
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले राजनीतिक माहौल गर्माता जा रहा है। इसी बीच पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव एक नए विवाद में घिर गए हैं। उन पर आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगा है। दावा किया जा रहा है कि उन्होंने जनता को पैसे बांटे, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मामले के सामने आने के बाद प्रशासन ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।
हालांकि, एफआईआर के बाद पप्पू यादव ने बेबाकी से अपना पक्ष रखा और कहा — “हम भगवान से नहीं डरते, तो चुनाव आयोग से क्या डरेंगे?”
पैसे बांटने पर दी सफाई
पैसे बांटने के आरोपों पर सफाई देते हुए पप्पू यादव ने बताया कि उनका उद्देश्य राजनीतिक लाभ नहीं, बल्कि मदद करना था। उन्होंने कहा, “हम न तो किसी दल के उम्मीदवार हैं, न ही किसी सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। लेकिन वहां बाढ़ की स्थिति बेहद खराब थी — कई यादव और राजपूत परिवारों के घर पानी में बह गए थे। जब लोगों ने सोशल मीडिया पर टैग कर के मदद मांगी, तब मैं वहां गया और आर्थिक सहायता की।”
“जनता भूखी थी, इसलिए मदद की”
न्यूज़ एजेंसी एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा, “हम खुद नहीं जा रहे थे, लेकिन लोग 12 दिनों से भूखे थे। करीब 300-400 घर बाढ़ में डूब गए थे। ऐसे में अगर हमने कुछ मदद कर दी, तो इसमें गलत क्या है? भगवान से डरने वाला नहीं हूं, तो चुनाव आयोग से क्या डरूंगा? जनता का दुःख देख कर चुप बैठना पाप होता है।”
तेजस्वी यादव के रोजगार वाले वादे पर प्रतिक्रिया
जब उनसे तेजस्वी यादव के उस वादे के बारे में पूछा गया जिसमें उन्होंने 20 महीनों के भीतर सरकारी नौकरी देने की बात कही थी, तो पप्पू यादव ने संयमित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “हर नेता को अपनी बात रखने का हक है। लेकिन 20 महीने में इतनी नौकरियां देना व्यावहारिक रूप से मुश्किल है। हां, रोजगार सृजन की दिशा में कदम जरूर उठाए जा सकते हैं। कांग्रेस जैसी पार्टियों ने भी हमेशा रोजगार को प्राथमिकता दी है।”
“हम जनता के लिए काम करते हैं, सियासत के लिए नहीं”
पप्पू यादव ने दोहराया कि उनका मकसद चुनावी लाभ नहीं, बल्कि मानवीय सहायता है। उन्होंने कहा, “जब कोई भूखा होता है, तो उसे मदद देना इंसानियत है। यह राजनीति नहीं है। अगर किसी को इसमें भी सियासत दिखती है, तो यह उनकी सोच का आईना है।”














