नई दिल्ली। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने E20 (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) नीति के खिलाफ अपने अभियान को तेज करते हुए मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास तक मार्च निकालने की कोशिश की। हालांकि पार्टी मुख्यालय से निकलने के कुछ ही समय बाद पुलिस ने उन्हें और उनके साथ मौजूद नेताओं को रास्ते में रोक दिया। इसके बाद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और अन्य नेताओं के साथ सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। उनके साथ बड़ी संख्या में लोगों द्वारा ऑनलाइन हस्ताक्षरित ज्ञापनों का बंडल भी मौजूद था, जिसे बाद में पुलिस अधिकारियों को सौंप दिया गया। इस दौरान केजरीवाल ने कहा कि यदि सरकार ने लोगों की चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया तो E20 के मुद्दे पर नीट पेपर लीक आंदोलन से भी बड़ा जनआंदोलन खड़ा करना पड़ेगा।
पंडित रविशंकर शुक्ल लेन से शुरू हुआ यह मार्च फिरोजशाह रोड तक पहुंचा, जहां पुलिस ने आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी। करीब आधे घंटे तक सड़क पर धरने पर बैठे रहने के बाद केजरीवाल ने मीडिया से बातचीत की और केंद्र सरकार पर कई आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि भारत की इथेनॉल नीति पर अमेरिका का प्रभाव है और कहा कि अमेरिकी दबाव के चलते भारत बड़ी मात्रा में इथेनॉल खरीद रहा है।
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि अमेरिका दुनिया में सबसे अधिक इथेनॉल का उत्पादन करता है, लेकिन वहां इसकी खपत सीमित होने के कारण वह अतिरिक्त उत्पादन का उपयोग नहीं कर पा रहा। उन्होंने दावा किया कि इसी वजह से भारत पर इथेनॉल खरीदने का दबाव बनाया गया। उनके अनुसार, पिछले वर्ष भारत ने अमेरिका से बड़ी मात्रा में इथेनॉल खरीदा था और आने वाले समय में भी इस आयात में बढ़ोतरी की योजना है। उन्होंने आरोप लगाया कि विदेश से खरीदा गया इथेनॉल भारतीय पेट्रोल में मिलाया जा रहा है, जिससे आम लोगों की गाड़ियों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल किसी एक राजनीतिक दल या नेता की लड़ाई नहीं है, बल्कि देशभर के वाहन मालिकों और आम नागरिकों से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने कहा कि यदि जनता अपनी आवाज बुलंद नहीं करेगी तो सरकार इस नीति पर पुनर्विचार नहीं करेगी। केजरीवाल ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर पूरे देश को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी और यह आंदोलन नीट पेपर लीक के विरोध से भी बड़ा बन सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के लिए समय मांगा था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से प्रधानमंत्री आवास तक जाकर ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया। केजरीवाल ने कहा कि उनके साथ केवल करीब 100 लोग थे और सभी के हाथों में केवल हस्ताक्षरित याचिकाएं थीं।
पुलिस द्वारा मार्च रोके जाने पर नाराजगी जताते हुए केजरीवाल ने कहा, "हमारे हाथ में कोई गोला-बारूद नहीं था, हम किसी तरह की हिंसा करने नहीं जा रहे थे। हम कोई आतंकवादी नहीं हैं, फिर भी हमें भारी पुलिस बल लगाकर रोक दिया गया।" उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में बड़ी संख्या में लोग इस मुद्दे पर सड़क पर उतरेंगे, तो सरकार सभी को नहीं रोक पाएगी।
धरना समाप्त होने के बाद आम आदमी पार्टी के नेताओं ने ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान के तहत जुटाए गए ज्ञापन पुलिस अधिकारियों को सौंप दिए। पार्टी का कहना है कि E20 नीति को लेकर लोगों की चिंताओं को सरकार तक पहुंचाने का अभियान आगे भी जारी रहेगा और यदि आवश्यक हुआ तो देशभर में व्यापक जनसंपर्क और आंदोलन चलाया जाएगा।













