बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की जीत के बाद जन सुराज खेमे के साथ-साथ तेज प्रताप यादव भी खासे उत्साहित नजर आए। उनकी खुशी की वजह भी साफ थी, क्योंकि चुनाव से पहले ही उनकी पार्टी जनशक्ति जनता दल (JJD) ने इस सीट पर प्रशांत किशोर के समर्थन का ऐलान कर दिया था। नतीजे सामने आने के बाद तेज प्रताप यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भाजपा नेता और पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन की एआई से तैयार की गई एक तस्वीर साझा करते हुए अपनी प्रतिक्रिया भी दी।
तेज प्रताप ने अपनी पोस्ट में लिखा, "बांकीपुर विधानसभा का परिणाम बिहार की राजनीति के लिए बड़ा संदेश लेकर आया है। यहां भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन अपनी ही विधानसभा सीट नहीं बचा सके। यह नतीजा साबित करता है कि लोकतंत्र में सबसे ऊपर जनता का फैसला होता है और अंतिम निर्णय हमेशा जनता ही सुनाती है। अब यह चर्चा भी तेज हो गई है कि बांकीपुर से निकला यह संदेश आने वाले समय में पूरे बिहार की राजनीति को प्रभावित कर सकता है।"
बांकीपुर विधानसभा से बड़ा राजनीतिक संदेश निकला है।
— Tej Pratap Yadav (@TejYadav14) August 3, 2026
भाजपा को यहाँ प्रचंड हार का सामना करना पड़ा। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन जी भी अपनी ही विधानसभा सीट नहीं बचा पाए। यह परिणाम बताता है कि जनता का जनादेश सर्वोपरि है और लोकतंत्र में अंतिम फैसला जनता ही करती है। अब यह चर्चा… pic.twitter.com/zAITrvwMu2
चुनाव से पहले ही किया था समर्थन का ऐलान
बांकीपुर उपचुनाव से पहले तेज प्रताप यादव ने स्पष्ट किया था कि उनकी पार्टी ने आंतरिक विचार-विमर्श के बाद प्रशांत किशोर और जन सुराज का समर्थन करने का फैसला लिया है। उन्होंने इसे राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बताते हुए कहा था कि पार्टी ने परिस्थितियों को देखते हुए यह निर्णय लिया है। वहीं मतगणना के दौरान जब जन सुराज लगातार बढ़त बनाए हुए था, तब भी तेज प्रताप ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोकतंत्र में अंतिम फैसला जनता के हाथ में होता है और इस चुनाव में मतदाताओं ने भाजपा को स्पष्ट संदेश दिया है।
क्या तेज प्रताप के समर्थन का मिला चुनावी लाभ?
तेज प्रताप यादव के समर्थन ने बांकीपुर का मुकाबला राजनीतिक रूप से और अधिक दिलचस्प बना दिया था। इसकी एक बड़ी वजह यह भी रही कि तेज प्रताप इन दिनों अपने भाई तेजस्वी यादव की राजनीतिक लाइन से अलग राह पर चलते नजर आ रहे हैं। ऐसे में प्रशांत किशोर के पक्ष में उनका खुला समर्थन केवल एक चुनावी फैसला नहीं माना गया, बल्कि इसे लालू परिवार के भीतर जारी राजनीतिक दूरी और बदलते समीकरणों के संकेत के तौर पर भी देखा गया।
हालांकि इस पूरे घटनाक्रम का एक अहम पहलू यह भी रहा कि शुरुआत में जनशक्ति जनता दल ने अपनी उम्मीदवार वीणा मानवी को मैदान में उतारने की तैयारी की थी। लेकिन उनका नामांकन रद्द होने के बाद पार्टी ने अपनी रणनीति पर दोबारा विचार किया और अंततः प्रशांत किशोर को समर्थन देने का फैसला लिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस निर्णय ने जन सुराज के पक्ष में नैतिक और राजनीतिक माहौल बनाने में कुछ हद तक मदद की, हालांकि चुनावी परिणाम पर इसका वास्तविक प्रभाव कितना रहा, इसे लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं।













