
उत्तर बिहार में कांग्रेस की सियासी जमीन लगातार खिसकती जा रही है। कभी इस क्षेत्र में कांग्रेस का दबदबा था, लेकिन आज स्थिति यह है कि 71 विधानसभा सीटों में पार्टी के पास केवल एक विधायक है — मुजफ्फरपुर से विजेंद्र चौधरी। पार्टी ने उन्हें एक बार फिर चुनावी मैदान में उतारा है, जबकि सकरा से उमेश कुमार राम कांग्रेस के दूसरे उम्मीदवार हैं। हालांकि, दोनों सीटों पर जीत की राह आसान नहीं मानी जा रही।
18 उम्मीदवारों के साथ मैदान में उतरी कांग्रेस
कांग्रेस ने इस बार उत्तर बिहार की 18 सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े किए हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में यह संख्या 20 थी। उम्मीदवारों में बेनीपट्टी से नलिनी रंजन झा रूपम, फुलपरास से सुबोध मंडल, रीगा से अमित कुमार टुन्ना, बथनाहा से इंजीनियर नवीन कुमार, सुरसंड से सैयद अबू दोजाना, रक्सौल से श्याम बिहारी प्रसाद, गोविंदगंज से शशिभूषण राय, नौतन से अमित कुमार, चनपटिया से अभिषेक रंजन, बेतिया से वसी अहमद, नरकटियागंज से शाश्वत केदार, वाल्मीकिनगर से सुरेंद्र प्रसाद, बगहा से जयेश मंगल सिंह, बेनीपुर से मिथिलेश चौधरी, जाले से ऋषि मिश्रा और रोसड़ा (सु) से बीके रवि शामिल हैं। लेकिन अधिकांश सीटों पर मुकाबला कठिन दिख रहा है।
मुजफ्फरपुर में कभी था कांग्रेस का गढ़, अब रह गया एक नाम
एक समय था जब मुजफ्फरपुर जिला कांग्रेस का अभेद्य किला माना जाता था। 1977 से पहले तक यहां के 11 विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस का झंडा बुलंद रहता था। लेकिन वक्त के साथ तस्वीर पूरी तरह बदल गई। अब इस जिले में कांग्रेस की पहचान केवल विजेंद्र चौधरी तक सिमट गई है। दिलचस्प बात यह है कि वही विजेंद्र चौधरी, जिन्होंने 1995 में कांग्रेस विधायक रघुनाथ पांडेय को हराकर पार्टी को हाशिए पर पहुंचाया था, उन्होंने ही 25 साल बाद कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज कर पार्टी को फिर से जिलाई थी।
90 के दशक के बाद से लगातार गिरावट
1990 के बाद से कांग्रेस के लिए मुजफ्फरपुर की सियासत लगातार कठिन होती चली गई। 1972 तक जिस कांग्रेस से विरोधी दल भी खौफ खाते थे, अब वही पार्टी जिले में अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है। 2010 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जिले की सभी 11 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन एक भी प्रत्याशी दूसरे स्थान पर नहीं आ सका। 2015 में तो पार्टी ने जिले से कोई उम्मीदवार तक नहीं उतारा।
2020 में विजेंद्र चौधरी बने उम्मीद की किरण
2020 के चुनाव में कांग्रेस ने तीन सीटों — मुजफ्फरपुर, पारू और सकरा — से उम्मीदवार उतारे। इनमें से सिर्फ मुजफ्फरपुर से विजेंद्र चौधरी ने भाजपा के सुरेश कुमार को हराकर पार्टी को 25 साल बाद जिला स्तर पर पुनर्जीवित किया। यही जीत अब कांग्रेस के लिए एकमात्र सहारा बन गई है।
जिले में कांग्रेस की आखिरी जीतों पर नजर
विधानसभा क्षेत्र - कांग्रेस के विजेता उम्मीदवार- वर्ष
पारू - वीरेंद्र कुमार सिंह - 1972
साहेबगंज - नवल किशोर सिन्हा - 1985
बरुराज - जमुना सिंह - 1980
कांटी - शंभु शरण ठाकुर - 1972
कुढ़नी- शिवनंदन राय- 1985
सकरा- फकीरचंद राम- 1980
मुजफ्फरपुर- विजेंद्र चौधरी- 2020
औराई -राम बाबू सिंह -1972
गायघाट - वीरेंद्र कुमार सिंह- 1985
मीनापुर -जनक सिंह -1969
बोचहां — आज तक नहीं














