
नई दिल्ली। जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक 3 और 4 सितंबर को होने वाली है। इस बैठक में मुख्य रूप से यह फैसला लिया जाएगा कि वर्तमान चार स्लैब वाले जीएसटी सिस्टम को दो स्लैब में बदला जाए या नहीं। मंत्री समूह (जीओएम) ने दो स्लैब 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत को बनाए रखने की सिफारिश की है, जिसे परिषद के समक्ष रखा जाएगा।
छह सदस्यीय जीओएम का नेतृत्व बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि “हमने दो स्लैब वाली जीएसटी स्ट्रक्चर की सिफारिश जीएसटी परिषद को सौंप दी है। इस नई व्यवस्था में मौजूदा 12 प्रतिशत और 28 प्रतिशत स्लैब को समाप्त कर दिया जाएगा। इसका उद्देश्य एक सरल और पारदर्शी कर प्रणाली की ओर बढ़ना है।”
वर्तमान में भारत में चार स्लैब वाली जीएसटी व्यवस्था लागू है: 5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत। इसके अलावा, सिन और लग्जरी वस्तुओं पर अतिरिक्त उपकर भी लागू होता है। प्रस्तावित नई व्यवस्था के अनुसार, ‘मेरिट’ वस्तुओं और सेवाओं पर 5 प्रतिशत जीएसटी लगेगा, जबकि अधिकांश अन्य वस्तुएं 18 प्रतिशत के स्टैंडर्ड रेट के अंतर्गत आएंगी। कुछ विशेष वस्तुओं यानी सिन गुड्स पर 40 प्रतिशत का उच्च कर लगाया जाएगा। इनमें शराब, तंबाकू, ड्रग्स, जुआ, शीतल पेय, फास्ट फूड, कॉफी, चीनी और पोर्नोग्राफी जैसी वस्तुएं शामिल हैं। सिन टैक्स का उद्देश्य इन वस्तुओं के उपयोग को कम करना और उनके दुष्प्रभाव को नियंत्रित करना है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंत्री समूह की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि इस सरलीकृत प्रणाली से आम आदमी, किसान, मध्यम वर्ग और छोटे व्यवसायों को लाभ मिलेगा। इससे जीएसटी और अधिक पारदर्शी और विकासोन्मुखी बनेगा। नई व्यवस्था में 12 प्रतिशत स्लैब की अधिकांश वस्तुएं 5 प्रतिशत में शामिल हो जाएंगी, जबकि 28 प्रतिशत कर वाली वस्तुएं 18 प्रतिशत स्लैब में आएंगी। इससे अनुपालन में सुधार होगा और प्रणाली की जटिलताएं कम होंगी।
इसके अलावा मंत्रिसमूह ने व्यक्तिगत स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम पर जीएसटी से छूट देने के केंद्र के सुझाव की भी समीक्षा की। इन सभी सिफारिशों पर अंतिम निर्णय जीएसटी परिषद सितंबर की शुरुआत में अपनी बैठक में लेगी। इस कदम को देश में कर प्रणाली को सरल और कारोबार करने में आसान बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।














