैलिबर के कारतूस राजधानी तक पहुंचे कैसे।
सीसीटीवी और फोरेंसिक से मिल रहे अहम सुराग
दिल्ली पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और विस्फोट स्थली की फोरेंसिक जांच जारी है। विशेषज्ञों की टीम आसपास के क्षेत्रों में मौजूद सबूतों का विश्लेषण कर रही है, ताकि घटना से पहले और बाद की गतिविधियों का स्पष्ट टाइमलाइन तैयार किया जा सके।
इस धमाके में 12 लोगों की दर्दनाक मौत हुई थी, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। ऐसी त्रासदी ने सुरक्षा तंत्र को झकझोर दिया है और अब एजेंसियां इस हमले की हर परत को खोलने में जुटी हैं कि आखिर यह साजिश इतनी दूर तक कैसे पहुंच पाई।














