
उत्तराखंड क्रिकेट संघ के खिलाफ करोड़ों रुपये के कथित दुरुपयोग का मामला उच्च न्यायालय में पहुंच गया है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य क्रिकेट संघ द्वारा टूर्नामेंटों के लिए निर्धारित सरकारी धन के खर्च की जांच की मांग वाली याचिकाओं पर बीसीसीआई को नोटिस जारी किया।
याचिकाकर्ताओं, जिनमें देहरादून के संजय रावत और अन्य शामिल हैं, ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए उत्तराखंड क्रिकेट संघ के खातों की जांच की मांग करते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। याचिकाकर्ताओं ने संघ की ऑडिट रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि रिपोर्ट में खर्च की गई राशि को देखकर वे चकित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि खिलाड़ियों के लिए केले उपलब्ध कराने पर ही 35 लाख रुपये खर्च कर दिए गए, जो अत्यधिक और असामान्य है।
याचिकाओं में यह भी आरोप लगाया गया कि बोर्ड ने भोजन और आयोजन खर्च के नाम पर करोड़ों रुपये की हेराफेरी की और राज्य के खिलाड़ियों को पर्याप्त सुविधाएं कभी नहीं दीं। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, आयोजन प्रबंधन शुल्क पर 6.4 करोड़ रुपये और टूर्नामेंट प्रबंधन, ट्रायल मैचों और अन्य जरूरतों पर 26.3 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि पिछले साल यह राशि 22.30 करोड़ रुपये थी। न्यायमूर्ति मनोज तिवारी की एकल पीठ ने दलीलों को सुनने के बाद अगली सुनवाई शुक्रवार, 12 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी।
इसी बीच, इस महीने की 5 तारीख को एक और याचिका उत्तराखंड प्रीमियर लीग 2025 के टेंडर प्रक्रिया को लेकर उच्च न्यायालय में दाखिल की गई। इसमें संघ के उपाध्यक्ष सुरेंद्र भंडारी ने आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताएं हैं और जानबूझकर एक ही कंपनी को टेंडर दिए जा रहे हैं। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष की पीठ ने बीसीसीआई और उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन के अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।
इस तरह उत्तराखंड क्रिकेट संघ के वित्तीय और प्रशासनिक मामलों में गंभीर सवाल उठ रहे हैं, जिनकी जांच और जवाबदेही उच्च न्यायालय के समक्ष अब आगे की सुनवाई में तय होगी।














