नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सियासी माहौल और अधिक गर्म हो गया है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इस इस्तीफे को देशभर के छात्रों, युवाओं और विपक्षी दलों के लंबे संघर्ष का परिणाम बताते हुए इसे लोकतंत्र की बड़ी जीत करार दिया।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने पोस्ट में लिखा, "भारत के छात्रों की बुलंद आवाज आखिरकार सत्ता के बंद दरवाजों तक पहुंच गई। यह उन करोड़ों युवाओं की जीत है जिन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर पूरे देश में संघर्ष किया। यह सच्चाई की जीत है और अहंकार की राजनीति की हार है।" उन्होंने कहा कि लगातार चल रहे छात्र आंदोलनों ने सरकार को आखिरकार झुकने पर मजबूर कर दिया।
खड़गे ने आंदोलन के दौरान प्रभावित हुए परिवारों का जिक्र करते हुए कहा कि यह जीत उन माता-पिता और परिवारों को भी समर्पित है, जिन्होंने इस संघर्ष में अपने बच्चों को खोया या कठिन परिस्थितियों का सामना किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों और प्रशासनिक लापरवाही ने लाखों छात्रों का भविष्य संकट में डाल दिया और अब जनता ने उसका जवाब दे दिया है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा कि यह केवल छात्रों की जीत नहीं, बल्कि पूरे विपक्ष की सामूहिक सफलता है। उनके अनुसार, विपक्षी दलों ने संसद के भीतर और सड़कों पर लगातार छात्रों की आवाज उठाई तथा शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को मजबूती से रखा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनआवाज को दबाया नहीं जा सकता और अंततः सरकार को जनता की बात सुननी ही पड़ती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे संबोधित करते हुए खड़गे ने कहा कि केवल शिक्षा मंत्री का इस्तीफा देने से जिम्मेदारी पूरी नहीं हो जाती। उन्होंने मांग की कि प्रधानमंत्री सार्वजनिक रूप से देश के युवाओं से माफी मांगें और स्वीकार करें कि शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चूक हुई है। उनका कहना था कि सरकार को केवल राजनीतिक जिम्मेदारी तय करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि युवाओं का विश्वास भी दोबारा हासिल करना होगा।
इसके साथ ही खड़गे ने छात्र आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने मांग की कि जिन पुलिस अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों ने छात्रों पर लाठीचार्ज कराया या पैलेट गन जैसे बल प्रयोग के आदेश दिए, उनके खिलाफ तत्काल सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।













