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बिहार में डस्टबिन की कीमत पर सियासी घमासान, रोहिणी आचार्य ने सम्राट सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

बिहार में डस्टबिन खरीद को लेकर रोहिणी आचार्य ने सम्राट चौधरी सरकार पर आरोप लगाए। दावा है कि 1,500 रुपये का डस्टबिन 15,000 रुपये में खरीदा गया।

Posts by : Kratika Maheshwari | Updated on: Wed, 12 Aug 2026 9:13:26

बिहार में डस्टबिन की कीमत पर सियासी घमासान, रोहिणी आचार्य ने सम्राट सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

बिहार की राजनीति में डस्टबिन की खरीद को लेकर नया विवाद सामने आया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से जुड़ी रोहिणी आचार्य ने सम्राट चौधरी सरकार पर डस्टबिन की खरीद में कथित अनियमितता का आरोप लगाया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए सरकार पर सवाल खड़े करते हुए दावा किया कि जिस डस्टबिन की कीमत करीब 1,500 रुपये बताई जा रही है, उसकी खरीद 15,000 रुपये में की गई।

रोहिणी आचार्य के इस आरोप के बाद बिहार की सियासत में एक बार फिर सरकार और विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज होने के संकेत हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए डस्टबिन की खरीद को लेकर लगाए गए दावे को फिलहाल रोहिणी आचार्य के आरोप के तौर पर ही देखा जा रहा है।

रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर क्या कहा?

रोहिणी आचार्य ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में सम्राट चौधरी सरकार पर निशाना साधते हुए डस्टबिन की कीमत को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने लिखा, "सम्राट सरकार का एक और झोल, डस्टबिन भी हुआ अनमोल..."

इसके आगे उन्होंने दावा किया कि बिहार में डस्टबिन की खरीद के लिए सामान्य कीमत से कई गुना अधिक राशि खर्च की गई। उनके मुताबिक, करीब 1,500 रुपये कीमत वाले डस्टबिन को 15,000 रुपये में खरीदा गया। रोहिणी ने इसी अंतर को आधार बनाते हुए सरकार की खरीद प्रक्रिया पर सवाल उठाया।

उन्होंने अपनी पोस्ट में यह भी सवाल किया कि आखिर इतनी अधिक कीमत पर डस्टबिन खरीदने की जरूरत क्यों पड़ी। रोहिणी आचार्य ने इसे लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और मंत्री मंगल पांडेय से जवाब मांगा।

'महंगे कूड़ेदान' को लेकर सरकार से सवाल


रोहिणी आचार्य ने अपने पोस्ट के माध्यम से पूछा कि बिहार की जनता के सामने इस कथित महंगी खरीद की वास्तविकता क्या है। उन्होंने सवाल उठाया कि 1,500 रुपये के बताए जा रहे डस्टबिन के लिए 15,000 रुपये खर्च करने के पीछे आखिर क्या वजह है।

उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में यह भी सवाल किया कि यह सिर्फ कूड़ा रखने का डिब्बा है या फिर सरकारी खजाने से जुड़ा कोई नया मामला है। इस पोस्ट के साथ रोहिणी ने एक तस्वीर भी साझा की, जिसमें पांच अलग-अलग तरह के डस्टबिन दिखाई दे रहे हैं। तस्वीर पर 'बिहार में डस्टबिन घोटाला' लिखा हुआ है।

हालांकि, उपलब्ध सामग्री में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इन डस्टबिन की खरीद किस विभाग या किस प्रक्रिया के तहत हुई और 15,000 रुपये की बताई गई कीमत से संबंधित दस्तावेज क्या हैं। ऐसे में रोहिणी आचार्य के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती।

तेजस्वी यादव भी सरकार पर लगा चुके हैं आरोप

डस्टबिन खरीद को लेकर रोहिणी आचार्य का हमला ऐसे समय में आया है, जब बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी सम्राट चौधरी सरकार पर भ्रष्टाचार और घोटाले के आरोप लगा चुके हैं। अब रोहिणी आचार्य ने भी सरकार के खिलाफ इसी तरह का राजनीतिक हमला बोला है और खरीद व्यवस्था को सवालों के घेरे में रखा है।

इस मामले में रोहिणी आचार्य ने सीधे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और मंत्री मंगल पांडेय का नाम लेते हुए उनसे स्पष्टीकरण की मांग की है। हालांकि, उपलब्ध संदर्भ सामग्री में दोनों की ओर से इस आरोप पर कोई जवाब या स्पष्टीकरण दर्ज नहीं है।

पार्टी संगठन में बदलाव का भी कर चुकी हैं समर्थन

रोहिणी आचार्य इससे पहले राष्ट्रीय जनता दल में संगठनात्मक बदलाव को लेकर भी अपनी राय जाहिर कर चुकी हैं। बिहार में पार्टी की सभी समितियों के विघटन के बाद उन्होंने इस फैसले का समर्थन किया था। संगठन के पुनर्गठन के दौरान उन्होंने तेजस्वी यादव को नई व्यवस्था तैयार करने को लेकर सुझाव भी दिए थे।

रोहिणी आचार्य का कहना था कि राजद की सभी संगठनात्मक इकाइयों और प्रकोष्ठों को भंग करने का फैसला काफी पहले किया जाना चाहिए था। उन्होंने नई समितियों के गठन में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, लंबे समय से जुड़े कार्यकर्ताओं और समर्पित समर्थकों को प्राथमिकता देने की बात कही थी।

अब डस्टबिन की खरीद को लेकर उनके ताजा आरोपों ने बिहार की राजनीति में एक और मुद्दा जोड़ दिया है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह मामला रोहिणी आचार्य द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है और सरकार की ओर से इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने की जानकारी नहीं है।

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