
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के मद्देनजर महागठबंधन के घटक दलों में सीट बंटवारे (Mahagathbandhan Seat Sharing) को लेकर चल रही खींचतान अब समाप्त होने की कगार पर है। राजद, कांग्रेस और वाम दलों के बीच जारी विवाद बुधवार तक सुलझ जाने की उम्मीद है।
कांग्रेस और वाम दलों की सहमति
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस ने 71 सीटों की मांग पर अड़ी थी, लेकिन अब वह 60 सीटों पर संतोष कर रही है। वहीं, भाकपा माले को 30 की बजाय 19 सीटें देने का फैसला हुआ है। अन्य वाम दलों जैसे भाकपा और माकपा ने भी अधिक सीटों की मांग की थी।
विकासशील इंसान पार्टी (Vikasheel Insaan Party – VIP) की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। प्रारंभिक योजना में उसे 18 सीटें आवंटित की गई थीं, लेकिन वाम दलों की सीटें बढ़ने से VIP की सीटें घट सकती हैं।
विवाद सुलझाने के संकेत
कांग्रेस के एक प्रवक्ता ने बताया कि मुख्य विवाद अब सुलझ चुका है और बुधवार को सीटों का औपचारिक ऐलान कर दिया जाएगा। इसके पहले, कांग्रेस की नाराजगी को देखते हुए राजद ने सोमवार रात को पहले जारी किए गए कुछ उम्मीदवारों के सिंबल वापस ले लिए थे।
राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद ने सोमवार रात दर्जनभर से अधिक उम्मीदवारों को सिंबल जारी किए थे, जिन्हें बाद में इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी साझा किया गया। कांग्रेस ने इसे लेकर आपत्ति जताई और तेजस्वी यादव से नाराजगी व्यक्त की। उनका कहना था कि घटक दलों के बीच सीटों का बंटवारा तय नहीं हुआ है, फिर सिंबल कैसे जारी किए गए।
इसके बाद राजद ने पास के क्षेत्रों के उम्मीदवारों को बुलाकर उनके सिंबल वापस ले लिए। वहीं दूरदराज के उम्मीदवारों को कहा गया कि वे इसे इंटरनेट से तुरंत हटाएं। राजद के अलावा भाकपा माले, भाकपा और माकपा ने भी कुछ उम्मीदवारों को सिंबल दिए थे, जिन्हें अब तक वापस नहीं लिया गया।
मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पद पर विवाद
कांग्रेस और राजद के बीच चुनाव से पहले मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पदों को लेकर भी खींचतान बनी हुई थी। कांग्रेस का कहना था कि इन पदों पर निर्णय केवल चुनाव परिणाम के बाद विधायक दल की बैठक में ही लिया जाए।
विकासशील इंसान पार्टी के संस्थापक मुकेश सहनी की ओर से उपमुख्यमंत्री पद की मांग को लेकर भी कांग्रेस असंतोष में थी। दोनों पक्षों ने अब इस मसले पर समझौता कर लिया है और मुकेश सहनी अब उपमुख्यमंत्री बनने की जिद नहीं करेंगे।
महागठबंधन के अंदर ये सहमति चुनावी रणनीति को मजबूत बनाने और विरोधी दलों के मुकाबले एकजुट होने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अब सबकी नजर बुधवार को होने वाली औपचारिक घोषणा पर टिकी हुई है।














