
बिहार की राजनीति इन दिनों बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। लंबे समय तक चले नीतीश युग के बाद अब राज्य में एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है, जहां पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री बनने जा रहा है। सम्राट चौधरी को एनडीए विधायक दल का नेता चुना गया है और वे बुधवार सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले हैं। इस मौके पर एनडीए की बैठक में नीतीश कुमार ने खुद उन्हें माला पहनाकर स्वागत किया। ऐसे में यह जानना दिलचस्प है कि सम्राट चौधरी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कैसे की और सीएम पद तक का सफर कैसे तय किया।
राजनीति में शुरुआती कदम
सम्राट चौधरी एक राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार की राजनीति के चर्चित नामों में रहे हैं, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत कांग्रेस से की थी और बाद में लालू प्रसाद यादव व नीतीश कुमार के साथ भी जुड़े। 16 नवंबर 1968 को जन्मे सम्राट चौधरी ने 1990 के दशक में सक्रिय राजनीति में कदम रखा। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत राष्ट्रीय जनता दल (राजद) से की, जो उस समय लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व में मजबूत पार्टी थी। साल 1999 में उन्हें राबड़ी देवी सरकार में मंत्री बनने का मौका मिला, हालांकि उम्र से जुड़े विवाद के चलते उन्हें पद छोड़ना पड़ा।
राजद से जदयू और फिर भाजपा तक का सफर
सम्राट चौधरी ने साल 2000 के विधानसभा चुनाव में राजद के टिकट पर परबत्ता सीट से जीत दर्ज कर पहली बार विधायक बने। इसके बाद 2010 में भी उन्होंने इसी सीट से जीत हासिल की। करीब एक दशक तक राजद के साथ जुड़े रहने के बाद 2014 में उन्होंने जदयू का दामन थाम लिया। जीतनराम मांझी की सरकार में उन्हें मंत्री पद भी मिला। लेकिन उनका यह पड़ाव ज्यादा लंबा नहीं चला और 2017 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का रुख किया। भाजपा में आने के बाद उन्हें पार्टी का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया और विधान परिषद का सदस्य भी चुना गया। 2020 के विधानसभा चुनाव के बाद बनी एनडीए सरकार में उन्हें मंत्री पद मिला और 2023 में वे बिहार भाजपा के अध्यक्ष बने।
सीएम पद तक पहुंचने का सफर
सम्राट चौधरी का राजनीतिक कद धीरे-धीरे लगातार बढ़ता गया। 2022 में जब जदयू और भाजपा का गठबंधन टूटा, तब उन्होंने एक प्रतीकात्मक संकल्प लेते हुए पगड़ी पहनने की बात कही थी, जिसे वे नीतीश कुमार के पद छोड़ने तक नहीं उतारने वाले थे। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले दोनों दलों ने फिर से हाथ मिला लिया और सम्राट चौधरी को उपमुख्यमंत्री बनाया गया। इस दौरान वे नीतीश कुमार के करीबी सहयोगियों में भी शामिल हो गए।
उनके भविष्य को लेकर संकेत पहले ही मिल चुके थे। 2025 के विधानसभा चुनाव के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक रैली में कहा था कि सम्राट चौधरी को आगे बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी। चुनाव के बाद जब एनडीए की सरकार बनी तो उन्हें उपमुख्यमंत्री के साथ-साथ गृह मंत्रालय भी सौंपा गया, जो लंबे समय तक नीतीश कुमार के पास रहा था। यह उनके बढ़ते राजनीतिक प्रभाव का साफ संकेत था।
भाजपा में आकर बदली किस्मत
हालांकि सम्राट चौधरी ने अपने राजनीतिक सफर में कई दलों का साथ लिया, लेकिन असली उछाल उन्हें भाजपा में आने के बाद ही मिला। 1990 के दशक में शुरू हुआ उनका सफर 2017 में भाजपा में शामिल होने के बाद नई ऊंचाइयों पर पहुंचा। वे पहले ही राबड़ी देवी सरकार में सबसे युवा मंत्रियों में शामिल रह चुके थे और जीतनराम मांझी की कैबिनेट का भी हिस्सा बने। लेकिन भाजपा में आने के करीब आठ साल के भीतर ही उन्होंने राज्य की राजनीति में शीर्ष स्थान हासिल कर लिया। अब वे बिहार के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं, जो उनके लंबे राजनीतिक सफर का सबसे बड़ा मुकाम माना जा रहा है।













