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RJD में प्रत्याशी चयन को लेकर रोहिणी आचार्य की नाराजगी, पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र पर उठाया सवाल

आरजेडी की 6 प्रत्याशियों की सूची पर रोहिणी आचार्य ने सवाल उठाए और निष्ठावान नेताओं की अनदेखी का आरोप लगाया। जानें उन्होंने क्या कहा।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Sat, 12 Sep 2026 1:25:56

RJD में प्रत्याशी चयन को लेकर रोहिणी आचार्य की नाराजगी, पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र पर उठाया सवाल

बिहार विधान परिषद् स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन-2026 के लिए राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की ओर से अधिकृत छह प्रत्याशियों की सूची जारी होने के बाद पार्टी के भीतर से ही सवाल उठने लगे हैं। लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने प्रत्याशियों के चयन को लेकर नाराजगी जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए पार्टी के समर्पित नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों की अनदेखी का आरोप लगाया।

रोहिणी आचार्य ने अपने पोस्ट में पार्टी के प्रत्याशियों के चयन के तरीके पर सवाल उठाया। उनका आरोप है कि वैचारिक प्रतिबद्धता और लंबे समय से संगठन के लिए काम करने वाले नेताओं की जगह ऐसे चेहरों को प्राथमिकता दी गई, जो चुनाव से ठीक पहले पार्टी के साथ आए।

उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले शामिल हुए अवसरवादी चेहरों को प्राथमिकता देना उन नेताओं और कार्यकर्ताओं का अनादर है, जिन्होंने लंबे समय तक पार्टी और संगठन के लिए संघर्ष किया। रोहिणी के मुताबिक, ऐसे कार्यकर्ताओं ने दशकों तक मुश्किल परिस्थितियों का सामना करते हुए संगठन को मजबूत करने में योगदान दिया है।

रोहिणी आचार्य ने अपने बयान में आरजेडी के आंतरिक लोकतंत्र पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से पार्टी के लिए काम करने वाले नेताओं को दरकिनार किया जाना जमीनी कैडर के प्रति उदासीनता को दर्शाता है। उनके मुताबिक, इस तरह का निर्णय निष्ठावान लालूवादियों के साथ वादाखिलाफी है।

उन्होंने आगे कहा कि प्रत्याशियों के चयन का यह फैसला लालू प्रसाद यादव की विचारधारा, पार्टी के मूल सिद्धांतों और संगठन को मजबूत करने के प्रयासों के लिए भी झटका है। इस तरह रोहिणी ने सीधे तौर पर पार्टी के भीतर प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया और उसके आधार को लेकर अपनी असहमति जाहिर की है।

बाढ़ और किसानों की मदद को लेकर भी सरकार पर उठा चुकी हैं सवाल

यह पहली बार नहीं है जब रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया के जरिए किसी राजनीतिक या जनहित के मुद्दे पर सवाल उठाए हैं। हाल ही में उन्होंने बिहार में बाढ़ और किसानों को मिलने वाली आर्थिक सहायता को लेकर भी सरकार पर सवाल खड़े किए थे।

उन्होंने कहा था कि बिहार में हर साल बाढ़ के कारण बड़ी मात्रा में फसल बर्बाद होती है और किसानों को गंभीर आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। उनके मुताबिक, सरकार फसल नुकसान के बाद डीबीटी पोर्टल के माध्यम से राहत राशि उपलब्ध कराने का दावा करती है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में यह सहायता किसानों के नुकसान की तुलना में पर्याप्त नहीं है।

रोहिणी आचार्य ने बिहार राज्य फसल सहायता योजना का उल्लेख करते हुए कहा था कि इसके तहत बिना किसी प्रीमियम के 7,500 रुपये प्रति हेक्टेयर और 20 प्रतिशत से अधिक नुकसान होने पर 10,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता राशि देने का प्रावधान है।

उन्होंने प्राकृतिक आपदा की स्थिति में फसल को 33 प्रतिशत या उससे अधिक नुकसान होने पर मिलने वाली सहायता का भी जिक्र किया था। उनके अनुसार, असिंचित क्षेत्र के लिए 8,500 रुपये, सिंचित क्षेत्र के लिए 17,000 रुपये और बहुवर्षीय फसलों के लिए 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से अधिकतम दो हेक्टेयर तक आर्थिक सहायता का प्रावधान है।

किसानों को मिलने वाली सहायता पर उठाए थे सवाल

रोहिणी ने कहा था कि मौजूदा समय में खेती की लागत और महंगाई को देखते हुए ये सहायता राशि पर्याप्त नहीं है। उनका कहना था कि प्रति एकड़ और प्रति हेक्टेयर खेती की लागत में काफी बढ़ोतरी हुई है, ऐसे में सरकारी सहायता से किसानों के भारी आर्थिक नुकसान की भरपाई कर पाना मुश्किल है।

उन्होंने फसल नुकसान के सर्वेक्षण और सत्यापन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए थे। उनका आरोप था कि सर्वेक्षण और सत्यापन में देरी, कागजी औपचारिकताओं और अफसरशाही में फैले भ्रष्टाचार के कारण कई वास्तविक किसान तथा गैर-रैयत यानी बटाईदार किसान भी सहायता से वंचित रह जाते हैं।

रोहिणी आचार्य ने सरकार से यह सवाल भी किया था कि आपदा के बाद केवल राहत राशि बांटना ही पर्याप्त है या किसानों को वास्तविक नुकसान के अनुरूप सहायता देने के लिए नई और व्यावहारिक नीति तैयार करने की जरूरत है। उन्होंने किसानों को मिलने वाली सहायता की मौजूदा व्यवस्था को लेकर व्यापक बदलाव की जरूरत पर जोर दिया था।

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