
वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 में भारत को इस बार खाली हाथ लौटना पड़ा। जैवलिन थ्रो फाइनल में उतरे दो भारतीय एथलीट—पिछले चैंपियन नीरज चोपड़ा और उभरते सितारे सचिन यादव—पोडियम तक नहीं पहुंच सके। दोनों से देश को बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन उनके प्रदर्शन ने निराश किया।
नीरज चोपड़ा, जिन्होंने दो साल पहले बुडापेस्ट में 88.17 मीटर थ्रो कर खिताब जीता था, इस बार अपने उस स्तर के आसपास भी नहीं दिखे। उन्होंने कुल पांच प्रयास किए, जिनमें दो फाउल रहे। उनका सर्वश्रेष्ठ थ्रो 84.03 मीटर का रहा, जिसके साथ वह बारह खिलाड़ियों की सूची में आठवें स्थान पर रहे। यह उनके अनुभव और स्टैंडर्ड के मुकाबले बेहद कमजोर प्रदर्शन था।
दूसरी ओर, सचिन यादव ने व्यक्तिगत रूप से भले ही एक बड़ी उपलब्धि हासिल की हो, लेकिन देश के लिए वह भी कोई पदक नहीं ला सके। उन्होंने 86.27 मीटर की दूरी तक भाला फेंका, जो उनका अब तक का सर्वश्रेष्ठ थ्रो रहा, लेकिन दुर्भाग्य से वह कांस्य पदक से महज 0.40 मीटर दूर रह गए। वह चौथे स्थान पर रहे।
BACK ON TOP 🤩
— World Athletics (@WorldAthletics) September 18, 2025
🇹🇹’s Keshorn Walcott launches 88.16m to claim his first ever world title in the javelin at #WorldAthleticsChamps 🚀
It’s his first global title since Olympic gold in 2012 😤#WorldAthleticsChamps pic.twitter.com/JNPdcJ4thi
इस प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक त्रिनिदाद के केशोर्न वाल्कॉट ने 88.16 मीटर की दूरी फेंककर अपने नाम किया। ग्रेनेडा के एंडरसन पीटर्स ने 87.38 मीटर के साथ रजत और अमेरिका के कर्टिस थॉम्पसन ने 86.67 मीटर के थ्रो से कांस्य पदक जीता।
नीरज का क्वालीफाइंग राउंड में प्रदर्शन काफी संतोषजनक रहा था। उन्होंने पहले ही प्रयास में 84.85 मीटर की दूरी तय कर फाइनल में जगह बना ली थी। इससे पहले वह 2020 टोक्यो ओलंपिक, 2022 और 2023 वर्ल्ड चैंपियनशिप और 2024 पेरिस ओलंपिक में भी पहले ही थ्रो में फाइनल में पहुंचे थे। इस निरंतरता को देखते हुए फैंस को उनसे इस बार भी बड़ी उम्मीदें थीं।
पाकिस्तान के स्टार एथलीट अरशद नदीम भी इस बार फाइनल में नहीं पहुंच सके। ऐसे में एशिया की दोनों बड़ी उम्मीदें—नीरज और नदीम—इस बार मुकाबले से बाहर रहीं, और यह इस प्रतियोगिता की सबसे बड़ी चर्चा का विषय भी बन गया।
भारत के लिए यह प्रदर्शन एक चेतावनी है। सिर्फ एक या दो खिलाड़ियों पर निर्भर रहना अब काफी नहीं होगा। नीरज जैसे स्टार की मौजूदगी के बावजूद जब मेडल नहीं आता, तो यह साफ संकेत है कि देश को एथलेटिक्स में व्यापक और दीर्घकालिक निवेश की जरूरत है। आने वाले वर्षों में भारत को नई प्रतिभाओं को तैयार करना होगा, ताकि वैश्विक मंच पर देश का प्रतिनिधित्व सिर्फ एक चेहरे तक सीमित न रहे।














