
संसद का मानसून सत्र शुरू होने से पहले रविवार को दिल्ली में सर्वदलीय बैठक का आयोजन किया गया जिसमें विभिन्न दलों के नेताओं ने अहम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। इस बैठक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गौरव गोगोई ने भारत की विदेश नीति को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए संसद में इस पर विस्तृत चर्चा की मांग रखी।
रविवार को हुई इस बैठक में गोगोई ने विशेष रूप से भारत की सीमा सुरक्षा और पड़ोसी देशों के साथ मौजूदा हालातों पर केंद्र सरकार की स्थिति स्पष्ट करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत एक ही समय में पाकिस्तान और चीन के मोर्चों पर तनाव का सामना कर रहा है, ऐसे में सरकार की विदेश नीति और रणनीति को लेकर संसद में पारदर्शिता होनी चाहिए।
गौरव गोगोई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संसद में उपस्थित होकर देश के सामने इन ज्वलंत मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि विदेश नीति केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे देश की होती है और उस पर विपक्ष की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
बैठक में शामिल अन्य विपक्षी नेताओं ने भी विभिन्न मुद्दों पर अपनी चिंता जाहिर की जिनमें मणिपुर की स्थिति, महंगाई, बेरोजगारी, कृषि संकट और जातीय जनगणना जैसे विषय शामिल थे। विपक्ष ने सरकार से अपेक्षा की कि वह इन मुद्दों को संसद के पटल पर लाकर खुली बहस कराए।
गौरतलब है कि संसद का मानसून सत्र 22 जुलाई से शुरू होने वाला है और यह कई महत्वपूर्ण विधेयकों, राजनीतिक बहसों और सरकारी घोषणाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सर्वदलीय बैठक का उद्देश्य यह था कि सत्र के सुचारू संचालन के लिए सभी दलों में समन्वय स्थापित किया जा सके।
इस बैठक में लोकसभा और राज्यसभा में नेता सदन, केंद्रीय मंत्रियों, प्रमुख विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों के अलावा संसदीय कार्य मंत्री ने भी शिरकत की और सभी दलों से सहयोग की अपील की।














