
बिहार चुनावों की तैयारियां जोरों पर हैं और पार्टियों ने अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। चुनावी तारीखों की घोषणा भी जल्द होने वाली है। इस बीच नए सर्वे ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिहार की जनता इस बार बदलाव चाहती है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, मतदाता युवा और नई ऊर्जा वाले नेताओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। यह सर्वे महागठबंधन के लिए उत्साहवर्धक है, जबकि एनडीए खेमे में चिंता बढ़ा सकता है।
सी-वोटर प्री-पोल सर्वे के नतीजे
सी-वोटर द्वारा किए गए प्री-पोल सर्वे में सबसे अधिक 36% लोगों ने तेजस्वी यादव को बिहार का मुख्यमंत्री मानना उचित बताया। तेजस्वी के बाद जन-सुराज संस्थापक प्रशांत किशोर हैं, जिन्हें 23% लोगों ने मुख्यमंत्री पद का योग्य उम्मीदवार माना।
नीतीश कुमार को 16% लोगों ने फिर से मुख्यमंत्री पद के लिए उपयुक्त माना, जबकि 10% ने लोजपा नेता चिराग पासवान को पसंद किया। इसके अलावा उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को केवल 7% लोगों ने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में चुना। यह सर्वेक्षण सितंबर 2025 में किया गया था और बिहार की जनता की ताज़ा राय को दर्शाता है।
नीतीश कुमार की लोकप्रियता
फरवरी में किए गए सर्वेक्षण में 58% लोग नीतीश कुमार के कामकाज से संतुष्ट थे, जबकि 39% असंतुष्ट थे। जून में संतुष्ट लोगों की संख्या बढ़कर 60% हो गई, और सितंबर के हालिया सर्वे में यह आंकड़ा 61% तक पहुंच गया। असंतोष व्यक्त करने वालों की संख्या 38% रही।
लोक पोल सर्वे ने भी दिखाई महागठबंधन की बढ़त
लोक पोल सर्वे के ताजा आंकड़े भी चौंकाने वाले हैं। यदि चुनाव आज होते, तो महागठबंधन को 118–126 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि एनडीए को 105–114 सीटें मिलने की संभावना है। बिहार में कुल 243 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए 122 सीटें आवश्यक हैं। इस समय स्थिति महागठबंधन के पक्ष में दिख रही है।
महागठबंधन को बढ़त क्यों
आरक्षण का समर्थन: तेजस्वी यादव के आरक्षण प्रस्ताव को ओबीसी और ईबीसी समुदाय का समर्थन प्राप्त है। कांग्रेस ने जातिगत गणना का उपयोग करके एससी और ईबीसी समुदाय (चमार, मुसहर, मल्लाह) में अपना आधार मजबूत किया।
नीतीश सरकार के खिलाफ विरोध: स्वास्थ्य सेवाओं, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था के मुद्दों से नीतीश सरकार की लोकप्रियता प्रभावित हुई है।
पलायन और बेरोज़गारी: युवा और पहली बार मतदान करने वाले मतदाता बेरोज़गारी और पलायन के कारण महागठबंधन की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
मुस्लिम-यादव समीकरण: मुस्लिम और यादव समुदाय का एकीकरण महागठबंधन के लिए फायदेमंद है।
जन सुराज का प्रभाव: जन सुराज ने जेडीयू के क्षेत्रों में सवर्ण मतदाताओं को आकर्षित किया है, जिससे बीजेपी के वोट बैंक में सेंध लगी है।
वोट चोरी और महिलाओं का रुख: “वोट चोरी” जैसे मुद्दों ने पीएम मोदी की अपील को कमजोर किया है। माई-बहन मन योजना और मुफ्त बिजली जैसी योजनाओं के कारण महिला मतदाता महागठबंधन की ओर रुख कर रही हैं।














